उधर, मीडिया संस्थाओं की तरफ से पेश वकीलों ने पीड़िता का नाम उजागर होने की चूक के लिए कानून के बारे में गलतफहमी को वजह बताया है. उन्होंने कहा कि चूंकि बलात्कार पीड़िता की मौत हो चुकी थी, इसलिए मीडिया संस्थानों ने समझा कि उसका नाम जाहिर किया जा सकता है. इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने यौन अपराध से जुड़े मामलों में पीड़ित की निजता और पहचान उजागर करने पर सजा के प्रावधान के बारे में लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया.

दिल्ली हाई कोर्ट ने समाचार माध्यमों में कठुआ बलात्कार और हत्या की शिकार बच्ची का नाम देखने के बाद स्वयं संज्ञान लेते हुए कदम उठाया था. मीडिया संस्थानों को 13 अप्रैल को जारी नोटिस में अदालत ने पूछा था कि इस उल्लंघन के लिए उन पर कोई कार्रवाई क्यों न की जाए. भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा-228ए यौन अपराध में पीड़ित की पहचान उजागर करने पर रोक लगाती है. अब इस मामले की सुनवाई 25 अप्रैल को होगी.