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यूरोपीय संसद में पाकिस्तान के खिलाफ प्रस्ताव पेश

imran unयूरोपीय यूनियन की संसद (EU Parliament) ने शुक्रवार को पाकिस्तान के खिलाफ एक अहम प्रस्ताव पास कर दिया। प्रस्ताव में कहा गया है- पाकिस्तान में कट्टरपंथी बेहद हावी हैं। वहां अल्पसंख्यकों के खिलाफ मनमाने ढंग से ईशनिंदा कानून का इस्तेमाल हो रहा है। लिहाजा, पाकिस्तान को दिया गया विशेष व्यापारिक दर्जा (GSP+ status) तुरंत प्रभाव से खत्म किया जाए।यह प्रस्ताव कितना मजबूत है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके पक्ष में 681 जबकि विरोध में सिर्फ 6 वोट पड़े। प्रस्ताव में कहा गया है- इमरान खान अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा करने के बजाए होलोकास्ट का जिक्र करके लोगों को और भड़का रहे है यूरोपीय यूनियन में शामिल 27 देश ट्रेड में विकासशील देशों को GSP+ status दे सकते हैं। इसमें छोटे विकासशील देशों को शामिल किया जाता है। इसके तहत कारोबार में उन्हें दूसरे मुल्कों की तुलना में ज्यादा सहूलियत और इन्सेनटिव्स यानी फायदे मिलते हैं। पाकिस्तान 2014 से इसका फायदा उठा रहा था। इस प्रस्ताव में पाकिस्तानी सरकार से कहा गया है कि वो ईश-निंदा क़ानून की दफ़ा 295 बी और सी को ख़त्म कर दें. प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान में ईश-निंदा क़ानून के तहत दर्ज किए गए मुक़दमों की सुनवाई एंटी-टेरर कोर्ट में ना की जाए.प्रस्ताव में कहा गया है- इमरान खान अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा करने के बजाए होलोकास्ट का जिक्र करके लोगों को और भड़का रहे हैं. ये प्रस्ताव ईयू में पास हो सकता है, क्योंकि बहुत सारे देश प्रस्ताव के समर्थन और पाकिस्तान के विरोध में हैं.पाकिस्तान में पिछले दिनों फ्रांस के विरोध में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान हिंसक विरोध प्रदर्शन कर रहा है. यह संगठन इमरान सरकार से फ्रांस के राजदूत को देश से निकालने की मांग कर रहा था. सरकार ने इस कट्टरपंथी संगठन को बैन किया, लेकिन अगले ही दिन संगठन के साथ बातचीत शुरू कर दी. इतना ही नहीं, संसद में राजदूत को निकालने के प्रस्ताव पर बहस का प्रस्ताव भी पेश कर दिया. इसके बाद ही यूरोपीय यूनियन ने ये कदम उठाया है.

यह दर्जा क्यों छिनेगा?
इसकी बिल्कुल ताजी वजह तो पाकिस्तान में पिछले दिनों फ्रांस के विरोध में हुआ तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP)का हिंसक विरोध प्रदर्शन है। यह संगठन इमरान सरकार से फ्रांस के राजदूत को देश से निकालने की मांग कर रहा था। हिंसा में पुलिस, रेंजर्स और आम लोगों को मिलाकर कुल 22 लोग मारे गए थे। सरकार ने इस कट्टरपंथी संगठन को बैन किया। अगले ही दिन इनसे बातचीत शुरू कर दी। इतना ही नहीं, संसद में राजदूत को निकालने के प्रस्ताव पर बहस का प्रस्ताव भी पेश कर दिया।

मजबूर हैं इमरान खान
इमरान खान खुद को मुस्लिम देशों के सबसे बड़े नेता के तौर पर पेश कर रहे हैं। हाल ही में ‘अलजजीरा’ के एक सर्वे में कट्टरपंथी मुस्लिमों ने उन्हें मुस्लिमों का सबसे लोकप्रिय चेहरा माना। फ्रांस में पैगम्बर साहब के अपमान के मामले को भी उन्होंने सबसे ज्यादा उछाला। अब उनकी सरकार को यह बेहद भारी पड़ने वाला है। यूरोपीय यूनियन ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि वो फ्रांस के साथ खड़े हैं।‘जियो न्यूज’ के ब्रसेल्स ब्यूरो चीफ खालिद हमीद फारूखी ने कहा- अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है तो पाकिस्तान से विशेष दर्जा चंद दिनों छिन जाएगा। इसके नतीजे हमारे मुल्क पर कितने गंभीर होंगे, इसका अंदाजा अभी किसी को नहीं है। पहले से ही बदहाल अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो सकती है।

आगे क्या होगा?
ये तय है कि यूरोपीय संसद कुछ दिनों में इस प्रस्ताव को पास कर देगी। इसके पहले वो विदेश मामलों की पाकिस्तान पर रिपोर्ट को देखेगी। फिर इस पर बहस होगी और फिर वोटिंग। अब चूंकि प्रस्ताव के पक्ष में 681 और विरोध में महज 6 वोट पड़े हैं तो ये तय माना जा सकता है कि पाकिस्तान को यह स्टेटस खोना पड़ेगा। ऐसा हुआ तो पाकिस्तान का जो थोड़ा-बहुत एक्सपोर्ट (यूरोप को सबसे ज्यादा) है, वो भी बंद हो जाएगा। वो पहले ही FATF की ग्रे लिस्ट में है। देश में महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ रोज प्रदर्शन हो रहे हैं। कोरोना वैक्सीन नहीं है और मामले बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान को इस दलदल से कोई चमत्कार ही निकाल पाएगा।

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