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जीएसटी ; पेनल्टी और सीए से परेशान छोटे कारोबारी

cloth-kNRH--621x414@LiveMintजीएसटी के रिटर्न देर से जमा होने पर शुरुआत में 200 रुपये प्रतिदिन तक जुर्माने का प्रावधान था। व्यापारिक संगठनों के दबाव के चलते सरकार ने इसे घटाकर कम दिया। अब मासिक रिटर्न में देरी पर 20 व 50 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लगाया जाता है। यह जुर्माना कारोबारियों के लिए बहुत बड़ी रकम नहीं है और इसे हर कारोबारी जमा भी करा सकता है, लेकिन ज्यादातर कारोबारी यह नहीं चाहते कि उनकी फर्म के नाम के साथ जुर्माना शब्द जुड़े। रेकॉर्ड खराब होने से बचने के लिए उन्होंने जीएसटी रिटर्न का अपने कामकाज का हिस्सा मान लिया है। लेकिन जीएसटी पैनाल्टी यर जुर्माने के कारण नए और छोटे कारोबारी अधिक परेशान हो रहा है।इस परेशानी के अलग अलग कारण है। किसी का काम शुरू नहीं हो पाया तो कोई कागजी कार्रवाई मेें उलझ कर रह गया।

सीए के कारण भी छोटे कारोबारी परेशान हैं। हालात यह है कि जीएसटी निल रिर्टन भरने के नाम पर भी सीए लॉबी ने छोटे कारोबारियों को अपनी कमाई का जरिया बना लिया। बीस लाख रूपए की सालाना टर्न ओवर वाले कारोबारियों को बैंक और सीए ने या सरकारी व गैर सरकारी विभागों के कारण जीएसटी के चक्र में फंस गए। ऐसे छोटे कारोबारी सरकार से राहत चाहते हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार और जीएसटी काउसिल छोटे कारोबारियों की हाजारों रूपए की पैनाल्टी को इस आगामी बजट में छूट देने का प्रावधान कर सकती है। अपने कारोबार में सुधार का अंतिम मौका दे सकती है।

एक बार लगी है पेनल्टी

कारोबारी समय पर रिटर्न भरें, इसलिए सरकार ने पेनल्टी का प्रावधान किया है। अब प्रतिदिन के हिसाब से 20 रुपये जुर्माना तय हुआ है। यह रकम बहुत अधिक नहीं है, लेकिन पेनल्टी लगने से फर्म का नाम खराब न हो, इसलिए अधिकतर कारोबारी समय पर रिटर्न भर रहे हैं। मेरी फर्म पर एक बार 20 रुपये का जुर्माना लगा। इसके बाद मैंने हमेशा समय पर रिटर्न दाखिल करना शुरू कर दिया। इसका मतलब यह नहीं कि 20 रुपये के जुर्माने ने डरा दिया, लेकिन मुझे अपनी फर्म को पेनल्टी शब्द से बचाना है। –  तिरपाल व्यवसायी

gst oneगलती नहीं, फिर भी जुर्माना

यह जरूरी नहीं है कि कारोबारी जानबूझकर जीएसटी का रिटर्न जमा कराने में देरी करते हैं। कई बार आखिरी दिन को रिटर्न जमा कराने के चक्कर में भी गड़बड़ हो जाती है। ऑनलाइन रिटर्न जमा करते समय या तो गलती से की-बोर्ड पर दूसरा बटन दब जाए या जीएसटी पोर्टल स्लो चल रहा हो तो भी रिटर्न जमा नहीं हो पाता है। इसके अलावा इंटरनेट की स्पीड कम होने से भी रिटर्न जमा करने में देरी हो सकती है। इसके बावजूद जुर्माना लग जाता है। रिटर्न में देरी पर लगने वाले जुर्माना और कम किया जाना चाहिए। — हरबंस, बैटरी डिस्ट्रीब्यूटर

छोटे कारोबारियों पर जुर्माना पड़ रहा भारी

हर महीने रिटर्न दाखिल करने से पहले कारोबारी के खाते अपडेट होने चाहिए। सभी बिलों की एंट्री होनी चाहिए, लेकिन व्यवहारिक तौर से ऐसा नहीं हो पाता। छोटे कारोबारियों को सबसे अधिक दिक्कत आ रही हैं। जिन लोगों का रिटर्न निल होता है, उन्हें भी हजारों रुपये जुर्माना भरना पड़ रहा है। सरकार को मंथली रिटर्न को बंद करना चाहिए। इसे तिमाही कर देना चाहिए। या फिर ऐसा प्रावधान हो कि रिटर्न पहले दाखिल हो जाए और टैक्स बाद में जमा हो। इसके अलावा टैक्स भुगतान को डिमांड ड्राफ्ट से जमा कराने का भी इंतजाम होना चाहिए। — सोमबीर, टैक्स एडवोकेट

 

 

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One Comment

  1. Chota veypari gst number lekar kaam kar rha hai yeh hi badi baat hai agar penalty ke chakar khtam honge to kam se kam pakke mai to kaam karega warna bagar gst number ke jo kaam kar rha hai wo desh ko kya de rha hai iesliye chote veypariyo ki penalty khtam karo unko agae badhao warna gst nu.ber band kardo

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