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भारत-अमेरिका के बीच 3 अरब डॉलर की रक्षा डील

trump difence deal with modiनई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को द्विपक्षीय संबंधों के पूरे क्षेत्र को कवर करते हुए व्यापक वार्ता की, जिसमें रक्षा, सुरक्षा और व्यापार और निवेश के प्रमुख क्षेत्र शामिल रहे। इस द्विपक्षीय वार्ता के बाद पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-अमेरिका का साझा बयान जारी किया, जिसमें बताया गया कि भारत-अमेरिका के बीच 3 अरब डॉलर के एक बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। पीएम मोदी ने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर सहमति बनाने के लिए बातचीत होगी।वहीं, साझा बयान से पहले मीडिया के समक्ष वार्ता में अपनी संक्षिप्त टिप्पणी में प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत किया और उन्हें भारत यात्रा के लिए समय निकालने के लिए धन्यवाद दिया। इसके जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत में पिछले दो दिन अद्भुत थे, विशेषकर अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में हुआ स्वागत कार्यक्रम। ट्रंप ने इस दौरान मीडिया के सामने पीएम मोदी से कहा कि यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात थी। लोग आपसे प्यार करते हैं।

पिछले 12 साल में भारत ने अमेरिका से 18 अरब डॉलर के हथियार खरीदे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे से पहले सुरक्षा मसलों की कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) ने 2.6 अरब डॉलर की लागत से 24 एमएच 60आर मल्टीरोल हेलिकॉप्टर खरीदने की डील को मंजूरी दी। इसके अलावा कम से कम 8 से 10 अरब डॉलर के रक्षा सौदों पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा जारी है। हेलिकॉप्टर डील पर नौसेना के पूर्व प्रवक्ता रिटायर्ड कैप्टन डीके शर्मा कहते हैं कि सी किंग्स की कमी नौसेना को हमेशा से खल रही थी। इससे यह कमी भी पूरी हो जाएगी।

एक साल में अमेरिका से 4-5 हेलिकॉप्टर मिलने की उम्मीद
समुद्र में तैनात जहाजों को सबसे ज्यादा खतरा दुश्मनों की पनडुब्बियों से है। इन पनडुब्बियों के खिलाफ इन मल्टीरोल हेलिकॉप्टर की निगरानी और मारक क्षमता अहम सुरक्षा कवच है। सूत्रों के मुताबिक, इस करार पर दस्तखत के बाद एक साल के अंदर ही 4-5 हेलिकॉप्टर भारत को मिलने की उम्मीद है। इन हेलिकॉप्टर का यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड में ट्रायल हो रहा है। आज इंडियन ओशन रीजन (आईओआर) में चीन-पाकिस्तान समेत किसी भी वक्त कम से कम 40-50 जहाजों की मौजूदगी दर्ज की जाती है। ऐसे में “ब्लू इकोनॉमी’ के भारत सरकार के मकसद के लिए जरूरी तटीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थायित्व बनाए रखने में यह मल्टी रोल एमएच 60आर कारगर होंगे।

भारत की रूस पर निर्भरता घटी
एक समय में भारत अपनी जरूरत के 70% से 75% हथियार और सैन्य उपकरण रूस से खरीदता था। आज यह खरीद घटकर 60 से 62% पर आ गई है क्योंकि आज ज्यादा विकल्प मौजूद हैं। सऊदी अरब के बाद हथियारों की खरीदी करने वाला भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत-अमेरिका के बीच परमाणु और सामरिक समझौते के बाद से अमेरिकी उच्च स्तरीय हथियारों और जहाजों की बिक्री के लिए अब दरवाजे भारत के लिए खुल गए हैं, जो पहले अविश्वास की वजह से बंद थे। 2016 में अमेरिका ने भारत को डिफेंस पार्टनर का दर्जा दिया। भारत जापान, कोरिया या तुर्की की तरह अमेरिका का सहयोगी नहीं है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी सरकार और पेंटागन ने अपने कीमती लेकिन उच्च स्तरीय हथियारों की बिक्री का रास्ता साफ कर दिया। आज खासतौर से एविएशन सेक्टर में रूस कटिंग एज टेक्नीक का मुकाबला नहीं कर पा रहा है। इस वजह से भारत रूस की जगह अमेरिका की तरफ जा रहा है। रूस के मिग 21 और मिग 35 हेलिकॉप्टरों की जगह अमेरिकी अपाचे ले रहे हैं। हैवी लिफ्ट के लिए इस्तेमाल होने वाले मिग 26 की जगह चिनूक सीएच46 हेलिकॉप्टर शामिल हो रहे हैं।

हिंद महासागर में भारत की चुनौतियां और इंडो-पैसिफिक में पांव पसारता चीन भी इसकी एक बड़ी वजह है। रूस के मुकाबले इस क्षेत्र में अमेरिका की पहुंच और सैन्य ठिकाने कहीं गुना ज्यादा हैं। आज पी8आई के जरिए भारत और अमेरिका चीन की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। रूस के साथ होने वाले एक-दो जंगी अभियान के मुकाबले भारत-अमेरिका कम से कम 20 से 24 द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यास कर रहे हैं। भारत-अमेरिकी सेनाओं को साथ काम करने और संपर्क साधने में आसानी हो, इसके लिए लेमोआ (LEMOA) और कॉमकासा (COMCASA) जैसे समझौते भी हो रहे हैं।

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का मसला अब भी नहीं सुलझा
भारत वॉशिंगटन के राजनीतिक दबाव के बावजूद अपने रक्षा सौदों की पूर्ति के लिए सिर्फ अमेरिका पर निर्भर होने की गलती नहीं कर सकता। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का मुद्दा आज भी रिश्तों के सबसे बड़े कांटों में शामिल है, जो मोदी सरकार के मेक इन इंडिया के सपनों के लिए स्पीड ब्रेकर है। अमेरिका अपनी हाई-टेक्नोलॉजी को बारगेनिंग चिप के तौर पर इस्तेमाल करता है। फिर भले ही उसे सामने उसका सबसे करीबी दोस्त इजरायल ही क्यों न हो। भारत में स्वदेशी तकनीक से बन रहे लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस के इंजन भी अमेरिकी हैं, लेकिन अपनी जेट इंजन की तकनीक अमेरिका भारत से शायद ही कभी साझा करे।

ट्रम्प की कोशिश रक्षा सौदों में इजाफे पर रहेगी
रूस और भारत ब्रह्मोस के निर्माण में साझेदार हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत रूस से एस400 एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है। लेकिन, सोवियत दौर के खरीदे हुए हथियार, स्पेयर पार्ट और मरम्मत से जुड़ी देरी और कीमतों को लेकर भारत की आमतौर पर शिकायतें रहती हैं। ऐसे में भारत आज अगर फ्रांस से राफेल खरीद रहा है। स्वीडन से साब को लेकर चर्चा हो रही है। तो कोशिश है कि सामरिक संप्रभुता बनी रहे। लेकिन, अमेरिका का पलड़ा धीरे-धीरे भारी जरूर हो रहा है। बेरोकटोक बातें करने और राष्ट्रवादी डंडा चलाने वाले राष्ट्रपति ट्रम्प की कोशिश होगी कि भारत अगर कारोबारी डील को लेकर सहमत नहीं हो रहा है तो कम से कम रक्षा सौदों पर इजाफा करे।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा- ‘ट्रेड डील’ को लेकर आशा

इस साझा बयान के दौरान ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों ने एक व्यापक व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए सहमति जताई है और  मैं आशा करता हूं कि दोनों देशों के लिए हम ये बहुत महत्व का सौदा कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जब से मैंने पदभार संभाला है, भारत में अमेरिकी निर्यात लगभग 60% है और उच्च गुणवत्ता वाली अमेरिकी ऊर्जा का निर्यात 500% तक बढ़ा है।ट्रंप ने कहा कि अपनी यात्रा के दौरान हमने एक सुरक्षित 5G वायरलेस नेटवर्क के महत्व पर चर्चा की।डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि हमने अपाचे और एमएच-60 रोमियो हेलीकॉप्टर सहित दुनिया में बेहतरीन- उन्नत अमेरिकी सैन्य उपकरणों के 3 बिलियन डॉलर से अधिक की खरीद के लिए भारत के साथ समझौतों के साथ अपने रक्षा सहयोग का विस्तार किया। ये हमारी संयुक्त रक्षा क्षमताओं को बढ़ाएंगे।इस दौरान ट्रंप बोले कि मेलानिया और मैं भारत की महिमा और भारतीय लोगों की असाधारण उदारता और दया से काफी प्रभावित हुए हैं। हम आपके देश के नागरिकों के शानदार स्वागत को हमेशा याद रखेंगे।

पीएम मोदी बोले- भारत और अमेरिका के बीच विशेष संबंध

भारत-अमेरिका के बीत साझा बयान के दौरान पीएम मोदी बोले कि भारत और अमेरिका के बीच विशेष संबंध का सबसे महत्वपूर्ण आधार संयुक्त राज्य अमेरिका में  रहने वाले भारतीयों का इसमें बड़ा योगदान है।पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि हमारे वाणिज्य मंत्रियों ने व्यापार पर सकारात्मक बातचीत की है। हम दोनों ने फैसला किया है कि हमारी टीमों को इन व्यापार वार्ता को कानूनी रूप देना चाहिए। हम एक बड़े व्यापार सौदे पर बातचीत खोलने के लिए भी सहमत हुए।इस दौरान पीएम मोदी बोले कि हमने (भारत और अमेरिका) आतंकवाद का समर्थन करने वालों को जिम्मेदार बनाने के प्रयासों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।पीएम मोदी बोले कि आज हमने भारत-अमेरिका साझेदारी के हर महत्वपूर्ण पहलू पर चर्चा की, यह रक्षा और सुरक्षा, ऊर्जा रणनीतिक साझेदारी, व्यापार या लोगों से लोगों के संबंध। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों में मजबूती हमारी साझेदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

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