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हांगकांग में चीन के खिलाफ सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारी

hongkongप्रत्यर्पण विधेयक को लेकर हांगकांग में पिछले साल जून में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने एक बार फिर से जोर पकड़ लिया है. चीन की ओर से लाए जा रहे नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के कारण कोरोना महामारी को लेकर जारी पाबंदियों के बीच हांगकांग में फिर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. चीन के नए कानून के विरोध में रविवार को हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान हांगकांग पुलिस ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े.

हांगकांग को आजाद करो, लगे नारे

रविवार दोपहर को काले कपड़े पहने हुए प्रदर्शनकारी मशहूर शॉपिंग डिस्ट्रिक्ट कॉजवे बे में जमा हुए और प्रस्तावित कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे. प्रदर्शनकारियों ने ‘हांगकांग के साथ एकजुट’, ‘हांगकांग को आजाद करो’ और ‘हमारे दौर की क्रांति’ जैसे नारे लगाए. प्रदर्शन के दौरान प्रतिष्ठित कार्यकर्ता टैम टैक-ची को गिरफ्तार कर लिया गया.

फिर क्यों शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन

दरअसल, चीन लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारियों से निपटने के लिए हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की स्थापना करने की तैयारी कर रहा है. सरकारी मीडिया के अनुसार चीन विवादास्पद सुरक्षा कानून का समर्थन करने के वास्ते राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की स्थापना करने की तैयारी में है.चीन ने हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विवादित विधेयक का मसौदा शुक्रवार को अपनी संसद में पेश किया था. इसका उद्देश्य पूर्व में ब्रिटेन के उपनिवेश रहे हांगकांग पर नियंत्रण को और मजबूत करना है.यहां संसद के एक सप्ताह तक चले सत्र के दौरान नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से लाए गए नए मसौदा विधेयक का उद्देश्य हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (एचकेएसएआर) के लिए कानूनी प्रणाली और प्रवर्तन तंत्र को स्थापित करना और उसमें सुधार करना है.इस विधेयक को 28 मई को पारित किया जा सकता है.सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि चीनी सरकार सूचना संकलन को बढ़ाने और राजद्रोह, अलगाव, देशद्रोह और तोड़फोड़ की गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को स्थापित करने की तैयारी कर रही है.चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (सीपीपीसीसी) की राष्ट्रीय समिति के सदस्य और हांगकांग के सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसीटर केनेडी वोंग यिंग-हो ने कहा कि जहां तक मुझे पता है, कानून तैयार है, जिसे एनपीसी की स्थायी समिति की अगली बैठक में पारित किया जाएगा.वोंग ने कहा कि 28 मई को हांगकांग राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के प्रारूप पर सांसदों के वोट करने के बाद एनपीसी की स्थायी समिति विधेयक को कानून में बदलने के लिए अंतरिम बैठकें आयोजित कर सकती है.वहीं, हांगकांग में लोकतंत्र की मांग को दबाने की चीन की साजिश के विरोध में अमेरिका के बाद अब दुनिया के प्रमुख देश खड़े हो गए हैं. ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने संयुक्त बयान जारी कर चीन की हरकत पर चिंता जताई है और कानून संशोधन की प्रक्रिया तत्काल रोकने को कहा है.संयुक्त बयान में प्रस्तावित कानून को एक राष्ट्र-दो व्यवस्था के सिद्धांत का उल्लंघन बताया है. इसी सिद्धांत पर समझौते के बाद 1997 में ब्रिटेन ने 150 साल के शासन उपरांत हांगकांग को चीन को सौंपा था.

पिछले साल जून से जारी विरोध

बता दें कि हांगकांग में पिछले साल जून से ही विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला चल रहा है. पिछले साल जून में चीन द्वारा लाए गए प्रत्यर्पण विधेयक के विरोध में हांगकांग में बड़े पैमाने पर विरोध शुरू हुए थे जो बाद में हिंसक भी हो गए थे. प्रत्यर्पण विधेयक को वापस लेने के बाद भी इन प्रदर्शनों का सिलसिला नहीं रुका और अब तक सात हजार से अधिक प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए जा चुके हैं.

ब्रिटिश उपनिवेश रहा हांगकांग

हांगकांग ब्रिटिश उपनिवेश रहा है. साल 1997 में इसे एक देश दो सरकार सिद्धांत के तहत चीन को सौंप दिया गया था. इस सिद्धांत के तहत हांगकांग को एक तरह की स्वायत्तता मिली हुई है.हांगकांग का शासन 1200 सदस्यों की चुनाव समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा चलाया जाता है.

हांगकांग पर ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया साथ आए, चीन को हरकत से बाज आने को कहा

हांगकांग में लोकतंत्र की मांग को दबाने की चीन की साजिश के विरोध में अमेरिका के बाद अब दुनिया के प्रमुख देश खड़े हो गए हैं। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने संयुक्त बयान जारी कर चीन की हरकत पर चिंता जताई है और कानून संशोधन की प्रक्रिया तत्काल रोकने को कहा है। संयुक्त बयान में प्रस्तावित कानून को एक राष्ट्र दो व्यवस्था के सिद्धांत का उल्लंघन बताया है। इसी सिद्धांत पर समझौते के बाद 1997 में ब्रिटेन ने 150 साल के शासन उपरांत हांगकांग को चीन को सौंपा था।

चीन के कदम को धोखा बताया

हांगकांग के आखिरी गवर्नर रहे क्रिस पैटन ने चीन के ताजा कदम को हांगकांग के साथ धोखा बताया है। उन्होंने पश्चिमी देशों से मांग की है कि वे चीन की साजिश के खिलाफ खड़े हों और उसे रोकें। चीन में सरकार ने संसद में हांगकांग को राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के दायरे में लाने के लिए कानून में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है।

चीन की साजिश

हांगकांग में यह कानून लागू होने के बाद वहां पर चीन के खिलाफ कुछ भी बोलना अपराध की श्रेणी में आ जाएगा और उसके लिए कड़े दंड का प्रावधान होगा। इसी प्रकार से हांगकांग में विदेशी गतिविधियां भी सीमित हो जाएंगी। जानकारों का मानना है कि इससे वहां की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होगी। हांगकांग को सशर्त हस्तांतरण के समय से ही कई तरह की स्वतंत्र गतिविधियों के अधिकार प्राप्त हैं, जो चीन की मुख्य भूमि के लोगों को नहीं हैं।

चीन को रोके ब्रिटेन

हांगकांग में लागू होने वाला कानून वहां की ऐसी सभी गतिविधियों को रोक देगा। ब्रिटेन में रह रहे पैटन (76) ने कहा कि ब्रिटेन की नैतिक, आर्थिक और न्यायिक जिम्मेदारी है कि वह हांगकांग के पक्ष में खड़ा हो और चीन को रोके। क्योंकि सन 1984 में हुए समझौते में तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री झाओ जियांग ने हांगकांग की स्वायत्तता बरकरार रखने की गारंटी दी थी।

अमेरिका पहले से है नाराज

पैटन ने 5जी मसले पर चीनी कंपनी हुवावे के साथ हुआ समझौता तोड़ने की ब्रिटेन को सलाह दी है। चीन के कदम पर अमेरिका सबसे पहले विरोध जता चुका है। विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने इसे हांगकांग की स्वायत्तता की हत्या के लिए गाड़ी जाने वाली कील कहा है। जबकि राष्ट्रपति ट्रंप चीन के खिलाफ बहुत कड़े कदम की चेतावनी दे चुके हैं।चीन ने सफाई दी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू होने से हांगकांग में विदेशी निवेशकों की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। विदेश मंत्रालय के हांगकांग कार्यालय की ओर से जारी बयान में चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने वाले देशों की निंदा भी की गई है।

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