Pages Navigation Menu

Breaking News

अयोध्या विकास प्राधिकरण की बैठक में सर्वसम्मति से राम मंदिर का नक्शा पास

मानसून सत्र 14 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलेगा, दोनों सदन अलग-अलग समय पर चलेंगे

  7 सितंबर से चरणबद्ध तरीके से मेट्रो सेवाएं होंगी शुरू, 12 सितंबर तक सभी मेट्रो लगेंगीं चलने 

चीन के मंसूबों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब करे भारत

india-china-relations( नन्दिनी सिंह ) भारत – चीन के बीच गलवान घाटी में जो संघर्ष हुआ और भारतीय सैनिकों के साथ जिस तरह की बर्बरता चीन की सेना की सामने आयी, वो भयावह तो है ही, साथ ही दर्शाता है कि चीन के लिये किसी भी देश से किये गये समझौतों का कोई अर्थ नहीं है. चीन कभी भी अपनी हिमाकत दिखाते हुये इन समझौतों का उल्लंघन कर सकता है.भारत के पास चीन की बर्बरता के अनेक प्रमाण हैं. भारतीय सैनिकों के शव जिस क्षत-विक्षत अवस्था में आये, उनके चेहरों पर गहरी चोटों के निशान देखना उनके परिवारजनों के लिये भारी सदमे का कारण रहा. चीन ने जिस तरह के कंटीले तारों और कील लगे डंडों का इस्तेमाल किया, वो प्रमाण भी हमारे पास है.

भारतीय सेना तो चीन को जवाब देने के लिये मुस्तैद है ही, भारत को इस समय कूटनीतिक रूप से भी चीन को घेरने की कोशिश करनी चाहिये. नई दिल्ली स्थित सभी प्रमुख देशों के राजनयिकों को चीन द्वारा भारतीय सीमा में घुसपैठ, विभिन्न द्वीक्षीय समझौतों के उल्लंघन और चीन की सेना की बर्बरता के बारे में बताया जाना चाहिये. भारतीय विदेश मंत्रालय को आवश्यक सबूतों के साथ इन राजनयिकों को चीन द्वारा भारतीय भूभाग पर कब्ज़े की लगातार की जा रही कोशिशों से अवगत करवाया जाना चाहिये.जिस तरह भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक्सपोज़ करने के लिये रणनीति बनायी, उसी तरह की रणनीति की चीन के खिलाफ भी आवश्यकता है. यह भारत के पक्ष में ही है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थाई सदस्यता उसे मिली है. इस अवसर को भी भारत को चीन की दादागिरी, सीनाजोरी और भारतीय ज़मीन पर कब्ज़े की लगातार जारी कोशिशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिये इस्तेमाल करना चाहिये.

संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से उन सभी देशों को एकजुट करने में भारत को अपनी भूमिका निभानी चाहिये जिनकी भौगोलिक, समुद्री सीमाओं को चीन हडप चुका है या ह़डपने की फिराक में है, ऋण के नाम पर जिन देशों की सम्पदाओं को हथिया चुका है या प्रयासरत है. पूरे विश्व में किस तरह ‘वन बेल्ट वन रोड’ के नाम पर चीन एक नया औपनिवेशिक साम्राज्य स्थापित करने में जुटा हुआ है. अर्थ तंत्र का जाल बिछाकर व सैन्य बल से चीन एशिया से लेकर अफ्रीका तक अपने साम्राज्य का विस्तार करने में लगा है. चीन कैसे दबाव डालता है देशों पर इसका ताज़ा उदाहरण नेपाल है. भारत के साथ सदियों के घनिष्ठ संबंधों के बावजूद आज नेपाल, भारत के खिलाफ लिखे गये चीन के वक्तव्यों को अक्षरश: दोहरा रहा है.विश्व के प्रमुख देशों को चीन के औपनिवेशिक रवैये और नीतियों के खिलाफ एकजुट होना होगा. भारत को अपनी ओर से यह कोशिश करनी चाहिये. अमरीका ने इस दिशा में प्रयास आरंभ किये हैं परंतु यूरोप के प्रमुख देशों समेत आस्ट्रेलिया और कैनेडा भी साथ आयें, भारत को इस ओर गंभीरता से कदम बढाने चाहियें. यह समय है कि भारत अपनी विदेश नीति को मौजूदा संकटों को देखते हुये नयी दिशा दे.चीन को रोकने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय जितनी देऱ करेगा, चीन का दुस्साहस उतना ही बढता जायेगा.

nandni

 नन्दिनी सिंह ने एक दशक से अधिक समय तक ब्रिटेन और जर्मनी में पत्रकारिता की है. हाल ही में उनका अंग्रेज़ी उपन्यास, “ए हाउस ऑफ बटरफ्लाइज़: स्टोरी अबाउट ए विमेन्स हॉस्टल” भी प्रकाशित हुआ है.

Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *