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गणेश मूर्ति का विसर्जन अंनत चतुर्दशी 1 सितंबर को

ganeshaहिंदू पंचांग के अनुसार 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव पर घर-घर स्थापित गणेश मूर्ति का विसर्जन अंनत चतुर्दशी की तिथि पर किया जाता है। इस बार अंनत चतुर्दशी 1 सितंबर को है। इस दिन लोगों के घरों और पंडालों में विराजित बप्पा की प्रतिमा को जल में विसर्जित किया जाता है। 10 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में विघ्नहर्ता भगवान गणेश की मूर्ति को गणेश चतुर्थी के दिन स्थापित करते हैं और अंनत चतुर्दशी पर विसर्जन करते हैं। लेकिन भक्त अपने-अपने हिसाब से 3, 5, 7 और 10 दिनों में भी गणेश विसर्जन करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है आखिरकार हर साल गणेश विसर्जन क्यों करते हैं और क्या अनंत चतुर्दशी की कथा….

विसर्जन क्यों
प्रत्येक वर्ष अंनत चतुर्दशी तिथि पर 10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव के बाद गणेशजी की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है। पुराणों के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने गणेश चतुर्थी के दिन से भगवान गणेश को महाभारत की कथा सुनाना आरंभ किया था। लगातार दस दिनों तक वेदव्यास आंखे बंद कर भगवान गणेश को कथा सुनाते रहे और गणेशजी उसे बिना आराम किए उसे लगातार लिखते रहे।दस दिनों के बाद जब महाभारत की कथा पूरी हुई तो वेदव्यास जी ने आंखे खोली तो देखा कि लगातार लिखते हुए गणेशजी के शरीर का तापमान काफी बढ़ गया था, तब गणेशजी के तापमान को कम करने के लिए वेदव्यास ने तालाब में गणेश जी को स्नान कराया। जिसके बाद उनके शरीर का तापमान सामान्य हुआ। जिस दिन उन्होंने गणेश जी को स्नान कराया गया था उस दिन अनंत चर्तुदशी थी इसलिए इस दिन को गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाने लगा।

गणपति विसर्जन का शुभ मुहुर्त
इस बार गणेश विसर्जन 1 सितंबर को है फिर इसके बाद भाद्रपद पूर्णिमा आरंभ हो जाएगी। गणेश विसर्जन 1 सितंबर को सुबह 9 बजकर 10 मिनट से शुरू होकर 1 बजकर 56 मिनट तक चलेगा। इसके बाद दोपहर को 3 बजकर 32 मिनट से शाम के 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। फिर शाम को दोबारा 8 बजकर 7 मिनट से रात के 9 बजक 32 मिनट तक का शुभ मुहूर्त रहेगा।

कोरोना काल में विसर्जन कैसे करें
कोरोना काल के चलते इस बार सामूहिक रूप से गणेश विसर्जन नदियों में नहीं किया जा सकेगा। ऐसे में आप घर पर ही गणेश जी का विसर्जन करें। उसके लिए एक गमले में पानी भरकर उसमें गणेश जी की प्रतिमा को विसर्जित करें और उसके बाद उसमें मिट्टी डालकर पौधा लगा दें, लेकिन उस गमले मे कभी तुलसी का पौधा न लगाएं क्योंकि तुलसी भगवान गणेशजी को नहीं चढ़ाई जाती है।

 

 

 

 

 

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