Pages Navigation Menu

Breaking News

 आत्मनिर्भर भारत के लिए 20 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की तारीख 30 नवंबर तक बढ़ी

कोरोना के साथ आर्थिक लड़ाई भी जीतनी है ; नितिन गडकरी

राज्यों में जीएसटी ट्रिब्यूनल बना ही नहीं, सुनवाई कहां हो

gstवस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के मामलों की सुनवाई के लिए राज्यों में जीएसटी ट्रिब्यूनल का गठन होना है। जीएसटी लागू हुए ढाई साल का वक्त बीत चुका है, लेकिन राज्य में ट्रिब्यूनल स्थापित नहीं हो पाई है। ऐसे में विभाग जो पेनाल्टी और जुर्माना लगा रहा है, उनकी अपील कहां हो यह साफ नहीं है। इससे कारोबारी परेशान हैं। उन्हें इन मामलों में हेल्पलाइन से भी कोई सहायता नहीं मिल पा रही है।  शुरुआती साल में जीएसटी को लेकर किसी तरह की सख्ती नहीं थी, ऐसे में राज्य में ट्रिब्यूनल की आवश्यकता भी महसूस नहीं की गई, लेकिन अब जुर्माना और पेनाल्टी लगने के साथ ही जीएसटी में फर्जीवाड़े के मामले सामने आ रहे हैं तो ट्रिब्यूनल की जरूरत भी महसूस होने लगी है। ऐसे में जिन कारोबारियों पर पेनाल्टी लग रही है, उनके पास विभागीय अपील के अलावा ट्रिब्यूनल में जाने का कोई विकल्प ही नहीं है। राज्य में जल्द से जल्द ट्रिब्यूनल की मांग भी जो पकड़ने लगी है। देवभूमि टैक्स बार एसोसिएशन देहरादून के साथ ही राज्य के हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर जिलों की टैक्स बार एसोसिएशनें भी ट्रिब्यूनल गठन की मांग कई बार सरकार के सामने उठा चुके हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।

हेल्पलाइन से नहीं मिलती सहायता
टैक्स अधिवक्ता सुमित ग्रोवर कहते हैं कि जीएसटी नेटवर्क का हेल्पलाइन का सिस्टम केंद्रीयकृत है। ऐसे में अगर किसी तरह की कोई पूछताछ करनी होती है तो सीमित जवाब मिलते हैं। ट्रिब्यूनल समेत बाकी मामलों को नीतिगत बता दिया जाता है। राज्य सरकार के अधिकारी इस तरह के मामलों में केंद्र की गाइडलाइन का हवाला देते हैं। अगर ट्रोल फ्री नंबर, मोबाइल और ट्विटर के जरिए रिटर्न फाइल करने के ओटीपी न मिलने जैसी शिकायतें की जाती हैं तो इनका संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। सिर्फ यही कहा जाता है कि आप फिर से ट्राई करें, या आपका प्रकरण को हल किया जा रहा है। लेकिन ऐसा होता नहीं है और कई बार रिटर्न की अंतिम तिथि सिर्फ हल जानने में ही निकल जाती है।

एक ही जानकारी बार-बार क्यों
टैक्स एक्सपर्ट नितिन सोनी कहते हैं कि वार्षिक रिटर्न दाखिल करते वक्त कारोबारियों से वही जानकारी मांगी जा रही है, जो जीएसटीआर-1, 2ए और 3बी की रिटर्न में दे चुके हैं। जुलाई 2017 से कारोबारियों की फाइल की गई रिटर्न में सुधार का कोई मौका नहीं दिया जा रहा है, इसकी सुविधा दी जानी चाहिए।

माल सप्लाई के मामले अटके
इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता कहते हैं कि रिटर्न दाखिल करने में देरी या गड़बड़ी पर अब पेनाल्टी लग रही है, लेकिन सामान ढुलाई के दौरान रास्ते में जो चालान किए जा रहे हैं, उन मामलों में ट्रिब्यूनल नहीं होने से दिक्कतें आ रही हैं। अगर ऐसा कोई वाहन या सामान जब्त किया जा रहा है और विभागीय अपील में उन्हें राहत नहीं मिल रही है तो ट्रिब्यूनल जाने का विकल्प राज्य में अभी है नहीं।

Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *