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चीन की चालबाजी से चौकन्ना भारत

indian army on china borderभारत और चीन के बीच सैन्य स्तर पर बातचीत के बावजूद तनाव अभी बरकरार है. चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास अपनी फौज बनाए रखी है. इसे देखते हुए भारत ने भी अपनी सेना तैनात कर रखी है. चीनी फौज लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक डटी हुई हैं, लिहाजा भारत ने भी इसके जवाब में बड़ी संख्या में अपनी सेना तैनात की है. सीमा विवाद को देखते हुए भारत ने इस इलाके में रिजर्व फौज भी भेजी है.लद्दाख में चीन ने जो हरकत की है, उसे देखते हुए भरोसा नहीं किया जा सकता. उनकी मंशा क्या है, इसका भी कोई पता नहीं. इन सभी स्थितियों को देखते हुए लद्दाख क्षेत्र में अतिरिक्त फौज लगाई गई है. केवल लद्दाख ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भी फौज की पूरी तैयारी है.

आगे-पीछे क्यों हो रही है चीन की फौज?

भारत और चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार सब कुछ ठीक चल रहा है, तो भारत से लगती सीमा पर चीन सतरंज के घोड़े की तरह ढाई कदम आगे पीछे क्यों हो रहा है?लद्दाख में चीन की सेना कुछ क्षेत्र से पीछे हट रही, लेकिन उत्तराखंड से अरुणाचल तक उसके सैनिकों का दबाव बढ़ रहा है।सवाल लाख टके का है, जवाब के नाम पर अभी सन्नाटा और जवाब केवल भविष्य की गर्त में है। लेकिन भारतीय रणनीतिकार भी सैन्य तैयारी में कोई कसर नहीं छोडऩा चाहते।उत्तराखंड में चीनी घुसपैठ की संभावना को देखते हुए हिंडन से लेकर बरेली एयरफोर्स स्टेशन तक भारत की हर घटना पर सतर्क निगाह है।
क्या है चीन की मंशा?
सेना मुख्यालय और रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ऐसे सवाल पर चुप्पी साध लेते हैं। बताते हैं लद्दाख में पेट्रोलिंग प्वाइट 14, 15 और हॉटस्प्रिंग क्षेत्र से चीनी सैनिक थोड़ा पीछे हटे हैं। पीछे भारतीय सैनिक भी हटे हैं, लेकिन अभी समस्या के हल जैसा कुछ नहीं है।यह केवल एक सकारात्मक संकेत भर है। लेकिन फिंगर 4 से लेकर फिंगर 8 तक चीनी फौज का दबाव बना हुआ है। हालांकि इस समस्या को सुलझाने के लिए 10 राउंड की मेजर जनरल स्तर तक की वार्ता के बाद 6 जून को लेफ्टिेनेंट जनरल रैंक के अफसरों ने मोल्डो में मुद्दे को सुलझाने का प्रयास किया था।10 जून को मेजर जनरल स्तर की करीब चार घंटे चर्चा चली। अभी यह चर्चा चल रही है, आगे भी कई दौर की बात होनी है।चीन फिंगर 4 से फिंगर 8 को अपना बताने पर अड़ा है। भारतीय सेना का कहना है कि यह इलाका हमारा है, चीन की फौज खाली कर दे और अप्रैल 2020 की स्थिति में लौट जाए। पैंगोंग त्सो झील, गलवां नाला (नदी), दरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी तक का क्षेत्र भारतीय कब्जे में आता है।  बात भी इसी क्षेत्र को लेकर अटकी है। दौलत बेग ओल्डी एयरफोर्स स्टेशन पर अब भारत का लॉजिस्टिक सपोर्ट देने में सक्षम सी-130 जे हरक्युलिस लैंड और टेकऑफ कर सकता है।भारत की मंशा इस सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क और आधारभूत संसाधन को बढ़ाने की है। ताकि पैंगोंग त्सो, गलवान नाला, फिंगर 4 तक आसानी से पहुंच बन सके।दौलत बैग ओल्डी से लद्दाख के अन्य क्षेत्र को जोड़ा जा सके, परिवहन व्यवस्था मजबूत बन सके। चीन अपने क्षेत्र में आधरभूत संरचना का विकास तो करना चाहता है, लेकिन भारत के ऐसा करने पर अड़ंगा डाल रहा है।
उत्तराखंड से अरुणाचल तक बढ़ा रहा है फौज का दमखम
मई में उत्तराखंड में चीनी सैनिकों का रुख आक्रामक हो रहा था। उनके हेलीकाप्टर बाराहोती क्षेत्र में भारतीय वायुसीमा का उल्लंघन कर रहे थे। गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र में चीन की गतिविधियों की आशंका को देखकर भारत ने भी सतर्कता बढ़ाई है।बताते हैं उत्तराखंड में भारतीय सेना की आखिरी चौकी से कोई 28-30 किमी दूर अपने इलाके में चीन ने सैनिकों का बड़ा ठिकाना बनाया है। इसी तरह से पांच मई को चीन की सेना ने लद्दाख क्षेत्र में भारतीय इलाके में 60 वर्ग किमी (रिटा. लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग के अनुसार) घुसपैठ की।सैन्य सूत्र बताते हैं कि भारत, चीन, भूटान के ट्राई जंक्शन डोकलाम में भी चीनी सैनिकों की मौजदगी पहले की तुलना में बढ़ी है। सिक्कम से सटी चीन की सीमा पर भी भारी सैन्य वाहनों का आना-जाना बढ़ा है।नाथू ला के पास भी चीनी सैनिकों की हरकत देखी जा रही है। अरुणाचल में भी चीनी सैनिक लगातार अपना दबाव बनाए रखते हैं। सैन्य सूत्र बताते हैं कि इन दिनों यह दबाव बढ़ा हुआ महसूस हो रहा है।

