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सच बात—देश की बात

…और बंट गया भारत

india partitionनई दिल्ली: क्या आपको पता है कि 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी के 60 दिन पहले भारत  में क्या-क्या हुआ था. कई ऐसी सच्चाई हैं जिनके बारे में हमारी पीढ़ी नहीं जानती है. इसमें भारत-पाकिस्तान का बंटवारा (, सीमाओं का निर्धारण, दंगे, माउंटबेटन योजना और रियासतों का भारत में विलय होना मुख्य रूप से शामिल है.देश को आजादी वर्षों के संघर्ष और स्‍वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के बाद मिली थी, लेकिन विभाजन ऐसी त्रासदी बनकर सामने आया, जिसके बारे में जानकर आज भी लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।भारत में तब एक तबका मुसलमानों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए अलग देश की मांग भी उठा रहा था, जिसकी अगुवाई मोहम्‍मद अली जिन्‍ना कर रहे थे। अलग देश की मांग को लेकर जगह-जगह दंगे भड़क चुके थे। यह महात्‍मा गांधी सहित उन सभी स्‍वतंत्रता सेनानियों के सपनों पर कुठाराघात था, जो वर्षों के त्‍याग व बलिदान के बाद एक आजाद व एकजुट मुल्‍क का सपना देख रहे थे। विभाजन टालने की हरसंभव कोशिश की गई, लेकिन सांप्रदायिक हिंसा के कारण परिस्थितियां इस तरह विकट हो गई थीं कि इसे टालना लगभग नामुमकिन हो गया था।ब्रिटिश इंडिया के आखिरी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन थे, जिन्‍होंने भीषण मानवीय त्रासदी के बीच भारत-पाकिस्‍तान के बंटवारे का फैसला लिया। माउंटबेटन आगे चलकर स्‍वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल बने। ऐतिहासिक तथ्‍यों के अनुसार, अलग देश की मांग को लेकर हिंसा इस कदर भड़क चुकी थी कि उस सर्वमान्‍य समझौते की संभावनाएं ही नहीं तलाशी जा सकीं, जो कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों को मान्‍य हो। तत्‍कालीन परिस्थितियों के आगे सभी लगभग बेबस हो गए थे और आखिरकार ब्रिटिश इंडिया भारत और पाकिस्‍तान दो हिस्‍सों में बंट गया।

prtition1947विभाजन बड़ी मानवीय त्रासदी लेकर आया। बताया जाता है कि इस दौरान दोनों तरफ मारकाट इस बड़े पैमाने पर मची थी कि उसमें लाखों लोगों की जान चली गई, जबकि करोड़ों बेघर हो गए। क्‍या महिलाएं, क्‍या बच्‍चे, क्‍या बुजुर्ग, विभाजन की त्रासदी ने किसी को भी नहीं बख्‍शा। सब हिंसा की भेंट चढ़ गए। हिंसा ने जहां लाखों लोगों की जान ली, वहीं इस दौरान महिलाओं की अस्मिता भी सुरक्षित नहीं रही। बंटवारे की आग में हजारों महिलाओं, युवतियों, बच्चियों के साथ दुष्‍कर्म की घटनाएं हुईं तो कई अन्‍य को अगवा कर लिया गया, जिनके बारे में आखिर तक कुछ पता नहीं चल पाया। विभाजन के बाद सीमा पार से बड़ी संख्‍या में हिन्दुओं और सिखों ने भारत का रुख किया तो यहां से बड़ी संख्‍या में मुसलमान पाकिस्‍तान गए। दोनों ओर से पलायन करने वालों की संख्‍या करीब 1.5 करोड़ बताई जाती है। तब दोनों ओर से लोगों को लाने-ले जाने के लिए ‘रिफ्यूजी स्‍पेशल’ ट्रेनें उत्‍तरी व पश्चिमी लाइन पर चला करती थीं, लेकिन बड़ी संख्‍या में लोग पैदल भी सीमा पार कर रहे थे। हिंसा, लूट की घटनाओं ने करोड़ों इंसानों को प्रभावित किया तो मानवता भी शर्मसार हुई। यही वजह है कि भारत-पाकिस्‍तान का विभाजन दुनिया की बड़ी मानवीय त्रासदियों में से एक है।

विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन का हुआ बुरा हाल

बता दें कि 1946 में, ब्रिटेन (Britain) की लेबर पार्टी (Labour Party) की सरकार का राजकोष, हाल ही में खत्म हुए द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) के बाद खस्ताहाल था. तब उन्हें एहसास हुआ कि न तो उनके पास घर पर जनादेश था और ना ही अंतरराष्ट्रीय समर्थन. इस कारण से वे तेजी से बेचैन होते भारत को नियंत्रित करने के लिए देसी बलों की विश्वसनीयता भी खोते जा रहे थे.

कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच विवाद

फरवरी 1947 में प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने ये घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार जून 1948 से ब्रिटिश भारत को पूरी तरह से सेल्फ-रूल का अधिकार देगी. फिर आखिरी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने सत्ता हस्तांतरण की तारीख को आगे बढ़ा दिया क्योंकि उन्हें लगा कि कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लगातार विवाद के कारण अंतरिम सरकार का पतन हो सकता है.

जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी सालगिरह

उन्होंने सत्ता हस्तांतरण की तारीख के रूप में द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी सालगिरह 15 अगस्त को चुना. ब्रिटिश सरकार ने ब्रिटिश भारत को दो राज्यों में विभाजित करने के विचार को 3 जून 1947 को स्वीकार कर लिया. ये भी घोषित किया कि उत्तराधिकारी सरकारों को स्वतंत्र प्रभुत्व दिया जाएगा और उनके पास ब्रिटिश कॉमनवेल्थ से अलग होने का पूरा अधिकार होगा.

आजादी के पहले वो 60 दिन

ब्रिटिश सरकार ने 3 जून 1947 को ब्रिटिश भारत के विभाजन का फैसला लिया. भारत विभाजन की योजना को ‘माउंटबेटन योजना’ कहा जाता है. भारत-पाकिस्तान की सीमा रेखा सर सिरिल रेडक्लिफ ने तय की. फिर 18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद में भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पारित हुआ. इसके बाद 565 में से 552 रजवाड़े स्वेच्छा से भारत में शामिल हुए. भारत की आजादी के एक दिन पहले 14 अगस्त को पाकिस्तान बना.

बड़े पैमाने पर हुआ रक्तपात

विभाजन के दौरान बंगाल, बिहार और पंजाब में काफी दंगे हुए. महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता दिवस के समारोह में हिस्सा नहीं लिया. दंगों को रोकने के लिए 15 अगस्त को महात्मा गांधी बंगाल के नोआखली में अनशन पर थे. लाखों मुस्लिम, सिख और हिंदू शरणार्थियों ने आजादी के बाद तैयार नई सीमाओं को पैदल पार कर सफर तय किया. पंजाब, जहां सीमाओं ने सिख क्षेत्रों को दो हिस्सों में विभाजित किया, वहां बड़े पैमाने पर रक्तपात हुआ. बंगाल और बिहार में भी हिंसा भड़क गई. नई सीमाओं के दोनों ओर लगभग 2 लाख 50 हजार से 10 लाख लोग हिंसा में मारे गए.14 अगस्त को संविधान सभा की बैठक की अध्यक्षता डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने की. संविधान सभा की बैठक के बाद भारत की आजादी की घोषणा हुई. इस सत्र में जवाहर लाल नेहरू ने भारत की आजादी की घोषणा करते हुए ट्रिस्ट विद डेस्टिनी नामक भाषण दिया. 15 अगस्त 1947 को भारत का अपना कोई राष्ट्र गान नहीं था. रवींद्रनाथ टैगोर लिखित जन गण मन 1950 में राष्ट्रगान बना.

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