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चीन-ईरान-PAK निशाने पर, भारत को फायदा

us_india_meet_1536296558_618x347भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारामण और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गुरुवार को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और दिल्ली में रक्षा सचिव जैम्स मैटिस के साथ 2+2 वार्ता की. महत्वपूर्ण सैन्य और राजनीतिक बैठक में, दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल ने ऐतिहासिक संचार संगतता और सुरक्षा समझौते (COMCASA) सहित भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की.

वार्ता के दौरान भारत के रूस और ईरान से संबंध, आतंकवाद, एच 1 बी वीजा जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा की गई. इस दौरान दोनों देशों ने COMCASA समझौते पर हस्ताक्षर किए.

इस समझौते के बाद अमेरिका संवेदनशील सुरक्षा तकनीकों को भारत को बेच सकेगा. बता दें कि साल 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद अमेरिका ने भारत को अहम सैन्य सहयोगी बताया था.

1- भारत को COMCASA से होगा ये फायदा

समझौते के बाद अमेरिका से मिलने वाली रक्षा संचार तकनीक से भारत हिंद महासागर में चीन की पनडुब्बियों पर नजर रख सकेगा. यह समझौता 10 साल तक मान्य रहेगा. इसके साथ ही भारत पहला ऐसा गैर नाटो देश बन गया है जिसे अमेरिका यह सुविधा देगा. अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस समझौते को संबंधों में मील का पत्थर बताया. वहीं रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि करार भारत की रक्षा क्षमता को बढ़ाएगा.

2- दाऊद इब्राहिम को ‘खत्म’ करेगा अमेरिका

पहली बार अमेरिका ने हिंदुस्तान के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक दाऊद इब्राहिम के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कबूली है. अमेरिका ने गुरुवार को हुई बैठक में पाकिस्तान से चल रहे आतंकवाद को खत्म करने के लिए भारत का साथ देने में हामी भरी. इस दौरान पाकिस्तान से संचालित कई आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की बात है.

इन संगठनों की लिस्ट में दाऊद इब्राहिम की D-कंपनी का भी नाम है. ये फैसला इसलिए भी काफी अहम हो जाता है, क्योंकि दाऊद की कुछ संपत्तियां अमेरिका में भी हैं. अब अगर अमेरिका इनपर भी कार्रवाई करता है, तो ऐसे में ये चोट सीधे दाऊद को लगेगी.

इस दौरान सुषमा स्वराज ने अमेरिकी मंत्रियों के सामने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों की नामजदगी स्वागत योग्य है. उन्होंने कहा कि 26/11 हमले की 10वीं वर्षगांठ पर हम इसके गुनहगारों को सजा दिलाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं.

3- भारत को NSG सदस्यता के लिए कोशिश करेगा अमेरिका

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि एनएसजी में भारत की यथाशीघ्र सदस्यता के लिए सहमति बनी, अमेरिका इसके लिए सहयोग करेगा. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक भागीदारी आगे बढ़ रही है. दोनों देशों में तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था से दोनों को ही फायदा हो रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति करने वाले देश के तौर पर उभर रहा है, कारोबार को संतुलित और परस्पर लाभकारी बनाने की कोशिश हो रही है.

आपको बता दें कि पड़ोसी मुल्क चीन NSG में भारत का प्रवेश गत 2 वर्षों से इस आधार पर बाधित कर रहा है कि उसने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. हालांकि 48 सदस्यीय समूह के ज्यादातर सदस्य भारत के मामले का समर्थन करते हैं. चीन के सहयोगी पाकिस्तान ने भी 2016 में NSG की सदस्यता के लिए आवेदन दिया था.

 4- एच-1बी वीजा का मुद्दा

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत के लोगों को विश्वास है कि अमेरिका उनके हितों को कभी नुकसान नहीं पहुंचाएगा, मैंने अमेरिकी समकक्ष से भारतीय जनता की इस भावना का सम्मान करने को कहा है. सुषमा स्वराज ने कहा कि ट्रंप और मोदी के बीच में जो मित्रता है, उससे भारत के लोगों को लगता है कि अमेरिका भारत के खिलाफ कोई काम नहीं करेगा. मैंने अमेरिकी विदेश मंत्री से कहा है कि अमेरिका भारत के लोगों की इन भावनाओं का ख्याल रखे.

उन्होंने बताया कि आवागमन की सुविधा और ढांचागत विकास को बल देने के लिए द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. आपको बता दें कि अमेरिका में भारत के लाखों आईटी प्रोफेशनल्स अमेरिका में काम करते हैं. ऐसे में यह सुषमा स्वराज का यह बयान उन लाखों भारतीयों के लिए राहत की बात है.

एच 1 बी वीज़ा एक गैर-अप्रवासी वीज़ा है जो अमेरिकी कंपनियों को विशेष व्यवसायों में विदेशी श्रमिकों को रोजगार देने की अनुमति देता है. आपको बता दें कि इससे पहले भी एच 1 बी वीज़ा में बदलाव को लेकर अमेरिका ने अपना रुख साफ किया था. अमेरिका ने कहा था कि इस वीजा को जारी करने के नियमों में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है.

5- दोनों देशों के विदेश व रक्षा मंत्रियों के बीच होगी हॉटलाइन

भारत और अमेरिका अपने विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच हॉटलाइन खोलने पर सहमत हुए हैं. अगले साल दोनों देश तीनों सेनाओं के साथ सैन्य अभ्यास आयोजित करेंगे.

6- अमेरिका रूस पर नरम, ईरान पर गरम, भारत बोला- जरूरत के हिसाब से उठाएंगे कदम

अमेरिका ने इस दौरान भारत के रूस के संबंधों को लेकर अपनी बात रखी. अमेरिका ने कहा कि हम भारत के रुस के साथ संबंधों की अहमियत को समझते हैं. हालांकि ईरान के साथ भारत के तेल संबंध पर अमेरिका के रुख में कोई नरमी नहीं आई है.

अमेरिका चाहता है कि भारत ईरान से तेल खरीदना बंद करे और अमेरिका पर ज्यादा निर्भर रहे. अमेरिका ने कहा कि भारत और अन्य देश 4 नंवबर तक ईरान के साथ तेल संबंधों को खत्म करें, नहीं तो प्रतिबंध का सामना करना पड़ेगा.

भारत के लिए ये महंगा सौदा हो सकता है. भारत ने संदेश दिया है कि वह अपने जरूरतों के हिसाब से इसे तय करेगा. वहीं अमेरिका ने रूस के साथ हुए सैन्य डील को कोई मुद्दा बनाने से इंकार कर दिया और कहा कि वह दोनों देशों के संबंधो की अहमियत को समझता है.

बता दें कि भारत की रूस से करीब 4.5 अरब डॉलर में पांच एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने की योजना है. यह खरीद अमेरिकी कांग्रेस द्वारा स्थापित प्रतिबंध अधिनियम कानून सीएएटीएसए का उल्लंघन है. पॉम्पियो ने कहा कि अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन हमारा प्रयास है कि भारत जैसे प्रमुख रक्षा भागीदार को दंडित नहीं किया जाए.

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