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पेगासस फोन हैकिंग रिपोर्ट – आप क्रोनोलॉजी समझिए !

amitshaनई दिल्ली. संसद का मानसून सत्र शुरू होते ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह  ने पेगासस फोन हैकिंग रिपोर्ट के सामने आने पर संदेह जताया है. शाह ने कहा कि इसके लीक होने के पीछे किसी बड़ी साजिश का इशारा है. अमित शाह ने कहा, कुछ लोग देश के लोकतंत्र को बदनाम करना चाहते हैं. उनका मकसद भारत की विकास यात्रा को पटरी से उतारना है. लेकिन, इन ताकतों के मंसूबों को सरकार सफल नहीं होने देगी. मानसून सत्र देश में विकास के नए पैमाने स्‍थापित करेगा. शाह ने कहा, ‘देश के लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए मानसून सत्र से ठीक पहले कल देर शाम एक रिपोर्ट आती है, जिसे कुछ वर्गों द्वारा केवल एक ही उद्देश्य के साथ फैलाया कि कैसे भारत की विकास यात्रा को पटरी से उतारा जाए और अपने पुराने नैरेटिव के तहत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को अपमानित किया जाए. लोगों को क्रोनोलोजी समझनी चाहिए कि यह भारत के विकास में विघ्न डालने वालों की भारत के विकास के अवरोधकों के लिए एक रिपोर्ट है.’

कांग्रेस खो चुकी है राजनीतिक महत्व
सत्र के पहले ही दिन सदन में कांग्रेस के हंगामे पर शाह ने कहा कि वह अपना जनाधार व राजनीतिक महत्व खो चुकी है. साथ ही कहा कि कांग्रेस के पास लोकतंत्र को कुचलने का अच्छा अनुभव है. शाह ने कहा कि वह देशभर के लोगों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है, वह है ‘राष्ट्रीय कल्याण’ और सरकार इसे हासिल करने के लिए काम करती रहेगी चाहे कुछ भी हो जाए.

क्या है पेगासस मामला?
समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन ने खुलासा किया है कि केवल सरकारी एजेंसियों को ही बेचे जाने वाले इजराइल के खुफिया जासूसी साफ्टवेयर पेगासस के जरिए भारत के दो केंद्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्ष के तीन नेताओं और एक मौजूदा न्यायाधीश सहित बड़ी संख्या में कारोबारियों और अधिकार कार्यकर्ताओं के 300 से अधिक मोबाइल नंबर हो सकता है कि हैक किए गए हों.शाह ने कहा कि जो लोग भारत को प्रगति पथ से उतारने की मंशा रखते हैं, वे देश के बारे में वही पुरानी बातें दोहरा रहे हैं. कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे को उछालना अप्रत्याशित नहीं है.

कांग्रेस का आरोप
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्रकारों से कहा, ‘इस मामले की जांच होने से पहले अमित शाह को इस्तीफा देना चाहिए और मोदी जी की जांच होनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस 19 जुलाई से शुरू हुए संसद के मॉनसून सत्र में पेगासस के मुद्दे को पुरजोर ढंग से उठाएगी।’कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘राहुल गांधी और अपने मंत्रियों की जासूसी की गई है। हमारे सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों की भी जासूसी गई है। पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और कई मीडिया समूहों की भी जासूसी कराई गई। क्या किसी सरकार ने इस तरह का कुकृत्य किया होगा? भाजपा अब ‘भारतीय जासूस पार्टी’ बन गई है।’सुरजेवाला ने सवाल किया, ‘मोदी जी, आप राहुल गांधी जी की फोन की जासूसी करवाकर कौन से आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे थे? आप मीडिया समूहों और चुनाव आयुक्त की जासूसी करवाकर किस आतंकवादी से लड़ रहे थे। अपने खुद के कैबिनेट मंत्रियों की जासूसी करवाकर कौन से आतंकवाद से लड़ रहे थे?’ कांग्रेस नेता ने यह दावा भी किया कि राहुल गांधी के कार्यालय के कई लोगों की भी जासूसी कराई गई।सुरजेवाला ने यह आरोप भी लगाया कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को लोकसभा में जो बयान दिया वह झूठ था। उन्होंने कहा, ‘मंत्री जी, आप राज्यसभा में कांग्रेस के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर पुराने आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद का जवाब पढ़ लेते तो इतना झूठ नहीं बोलते। उस वक्त के मंत्री ने कहा था कि नवंबर, 2019 में इजरायली कंपनी एनएसओ को नोटिस दिया गया।’

भाजपा आरोपों को खारिज करती है। 

उधर, बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला संसद के मॉनसून सत्र से पहले ही यह मामला जानबूझकर उठाया गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘क्या कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से लगे हुए थे कि यह मामला मॉनसून सत्र से पहले ही शुरू करना है, ताकि देश में एक नया माहौल बनाया जाए।’ प्रसाद ने आगे कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए कांग्रेस ने कोई सबूत नहीं पेश किया है। उन्होंने लिखा, ‘कांग्रेस पार्टी ने भाजपा पर ऐसे स्तरहीन आरोप लगाए हैं जो राजनीतिक शिष्टाचार से परे हैं। भाजपा कांग्रेस द्वारा लगाए गए पेगासस मामले के सारे आरोपों को खारिज करती है। कांग्रेस ने अब तक पेगासस मामले में कोई सबूत पेश नहीं किए हैं।’

 सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिये भारतीयों की जासूसी करने संबंधी खबरों को सोमवार को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि संसद के मॉनसून सत्र से ठीक पहले लगाये गए ये आरोप भारतीय लोकतंत्र की छवि को धूमिल करने का प्रयास हैं। लोकसभा में स्वत: संज्ञान के आधार पर दिये गए अपने बयान में वैष्णव ने कहा कि जब देश में नियंत्रण एवं निगरानी की व्यवस्था पहले से है तब अनधिकृत व्यक्ति द्वारा अवैध तरीके से निगरानी संभव नहीं है।
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