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पंजाब-हरियाणा के मुकाबले गुजरात के किसान गरीब

farmers_660_082212030135अहमदाबाद केंद्र सरकार के कृषि सांख्यिकी 2016 के आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में प्रति किसान मासिक आय मात्र 7,926 रुपए है। जो कि पंजाब के किसानों की मासिक आय (18,049 रुपए) की 40 फीसदी या हरियाणा के किसानों की मासिक आय की 54 फीसदी है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गुजरात के किसानों की दैनिक आय 264 रुपए है। यह राशि अकुशल कृषि मजदूर की निर्धारित राष्ट्रीय दैनिक मजदूरी (341रुपए) से करीब 77 रुपए कम है, वहीं खेतिहर मजदूरों की दैनिक मजदूरी 178 रुपए है। रिपोर्ट में पेश आंकड़े प्रशासन और सरकार के लिए भी काफी चिंताजनक हैं।

केंद्र के कृषि आंकड़ों के अनुसार गुजरात में 39.30 लाख किसान परिवारों की वार्षिक आय 1 लाख से भी कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त सिंचाई की कमी के अलावा, अनगिनत ऐसी समस्याएं हैं जो किसानों की कम आय का कारण हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों से गुजरात के किसान नकदी फसलों की ही खेती करते आए हैं, जिसमें उन्हें बाजार में अच्छी कीमत मिलती थी। ये भी एक वजह हो सकती है।दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य के करीब 85 फीसदी किसान लघु और सीमांत किसान हैं जिनके पास 2 हेक्टेयर से भी कम जमीन है। इस वजह से उनकी आय कम रह गई है। कृषि अर्थशास्त्र के प्रफेसर आरएल सियानी कहते हैं कि यह हमारे राज्य के किसानों की औसत आय है, जिसमें करीब 15 फीसदी मध्य और बड़े किसान भी शामिल हैं लेकिन फिर भी किसानों के पास घोषित आय 7900 रुपए का आधा हिस्सा भी नहीं आता है। मेरे ख्याल से विशेषज्ञों को एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखना चाहिए कि वे किसानों की आय बढ़ाने का निर्णय तो ले लेते हैं, लेकिन किसानों को पर्याप्त आय भी नहीं मिल पाती है।भावनगर के किसान नेता घनश्याम पटेल कहते हैं कि सिंचाई जैसी सुविधाओं की कमी के चलते किसानों की आय पर असर आ रहा है। वह आगे कहते हैं कि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता भी कम हो रही है। कई ऐसे किसान हैं जिन्हें उनके उत्पादों के उचित दाम भी नहीं मिलते और वह विरोध में अपनी उगाई फसलों को सड़कों पर फेंक देते हैं।

मौसम आधारित फसलों की खेती करें किसान
उंझा कृषि उत्पाद बाजार के चेयरमैन गौरंग पटेल बताते हैं कि गुजराती किसान पिछले वर्षों में ज्यादा लागत देने वाली फसलों की ही खेती करते आए हैं लेकिन अब उन्हें परंपरा में बदलाव करने की जरूरत है। उन्हें मौसम आधारित और मिट्टी की स्थिति को देखते हुए अलग-अलग फसलों की खेती करनी चाहिए। अमृतवेल गांव के किसान विपुल बोवालिया कहते हैं, मेरे पास तीन हेक्टेयर जमीन है। मेरी वार्षिक आय एक लाख के करीब है जिसमें मुझे फसल नुकसान को भी वहन करना पड़ता है। मेरे गांव में ऐसे कई घर हैं जिनकी वार्षिक आय 60,000 से भी कम है।

वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर पाया मुनाफा
वहीं महीसागर के किसान झावेर पटेल बताते हैं कि मेरे पास 4.5 हेक्टेयर जमीन है और मैं उसमें कपास और अरंडी की खेती करता हूं। मैं खेती के लिए वैज्ञानिक तरीकों जैसे ड्रिप सिंचाई के साथ फसलचक्र बदलने का इस्तेमाल करता हूं। यहां तक कि किसी फसल की खेती से पहले मैं मिट्टी की जांच भी करता हूं। इस वजह से मुझे दूसरे किसानों से 30 फीसदी अधिक मुनाफा होता है। मेरी वार्षिक आय तीन लाख के करीब है।

किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराना होगा
पिछली कई सरकारें किसानों को प्राथमिकता देने की बात करती आई हैं लेकिन फिर भी किसानों की आय औसत राष्ट्रीय वेतन से भी कम है। वर्तमान सरकार का लक्ष्य किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने का है, ऐसे में पूरे प्रशासनिक मशीनरी को किसानों के पास जाकर उन्हें सरकारी स्कीमों का लाभ सुनिश्चित कराने का समय आ गया है और यह भी देखना चाहिए कि प्रत्येक किसानों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इससे किसानों की आय के साथ कृषि सेक्टर में भी सुधार होगा।

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