हिमाचल में तीन डिविजन तैनात

सूत्रों ने बताया कि नजदीकी कोर से इन इलाकों में इंफेंट्री के तीन डिविजन और दो अतिरिक्त ब्रिगेड को तनाव वाले इलाकों में भेजा गया है. हिमाचल प्रदेश में भी अतिरिक्त फौज लगाई गई है. अभी हाल में वेस्टर्न आर्मी कमांडर लेफ्ट. जनरल आरपी सिंह ने इस इलाके की अग्रिम चौकियों का दौरा किया था. सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने दौरे में हालात का जायजा लिया और आगे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए फौज को तैयार रहने का निर्देश दिया. यही हाल उत्तराखंड के सीमाई इलाकों का है जहां गढ़वाल और कुमाउं सेक्टर में फौज की सक्रियता बढ़ा दी गई है.

उत्तराखंड में वायु सेना तैयार

सूत्रों के मुताबिक, उत्तराखंड के फॉरवर्ड सेक्टर में आर्मी की मदद के लिए चिन्यालिसौर में वायु सेना भी एक्टिव मोड में है. बता दें, सरहद पर बाराहोती इलाके में चीनी फौज लगातार अपने हेलिकॉप्टर भेज रही है. इससे रह-रह कर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. गढ़वाल सेक्टर में स्थित भारत की अंतिम चौकी से 30 किमी आगे चीन ने अपनी बड़ा सैन्य ठिकाना बना लिया है. सूत्रों ने बताया कि सिक्किम में चीन के साथ लगती सीमा पर भी भारत ने बड़ी संख्या में सेना लगाई है. यहां के नाकुला सेक्टर में भी चीन की हलचल देखी जा रही है.

अरुणाचल में लगी माउंटेन कोर

भारत की ओर से कुछ ऐसी ही तैयारी अरुणाचल प्रदेश में भी है. यहां के ईस्टर्न सेक्टर में माउंटेन स्ट्राइक कोर को किसी भी हालात से निपटने के लिए तैनात कर दिया गया है. सूत्रों ने बताया कि अरुणाचल के उस ओर चीन बिना किसी वजह फौज की संख्या बढ़ा रहा है, इसलिए बिना कोई मौका गंवाए भारत भी फौजी गतिविधि में कमी नहीं छोड़ना चाहता. बता दें, बीते 4 मई से एलएसी पर सेना की सक्रियता बढ़ी है क्योंकि चीन कई दिनों से लगातार अपनी फौज भेज रहा है. आगे अगर हालात बिगड़ते हैं तो सेना ने सुकना के 33 कोर, तेजपुर के 4 कोर और रांची स्थित 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर को तैनात रहने के लिए कहा है.

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