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सच बात—देश की बात

किसान आंदोलन बिगाड़ने की साजिश,हो सकती है हिंसा

tomar kissan3खुफिया विभाग ने सरकार को रिपोर्ट दी है जिसमें कहा गया है कि किसान आंदोलन पर अल्ट्रा-लेफ्ट लीडर्स और वामपंथी उग्रवादियों ने कब्जा हो गया है।  रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने दावा किया है कि इस बात के विश्वनीय खुफिया सूचनाएं हैं कि उग्र वामपंथी नेता और वामपंथी उग्रवादी संगठन योजना बना रहे हैं कि आने वाले दिनों में किसानों को हिंसा, आगजनी, तोड़-फोड़ के लिए कैसे उकसाया जाए।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को लगता है कि किसान आंदोलन को हाइजैक किया जा रहा है। उन्होंने आंदोलनकारियों के हाथों में उमर खालिद, शरजील इमाम जैसे लोगों की रिहाई की मांग वाले प्लेकार्ड्स होने के पीछे साजिश की बात कही।  प्रसाद ने कहा, ‘इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि टुकड़े-टुकड़े गैंग अजेंडे को टेकओवर करने की कोशिश कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि किसान संगठनों के विरोध का फायदा उठाने के लिए उनकी तस्वीरें प्रदर्शित की जा रही हैं। शायद ऐसे तत्वों की मौजूदगी के कारण ही सरकार के साथ बातचीत सफल नहीं हो रही है।देश के कानून मंत्री ने कहा कि सरकार खुले दिमाग के साथ बातचीत को तैयार है जबकि उधर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही। ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी गई। उन्होंने किसानों से अपने आंदोलन को हाइजैक न होने देने की अपील की। प्रसाद ने इन तत्वों को भारत की संप्रभुता के लिए हानिकारक बताया और कहा कि ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी लेकिन किसानों के विरोध की पवित्रता बरकरार रहनी चाहिए।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों के वेष में असामाजिक तत्व किसान आंदोलन का माहौल बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने किसानों से इनसे बचकर रहने की अपील की। उन्होंने कहा, “किसान भाइयों से आग्रह है कि वो इन असामाजिक तत्वों को प्लैटफॉर्म मुहैया नहीं कराएं।” उन्होंने इस बात पर भी रोष प्रकट किया कि किसान प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न आरोपों में जेल में बंद लोगों की रिहाई की मांग की। उन्होंने कहा, “यह खतरनाक है। किसान संगठनों को इन लोगों से दूर रहना चाहिए। यह मुद्दे को भटकाने का प्रयास है।” उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से भी किसान आंदोलन में असामाजिक तत्वों की घुसपैठ पकड़ने की अपील की। तोमर ने कहा, “मीडिया की निगाह काफी तीक्ष्ण होती है। हम आप पर ही छोड़ देते हैं। अब आप ही पता लगाएं।” इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा कि मीडिया को अपनी स्किल की इस्तेमाल कर यह पता करना चाहिए कि आखिर किसान आंदोलन को कौन से तत्व हाइजैक कर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि कुछ लोग चर्चा में बार-बार बस एक ही मुद्दा उछालते रहे कि कानून रद्द करो और हम कुछ बात नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि एक वर्ग इस आंदोलन में घुस गया है जो लेफ्ट और माओवादी विचारधारा से प्रभावित है और वे नहीं चाहते हैं कि इस समस्या का समाधान हो। वे चाहते हैं कि वार्ता सफल न हो। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई ऐसे मुद्दे, जिस पर शंका की कहीं कोई बात ही नहीं है, उस पर भी कहा कि हम उसे और सुदृढ़ करने के लिए तैयार हैं। कुछ विषयों को लेकर हमने कानून में बदलाव की भी बात की। सरकार ओपेन माइंड से बात कर रही है। हमारा अब भी कहना है कि प्रस्ताव की फिर से स्टडी करें, देशभर के किसानों ने इसका स्वागत किया है पर कुछ लोग इसे सफल नहीं होने देना चाहते।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, “सरकार किसान संगठनों से बातचीत के लिए तैयार है। सरकार ने किसानों की कई मांगें मान ली हैं लेकिन जब बातचीत में उनकी मंशा प्रकट हुई कि शरजील इमाम जैसे लोगों की रिहाई हो। मुझे लगता है कि किसान संगठन की जगह अब आंदोलन देश को तोड़ने वाले हाथों में चला गया है।”

खुफिया विभाग की रिपोर्ट पर किसान नेता राकेश टिकैत की प्रतिक्रिया सामने आई है. राकेश टिकैत ने कहा,  हमारे एजेंडे में यह नहीं है. हमें भी जानकारी मिली कि हरियाणा साइड मे पोस्टर लगे है. हमारी कोर कमेटी की मीटिंग में यह कोई मसला नहीं है. हमारा यह कोई एजेंडा नहीं है. इस दौरान उन्होंने किसान नेताओं से अपील करते हुए कहा कि अगर उन्हें ऐसे कोई तत्व नजर आता है तो उन्हें आंदोलन में घुसने न दिया जाए. टिकैत ने कहा कि हमारा एजेंडा तीन कानूनों को लेकर है, बस MSP पर कानून केवल यही हमारा निर्णय है

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