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मुस्लिम आबादी वाले देश में हिंदू धर्म का बोलबाला …..

DB790CD2-D98A-7BA6-A75957AE0456801C_programcarouselsप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच दिन के इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर दौरे पर हैं. पीएम मोदी सबसे पहले इंडोनेशिया पहुंचे हैं और यहां राष्ट्रपति जोको विडोडो से मुलाकात करेंगे. पीएम मोदी के इस दौरे से दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है.सबसे खास बात यह है कि इंडोनेशिया और भारत सांस्कृतिक रूप से एक-दूसरे के बेहद करीब हैं. यहां पहुंचकर शायद आपको एक बार गलतफहमी हो जाए कि कहीं आप भारत में तो नहीं आ गए.इंडोनेशिया ganeshदुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र भी. इंडोनेशिया और भारत में काफी सांस्कृतिक समानताएं हैं.

मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच हजारों द्वीपों पर फैले इंडोनेशिया में मुसलमानों की सबसे ज्‍यादा आबादी बसती है, पर यहां हिंदू धर्म का स्पष्ट तौर पर प्रभाव नजर आता है. रामायण और रामायण मंचन यहां की संस्कृति का अहम हिस्सा है. एक मुस्लिम बहुल देश की संस्कृति में रामायण-महाभारत का अस्तित्व भले ही हैरान करता हो, लेकिन इंडोनेशिया हिंदू धर्म के साथ जुड़ी अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ बहुत सहज है.इंडोनेशिया में हिंदू देवी-देवताओं की खूब पूजा होती है. वहां भगवान गणेश को कला और बुद्धि का भगवान माना जाता है. यहां लोग बजरंगबली की भी पूजा करते हैं. लोग उन्‍हें अपने रक्षक के तौर पर देखते हैं.पूरे इंडोनेशिया में रामायण और महाभारत की कहानी हर कोई जानता है. वहां के जकार्ता स्क्वेर में कृष्णा-अर्जुन की मूर्तियां भी  स्थापित हैं.किसी दूसरे मुसलमान की तरह जावा के निवासी 30 वर्षीय अली नूर सोत्या रमजान में रोजा रखते हैं. इफ्तार के बाद वह 10वीं शताब्दी के बने हिंदू मंदिर में रामायण मंचन में भाग लेने के लिए जाते हैं.

ramayanसोत्या भारतीय महाकाव्य मंचन में 100 नृतकों के समूह का हिस्सा हैं. रामायण मंचन में सीता के पिता जनक की भूमिका निभाने वाले सोत्या कहते हैं, ‘हम केवल मुस्लिम नहीं हैं. हम जावा के लोग हैं, हम यहां हिंदू और बौद्ध धर्म को भी सीखते- समझते हैं.’जावा इंडोनेशिया का एक प्रमुख द्वीप है जहां लगभग 60 प्रतिशत आबादी बसती है. 13वीं से 15वीं शताब्दी के बीच यहां माजापाहित नाम का हिंदू साम्राज्य खूब फला फूला जिससे यहां की संस्कृति, भाषा और भूमि पर हिंदू संस्कृति की अमिट छाप पड़ गई.यहां आपको जगह-जगह पर भगवान विष्णु और शिव के मंदिर मिल जाएंगे. पूरे शहर में संस्कृत में लिखे हुए शब्द, रामायण और महाभारत का जिक्र खूब मिलता है. जबकि वर्तमान में इंडोनेशिया में हिंदुओं की आबादी 2 फीसदी से भी कम है.रामायण मंचन में सुग्रीव की भूमिका निभाने वाले दमर कसयीयादी कहते हैं, ‘जावा का इस्लाम बहुत मिश्रित है, यहां के मुस्लिम हिंदू धर्म से प्रभावित मुस्लिम हैं.’कहा जाता है कि एक बार इंडोनेशिया के प्रथम राष्ट्रपति सुकर्णो के कार्यकाल में जब एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल वहां पहुंचा था तो उन्‍होंने वहां रामलीला देखी. इस्‍लामिक देश में रामलीला के मंचन से पाकिस्तानी हैरान थे.

उन्‍होंने सुकर्णो के सामने भी अपनी हैरानी जाहिर की और उनसे इसका कारण पूछा. तब उन्‍होंने बेहद सहजता के साथ कहा था, ‘इस्लाम हमारा धर्म है तो रामायण हमारी संस्कृति.’केवल धर्म ही नहीं, बल्कि यहां की भाषा भी हमारी भाषा से मिलती जुलती है. उनकी भाषा को ‘बहासा इंदोनेसिया’ कहते हैं. उदाहरण के तौर पर उनके शब्दकोष में भी स्त्री और मंत्री जैसे शब्द मिलते हैं.यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि इंडोनेशिया में हिंदू धर्म कैसे पहुंचा लेकिन 5वीं शताब्दी तक यहां पर हिंदू धर्म स्थापित हो चुका था. जैसे-जैसे हिंदू साम्राज्य का प्रभाव बढ़ने लगा, 12वीं-13वीं शताब्दी तक हिंदू और बौद्ध शासकों ने कई द्वीपों पर अपना अधिकार कर लिया.इसी बीच, इस्लाम भी व्यापार के जरिए धीरे-धीरे यहां पहुंच रहा था और अपनी सल्तनतों के प्रभुत्व से 15वीं शताब्दी तक कुछ हद तक अपनी पकड़ मजबूत बना चुका था.यहां पर इस्लाम भी भारत के पूर्वी तट से होता हुआ पहुंचा है.

यही कारण है कि इंडोनेशिया और दक्षिण एशिया, खासकर भारत के इस्लाम में कुछ समय पहले तक समानता रही है.यहां हिंदू-मुस्लिम के बीच सौहार्द कायम है. जब जुलाई 2010 में बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी वर्ल्ड सिंधी कॉन्फ्रेंस के लिए जकार्ता गए थे तो वहां हिंदुओं-मुस्लिमों के आपसी सम्मान और प्रेम को देखकर हैरान हो गए थे.इंडोनेशिया आधिकारिक तौर पर 6 धर्मों को मानता है जिसमें हिंदू धर्म को 1962 में जगह मिली. जावा, बाली और लोमबोक में हिंदू धर्म के काफी अनुयायी हैं. हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था परिषद हिंदू धर्म इंडोनेशिया 1964 से ही अस्तित्व में है.इंडोनेशिया में हिंदू धर्म के प्रभाव के साथ-साथ बौद्ध का भी प्रभाव रहा है. इस बात को इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि बोरोबोदूर में संसार का सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप है.

जावा में कई हिंदू और बौद्ध मंदिर हैं. योग्याकार्ता में कठपुतली बनाने का काम करने वाले वायुदि सहस्त्रदिनामा जावा को ‘सहिष्णुता का शहर’ कहते हैं. दूसरे लोगों की तरह वह भी रोजा रखते हैं और कठपुतलियां बनाते हैं. वह कहते हैं कि मेरे लिए धर्म और संस्कृति अलग-अलग चीजें हैं. उनके कामकाज की जगह पर राम, सीता और घटोत्कच की कृतियां भी हैं जिन्हें भैंस की खाल से बनाया गया है.वह कहते हैं कि यह गाय की खाल से नहीं बनाया गया है क्योंकि हम हिंदुओं का सम्मान करते हैं और उनके लिए यह पवित्र पशु है.

 

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