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भारत और इजरायल दोस्ती

modi isrealभारत और इजरायल ने दोस्ती के रास्ते पर एक और मजबूत कदम आगे बढ़ाया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच परस्पर सहयोग के नौ करारों पर हस्ताक्षर हुए जिनमें साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, हवाई यातायात से लेकर होम्योपैथिक उपचार और अक्षय ऊर्जा के भंडारण के क्षेत्र में सहयोग के समझौते शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच वार्ता के बाद हुए संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में नरेंद्र मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने आपसी संबंधों में प्रगति की समीक्षा की है और उन्होंने नए अवसरों के सहारे आगे बढ़ाने का निश्चय किया है। इससे पहले मोदी प्रोटोकॉल तोड़कर नेतन्याहू का स्वागत करने पहुंचे थे। दोनों नेताओं में इस मुलाकात के दौरान भी वही गर्मजोशी दिखाई दी जो पिछले साल जुलाई में मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान दिखाई पड़ी थी। साफ है कि दोनों देश एक-दूसरे की मित्रता को विशेष महत्व देते हैं। हालांकि बीच में दो ऐसी घटनाएं घटी थीं जिससे यह अंदेशा हुआ कि कहीं दोनों देशों के संबंध में ठंडापन न आ जाए। पहली घटना थी अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के यरूशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के फैसले के खिलाफ भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र में मतदान और दूसरी, नेतन्याहू की यात्रा से कुछ ही दिन पहले एंटी टैंक मिसाइल का करार रद्द होना। अच्छी बात है कि इजरायल ने इन्हें दोस्ती के आड़े नहीं आने दिया।

नेतन्याहू ने कहा कि भारत के संयुक्त राष्ट्र में वोट देने से दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते रिश्तों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आने वाला। दरअसल भारत जैसे समर्थ राष्ट्र की मैत्री विश्व स्तर पर इजरायल की स्वीकृति को भी और बढ़ाती है। हाल तक अपनी तमाम क्षमताओं के बावजूद वह अलगाव ही झेलता रहा है। दूसरी तरफ भारत को विश्व मंच पर खुलकर साथ देने वाला एक सबल साथी मिल गया है। रक्षा और कृषि की दृष्टि से इजरायल की दोस्ती हमारे लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण बनी हुई है। जल प्रबंधन, विज्ञान व तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देश एक दूसरे को सहयोग करते आए हैं। रूस और अमेरिका के बाद इजरायल भारत का तीसरा सबसे बड़ा डिफेंस पार्टनर है। पिछले तीन सालों में भारत ने इजराइल के साथ 26 हजार करोड़ रुपये के रक्षा सौदे किए हैं। ऐसे में इजरायल का भारत को एक संभावनापूर्ण बाजार के रूप में देखना लाजिमी है। माना जाता है कि भारत के 30 करोड़ नागरिक मध्य और उच्च मध्य वर्ग के हैं, जिनकी क्रय शक्ति पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के समान है। इजरायली निर्यात के लिए यह सूचना काफी महत्वपूर्ण है। इजरायल का निजी क्षेत्र भारतीय बाजार में प्रवेश को लेकर शिकायत भी करता रहा है। उम्मीद है, उसकी शिकायतें जल्दी दूर हो जाएंगी।

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