Pages Navigation Menu

Breaking News

लव जेहाद: उत्तर प्रदेश में 10 साल की सजा का प्रावधान

पाकिस्तान संसद ने माना, हिंदुओं का कराया जा रहा जबरन धर्मातरण

जम्‍मू-कश्‍मीर में 25 हजार करोड़ का भूमि घोटाला

113 करोड़ रुपये के ‘घोटाले’ में फंसे फारूक अब्दुल्ला !

farooqabdulla-39नई दिल्ली/श्रीनगर. नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद और जम्मू-कश्मीर  के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला  से प्रवर्तन निदेशालय ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ  के कोष में कथित गबन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक केस में सोमवार को पूछताछ की. अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पहले की तरह धनशोधन निवारण अधिनियम  के तहत नेशनल कान्फ्रेंस के अध्यक्ष अब्दुल्ला का बयान दर्ज किया जाएगा. ईडी ने सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर यह मामला दर्ज किया है. सीबीआई ने जेकेसीए के महासचिव मोहम्मद सलीम खान और पूर्व कोषाध्यक्ष एहसान अहमद मिर्जा समेत कई पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था.सीबीआई ने 2002 से 2011 के बीच भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा खेल को बढ़ावा देने के लिये जेकेसीए को दिये गए अनुदान में से 43.69 करोड़ रुपये के गबन के मामले में अब्दुल्ला, खान, मिर्जा के अलावा मीर मंजूर गजनफर अली, बशीर अहमद मिसगार और गुलजार अहमद बेग (जेकेसीए के पूर्व अकाउंटेंट) के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था.
ईडी ने कहा कि उसकी जांच में सामने आया है कि जेकेसीए को वित्त वर्षों 2005-2006 और 2011-2012 (दिसंबर 2011 तक) के दौरान तीन अलग-अलग बैंक खातों के जरिये बीसीसीआई से 94.06 करोड़ रुपये मिले.

उधर फारूक के बेटे उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया कि नेशनल कान्फ्रेंस जल्द ही ईडी के सम्मनों का जवाब देगी. उन्होंने ट्वीट किया, ‘यह कुछ और नहीं बल्कि ‘गुपकर घोषणा’ के तहत ‘पीपुल्स अलायंस’ के गठन के बाद की जा रही प्रतिशोध की राजनीति है.’यह मामला 2012 में जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन में करीब 113 करोड़ रुपये के गबन से जुड़ा है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने अप्रैल 2002 से दिसंबर 2011 के दौरान जेकेसीए को यह रकम ट्रांसफर की थी, लेकिन फंड का कथित तौर पर गबन कर लिया गया. हाईकोर्ट ने 2017 में 9 मार्च को इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपते हुए कहा था कि पुलिस की जांच में तेजी और विश्वसनीयता का अभाव है.इससे पहले साल 2019 में ईडी ने अगस्त में अनुच्छेद 370 के प्रावधान निरस्त करने से पहले फारूक से सवाल किए थे. फारूक को इस साल की शुरुआत में हाउस अरेस्ट से रिहा किया गया था, उसके बाद उनके बेटे उमर अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती रिहा की गईं.

क्या है मामला?
यह कथित घोटाला मार्च 2012 में सामने आया था जब जेकेसीए के कोषाध्यक्ष मंज़ूर वज़ीर ने पूर्व महासचिव मोहम्मद सलीम खान और पूर्व कोषाध्यक्ष अहसान मिर्ज़ा के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज की थी. जल्द ही, वित्तीय घोटाले से जुड़े लगभग 50 नामों की एक सूची तैयार की गई. अब्दुल्ला तीन दशक से अधिक समय तक केसीए अध्यक्ष का पद से हटे थे.ईडी ने जेकेसीए के फंड के कथित गबन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 2.6 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की. केंद्रीय एजेंसी ने फरवरी में जेकेसीए के पूर्व कोषाध्यक्ष अहसान अहमद मिर्जा और इसकी वित्त समिति के सदस्य मीर मंसूर गजनफर के खिलाफ संपत्ति की कुर्की का आदेश जारी किया गया था.

JKCA के पूर्व पदाधिकारियों  के खिलाफ भी मामला दर्ज
ED का मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एफआईआर पर आधारित है, जिसमें बाद में जांच एजेंसी ने JKCA के पूर्व पदाधिकारियों  के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था. जिसमें महासचिव मोहम्मद सलीम खान और मिर्ज़ा शामिल थे. सीबीआई ने फारूक अब्दुल्ला, खान, मिर्जा, मीर मंज़ूर गजनफर अली, बशीर अहमद मिसगर और गुलज़ार अहमद बेग (जेकेसीए के पूर्व लेखाकार) के खिलाफ चार्जशीट दायर की, जिसमें  2002-11 के बीच राज्य में खेल को बढ़ावा देने के लिए एसोसिएशन ऑफ कंट्रोल फॉर इंडिया (BCCI) द्वारा दिए गए अनुदानों में से 43.69 करोड़ रुपये के ‘जेकेसीए के धन की हेराफेरी’ की गई.’ईडी की जांच में पाया गया है कि वित्त वर्ष 2005-2006 से 2011-2012 (दिसंबर 2011 तक) के दौरान जेकेसीए को तीन अलग-अलग बैंक खातों में बीसीसीआई से 94.06 करोड़ रुपये मिले. ईडी ने आरोप लगाया था कि ‘हालांकि JKCA के नाम पर कई अन्य बैंक खाते खोले गए थे, जिनमें ये धनराशि हस्तांतरित की गई थी. मौजूदा बैंक खातों के साथ इस तरह के अन्य बैंक खातों को बाद में जेकेसीए की धनराशि के लिए इस्तेमाल किया गया था.’

Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *