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G-7 देशों ने कई मुद्दों पर चीन को घेरा

G-7-summitलंदन कोरोना वायरस की महामारी फैलने को लेकर चीन पर आरोप लगते रहे हैं। ब्रिटेन में हुए जी-7 समिट  के दौरान भी सदस्य देशों ने वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए नई स्टडी की मांग की। इसमें चीन की भूमिका को लेकर पहले भी जांच की गई थी और विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम चीन भेजी गई थी लेकिन उसे पूरा डेटा नहीं दिया गया था। समिट में चीन पर लगे मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों पर भी बयान जारी किया गया।

  • G-7 देशों ने कई मुद्दों पर चीन को घेरा, जांच की मांग
  • कोरोना वायरस कहां से पैदा हुआ, इसे लेकर सवाल
  • शिनजियांग, हॉन्ग-कॉन्ग में मानवाधिकार उल्लंघन
  • चीन की आर्थिक चुनौतियों को लेकर भी चिंता दिखी

भारत समेत इन देशों को गेस्ट तौर पर बुलाया गया
जी-7 में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका शामिल हैं। जी-7 की अध्यक्षता कर रहे ब्रिटेन ने भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका को अतिथि देश के तौर पर आमंत्रित किया है।

stop chinaवायरस लीक की जांच हो
जी-7 देशों ने अपने बयान में मांग की है कि WHO एक्सपर्ट्स से कोविड-19 की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए साइंस पर आधारित पारदर्शी जांच समय से कराए। वहीं, ब्रिटेन के विदेश मंत्री डॉमिनिक राब ने कहा है कि महामारी के वुहान लैब से लीक वायरस से फैलने की आशंका को लेकर अधिकारियों के ‘तुलनात्मक नोट’ और अधिक जांच की मांग करते हैं।

WHO चीफ ने भी माना
इससे पहले WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अदनोम गेब्रेयसस ने शनिवार को कहा था कि कॉर्नवाल में आयोजित जी-7 सम्मेलन के दौरान स्वास्थ्य मामलों और महामारी के स्रोत का पता लगाने को लेकर आयोजित औपचारिक सत्र में इस आशंका को उठाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि वायरस की उत्पत्ति की स्टडी का पहला चरण निर्णायक नहीं था और वहां पर चार सिद्धांत थे लेकिन उनपर अबतक कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। इसलिए हमारा मानना है कि सभी चारों सिद्धांत खुले होने चाहिए और हमें दूसरे चरण की ओर बढ़ना चाहिए ताकि वायरस के ओरिजन का पता चल सके।

हॉन्ग-कॉन्ग, शिनजियांग पर चीन को घेरा
रविवार को जारी किए गए बयान में बंधुआ मजदूरी के खिलाफ चिंता जाहिर की गई। इसमें कहा गया कि चीन को शिनजियांग में मानवाधिकारों का सम्मान करना चाहिए, हॉन्ग-कॉन्ग को ज्यादा स्वायत्ता देनी चाहिए और दक्षिण चीन सागर में सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चीन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मैन्युअल मैक्रों ने कुछ हद तक उनका समर्थन भी किया।

बाइडेन के साथ नहीं यूरोप?
बाइडेन चीन के साथ आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धा करने के लिए साथी लोकतांत्रिक नेताओं को अधिक एकजुट मोर्चा पेश करने पर राजी करना चाहते थे। हालांकि, यूरोप के नेताओं ने उस तरह उनका साथ नहीं दिया जिस तरह वह उम्मीद कर रहे होंगे। बयान जारी करने से पहले तक कई मुद्दों पर बोलना है या नहीं, इसे लेकर फैसला नहीं हो सका था।अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक सभी देशों ने बाइडेन का कई मुद्दों पर साथ दिया लेकिन चीन को लेकर ठोस सहमति नहीं बन सकी। खासकर जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और इटली के प्रधानमंत्री मारियो डराघी और दूसरे नेताओं को चिंता थी कि बयान को चीन को उकसाने के तौर पर न देखा जाए।

चीन से आर्थिक चुनौती पर भी नजर
जी-7 के नेताओं ने यह भी कहा है कि वे चीन के बाजार निर्देशित अर्थव्यवस्था से अलग तरीकों को चुनौती देने के लिए मिलकर काम करेंगे। बयान में जी-7 ने कहा, ‘चीन और वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिल रही प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में, हम बाजार निर्देशित अर्थव्यस्था से भिन्न नीतियों और तरीकों को चुनौती देने के लिए सामूहिक पहल के वास्ते परामर्श करते रहेंगे क्योंकि ऐसे तरीके वैश्विक अर्थव्यवस्था के निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन को कमजोर बनाते हैं।’

मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में वर्चुअली लिया हिस्सा

पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने शनिवार को जी-7 देशों के सम्मेलन में वर्चुअली हिस्सा लिया। कोरोना काल में पीएम ने अपने भाषण में हेल्थ की बात की। पीएम मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के एक सत्र को डिजिटल तरीके से संबोधित करते हुए कोरोना वायरस महामारी से प्रभावी तौर पर निपटने के लिए ‘एक धरती, एक स्वास्थ्य’ (One Earth, One Health) का मंत्र दिया।पीएम मोदी ने भविष्य की महामारी को रोकने के लिए वैश्विक एकजुटता, नेतृत्व और तालमेल का आह्वान करते हुए मोदी ने चुनौती से निपटने के लिए लोकतांत्रिक और पारदर्शी समाजों की विशेष जिम्मेदारी पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड संबंधी प्रौद्योगिकियों पर पेटेंट छूट के लिए भारत, दक्षिण अफ्रीका द्वारा डब्ल्यूटीओ में दिए गए प्रस्ताव के लिए जी-7 के समर्थन का भी आह्वान किया।

WTO के दिए गए प्रस्ताव पर मांगा जी-7 का समर्थन
एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्वास्थ्य शासन में सुधार को लेकर सामूहिक प्रयासों के लिए भारत के सहयोग की प्रतिबद्धता जतायी। उन्होंने कोविड संबंधी प्रौद्योगिकियों पर ट्रिप्स (बौद्धिक संपदा अधिकार के कारोबारी पहलुओं संबधी छूट) के लिए भारत और दक्षिण अफ्रीका द्वारा विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में दिए गए प्रस्ताव पर जी-7 के समर्थन का भी आह्वान किया।’

जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल पीएम मोदी के मंत्र का किया जिक्र
पीएम मोदी के मंत्र का जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने खासतर तौर जिक्र किया। जी-7 समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति ने टीके के लिए भारत को कच्चा माल देने की अपील की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन के संपर्क (आउटरीच) सत्र को संबोधित किया। उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के आमंत्रण पर डिजिटल माध्यम से इस सम्मेलन में शिरकत किया।

 

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