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पाकिस्तान में हिंदुओं पर सबसे ज्यादा जुल्म;UN रिपोर्ट में खुलासा

AP12_2_2012_000132Bभारत में जहां नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन का सिलसिला जारी है और इसमें अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया जा रहा है वहीं पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है वो हैरान करने वाला है.यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में हिंदू समेत सभी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की बेहद बुरी हालत है और उन्हें प्रताड़ित करने के मामले में लगातार इजाफा हो रहा है.पाकिस्तान में महिलाओं की स्थिति को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ के सीएसडब्ल्यू रिपोर्ट में पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर 47 पन्नों में जिक्र किया गया है. इसमें बताया गया है कि वहां की मौजूदा इमरान खान सरकार अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा की जगह कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा दे pak hinduरही है. यूनाइटेड नेशंस से जारी हुई इस रिपोर्ट में पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक वर्ग के भावी अस्तित्व पर खतरा और बढ़ गया है। ख़ास तौर पर हिन्दू और ईसाई नागरिकों पर पाकिस्तानी कटटरपंथियों के हमले बढ़ गए हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में सबसे ज्यादा हिंदू और ईसाई समुदाय को प्रताड़ित किया जाता है. इन दोनों अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को वहां लोग निशाना बनाते हैं. इतना ही नहीं इन दोनों समुदायों की महिलाओं को अगवा कर उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाता है और इन्हें मुस्लिम पुरुषों से शादी करने के लिए बाध्य किया जाता है. रिपोर्ट में बच्चों से भी बात करने का हवाला दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, pakistan-hindus-in-new-delhiपाकिस्तान में बातचीत के दौरान बच्चों ने स्वीकार किया कि अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को भी वहां शिक्षकों और सहपाठियों द्वारा अपमानित किया जाता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन कानूनों को कट्टरपंथी इस्लामी संगठन सिर्फ अल्पसंख्यकों को मारने के लिए ही नहीं, बल्कि राजनीति में जगह बनाने के लिए भी हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट में पाकिस्तान की पुलिस और न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि अगवा की गई महिलाओं की परेशानी इसलिए और बढ़ जाती है, क्योंकि पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। पुलिस और न्याय व्यवस्था अल्पसंख्यक पीड़ितों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाते हैं। ऐसे मामलों में न्यायिक व्यवस्था भी काफी कमजोर रहती है।

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