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‘ किसान आंदोलन ‘ के नाम पर उग्रवादियों जैसा काम

farmer oneदिल्ली की विभिन्न सीमाओं से ट्रैक्टर मार्च निकालने वाले किसानों और पुलिस के जवानों के बीच हुए टकराव में मंगलवार को 83 पुलिसकर्मी घायल हो गए। दिल्ली पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि परेड के दौरान किसानों द्वारा एडिशनल डीसीपी (ईस्ट) के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ाने की भी कोशिश की गई। दिल्ली पुलिस अब मंगलवार को मचे बवाल को लेकर कानूनी कार्रवाई की भी तैयारी कर रही है। उपद्रव के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए पुलिस ने कहा, ”आज दिल्ली में आंदोलनकारी किसानों द्वारा हमला किए जाने से 83 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।” वहीं, दिल्ली के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार ने कहा, ”एडिशनल डीसीपी (ईस्ट) मंजीत को आखिरी वक्त में सुरक्षाकर्मियों ने ट्रैक्टर के सामने से हटा दिया, नहीं तो बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। हमारे यहां एक प्रोबेशनल एसीपी हैं, उनको भी काफी चोट लगी है। कई और पुलिसवाले हैं, जिनका इलाज चल रहा है। यह प्रदर्शन उग्र तरीके से किया गया था और काफी तोड़फोड़ की गई।”

प्रदर्शनकारी किसानों ने दिल्‍ली पुलिस के जवानों के ऊपर पहले ट्रैक्‍टर चढ़ाने की कोशिश की। फिर एक निहंग ने तलवार लेकर पुलिसकर्मी पर हमला करने किया।

‘किसानों ने निर्धारित रूटों का नहीं किया पालन’
farmerदिल्ली पुलिस ने आगे कहा कि प्रदर्शनकारी किसानों ने ट्रैक्टर परेड के लिए पूर्व निर्धारित शर्तों पर बनी सहमति का पालन नहीं किया और हिंसा तथा तोड़फोड़ की जिसमें अनेक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस ने दावा किया कि बल ने रैली की शर्तों के अनुपालन के लिए सभी प्रयास किए, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित समय से काफी पहले ही अपना मार्च शुरू कर दिया और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया। दिल्ली पुलिस का बयान तब आया है जब राष्ट्रीय राजधानी में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसक दृश्य देखने को मिले। किसानों ने नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर विभिन्न स्थानों से दिल्ली में प्रवेश किया, लेकिन इस ट्रैक्टर परेड में हिंसा की घटनाएं हुईं।

‘तय समय से पहले ही किसानों ने शुरू कर दी ट्रैक्टर रैली’
दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी ईश सिंघल ने कहा, ”प्रदर्शनकारियों ने रैली के लिए निर्धारित शर्तों का उल्लंघन किया। किसानों ने निर्धारित समय से काफी पहले ही ट्रैक्टर रैली शुरू कर दी। उन्होंने हिंसा और तोड़फोड़ की। सिंघल ने कहा, ”हमने वायदे के अनुरूप सभी शर्तों का पालन किया और अपने सभी प्रयास किए, लेकिन प्रदर्शन में सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान हुआ है।”

India Republic Dayकिसानों ने ट्रैक्टर रैली में तोड़े कई बैरिकेड्स
लाठी-डंडा, तिरंगा और अपनी यूनियनों के झंडे लिए हजारों किसानों ने ट्रैक्टरों से बैरिकेड्स को तोड़ दिया। वे पुलिस से भिड़ गए और विभिन्न स्थानों से दिल्ली के भीतर घुस गए। आईटीओ पर लाठी-डंडा लिए सैकड़ों किसान पुलिस का पीछा करते देखे गए और उन्होंने वहां खड़ी बसों को अपने ट्रैक्टरों से टक्कर मारी। एक प्रदर्शनकारी की तब मौत हो गई जब उसका ट्रैक्टर पलट गया। आईटीओ युद्धक्षेत्र में तब्दील नजर आया जहां प्रदर्शनकारियों ने एक कार को भी तोड़ दिया। वहां सड़कों पर ईंट-पत्थर बिखरे नजर आए।

किसानों का आंदोलन गणतंत्र दिवस पर अराजक हो गया। 26 जनवरी पर ट्रैक्टर रैली निकालने के लिए जिद्द पर अड़े रहे किसान नेता हिंसा और तोड़फोड़ के बीच अब अपना पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने उत्पात मचाने वालों से खुद को अलग करते हुए घटना की निंद की है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने पहले तो हिंसा की जानकारी होने से इनकार किया और फिर आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों के लोग आंदोलन को खराब करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। किसान नेता योगेंद्र यादव ने भी किसानों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने उपद्रव करने वालों से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि हम अवांछित और अस्वीकार्य घटनाओं की निंदा करते हैं और इसमें शामिल लोगों से खुद को अलग करते हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने बयान जारी करते हुए कहा, ”हमारे सभी प्रयासों के बावजूद कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने रूट का उल्लंघन किया और निंदायोग्य काम किए। कुछ असामाजिक तत्वों ने घुसपैठ की है, नहीं तो आंदोलन शांतिपूर्ण था। हमने हमेशा कहा है कि शांति हमारी सबसे बड़ी ताकत है और इसके उल्लंघन से आंदोलन को नुकसान होगा।”आईटीओ के बाद लाल किले पर चल रहे उत्पात के बीच किसान नेता राकेश टिकैत यूपी गेट पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि बेरिकेडिंग दिल्ली पुलिस ने तोड़ी। हजारों किसानों को तय रूट पर निकलने नहीं दिया गया। टिकैत ने कहा, ”जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की है। हम शांतिपूर्ण मार्च निकलना चाहते थे। दिल्ली में लाल किले तक पहुचे किसानों की जानकारी नहीं है।” राकेश टिकैत से जब पूछा गया कि क्या यह आंदोलन किसान नेताओं के हाथ से निकल गया है तो उन्होंने कहा, ”नहीं, यह हमारे हाथ में है। हम जानते हैं कि कौन लोग बाधा पैदा करना चाहते हैं। उनकी पहचान हो गई है। ये लोग राजनीतिक दलों के लोग हैं जो आंदोलन को बदनाम करना चाहते हैं।”

किसानों ने पुलिस के बैरिकैड्स तोड़े
किसानों को ट्रैक्टर परेड निकालने का समय गणतंत्र दिवस के बाद दिया गया था। हालांकि परेड के दौरान ही दिल्ली में किसानों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें सामने आने लगी थीं। पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले भी दागे। किसानों ने जगह-जगह पुलिस के बैरिकेड्स तोड़ दिए। वहीं कुछ किसानों ने पुलिसवालों पर ट्रैक्टर चढ़ाने की भी कोशिश की। इसके अलावा एक बुजुर्ग निहंग तलवार लेकर पुलिसवालों को ललकारता दिखाई दिया।

दिल्ली पुलिस की गांधीगिरी
प्रदर्शनकारी तय मार्गों से इतर कई रास्तों से परेड गुजारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस उन्हें समझाने की कोशिश कर रही है। कई जगहों पर प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया और पुलिस के साथ किसानों की भिड़ंत हो गई। दिल्ली के नांगलोई में भी ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। यहां पुलिस अधिकारियों ने पहले किसानों को समझाने की कोशिश की। जब वे नहीं माने तो कई अधिकारी एकसाथ सड़क पर बैठ गए।

 

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