Pages Navigation Menu

Breaking News

कोरोना से ऐसे बचे;  मास्क लगाएं, हाथ धोएं , सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और कोरोना वैक्सीन लगवाएं

 

बंगाल हिंसा: पीड़ित परिवारों से मिले राज्यपाल धनखड़, लोगों के छलके आंसू

हमास के सैकड़ों आतंकवादियों को इजराइल ने मार गिराया

सच बात—देश की बात

कोरोना महामारी से देशवासियों को बचाने में जुटी भारतीय सेना

indian-army-aid-1620321198नई दिल्ली: कोरोना से जंग लड़ने में सेना के तीनों अंग यानि थलसेना, वायुसेना और नौसेना युद्धस्तर पर जुटे हुए हैं. खुद प्रधानमंत्री ने कोरोना के खिलाफ जंग में सशस्त्र सेनाओं की भूमिका की प्रशंसा की है. पीएम ने ट्वीट कर कहा कि जल, थल और नभ में हमारे सशस्त्र-बलों ने कोविड के खिलाफ के जंग में मजबूती प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.पीएम मोदी ने ये ट्वीट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस लेख पर किया है जिसमें राजनाथ सिंह ने पिछले 2-3 हफ्तों में कोरोना के खिलाफ जंग में सेना के तीनों अंग- थलेसना, वायुसेना, नौसेना और रक्षा संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर लिखा है. इस लेख में रक्षा मंत्री ने सैन्य कमांडर्स को इमरजेंसी फाइनेंशियल पॉवर्स, डीआरडीओ के अस्पतालों और मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट्स, सेना के डॉक्टर्स, वायुसेना और नौसेना की ऑक्सीजन सप्लाई और डिफेंस पीएसयू के योगदान के बारे में विस्तार से लिखा है. रक्षा मंत्री ने अपने लेख को नाम दिया है ‘अदृश्य दुश्मन से जंग: रक्षा मंत्रालय का कोविड-19 को जवाब’

air forceआपको बता दें कि जहां गुरूवार को डीआरडीओ ने राजधानी दिल्ली के एम्स और आरएमएल हॉस्पिटल्स में मेडिकल ऑक्सीज प्लांट लगाने का काम पूरा कर लिया. वहीं थलसेना ने राज्य सरकारों से समन्वय के लिए सेना मुख्यालय में एक अलग सेल तैयार किया है. इसके अलावा थलेसना ने उत्तर-पूर्व के राज्यों से अपने दो फील्ड हॉस्पिटल्स एयरलिफ्ट कर पटना पहुंचा दिए हैं ताकि 500 बेड का एक कोविड सेंटर बनाया जाए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने के आखिरी में 29 अप्रैल को सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे के साथ कोविड-19 प्रबंधन को लेकर सेना की ओर से उठाए गए कदमों और अन्य तैयारियों की समीक्षा की थी. इस दौरान सेना प्रमुख नरवणे ने पीएम को बताया था कि सेना ने अपने चिकित्‍सा कर्मचारियों को राज्‍य सरकारों की सेवा में तैनात किया है और साथ ही वह देश के विभिन्‍न भागों में अस्‍थाई अस्‍पताल बना रही है. नरवणे ने प्रधानमंत्री को बताया था कि जहां संभव हो रहा है वहां सेना के अस्पतालों को आम जनता की सेवा में इस्तेमाल किया जा रहा है और इसके लिए आम नागरिक चाहें तो पास के सेना के अस्पताल से संपर्क साध सकते हैं.सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री को इस बात से भी अवगत कराया था कि आयात किए गए ऑक्सीजन टैंकरों और गाड़ियों के प्रबंधन में जहां विशेषज्ञ कौशल की जरूरत पड़ रही है वहां सेना के श्रमबल की ओर से मदद पहुंचाई जा रही है. देश में तेजी से बढ़ते कोविड-19 के मामलों के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और वायुसेना अध्यक्ष आर के एस भदौरिया से मुलाकात कर सेना के विभिन्न अंगों द्वारा इस महामारी से लड़ने के मद्देनजर उठाए गए कदमों की तैयारियों का जायजा लिया था.

भारतीय वायुसेना ने कई उड़ानें भरीं 

india air force covidभारतीय वायुसेना ने सिंगापुर, दुबई से ऑक्सीजन टैंकर लाते हुए आंतरिक और बाह्य रूप से कई उड़ानें भरी हैं। उसके बाद पिछले 2 दिनों में उन्होंने खाली टैंकरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए उड़ानें भरी हैं, फिर उन्हें ऑक्सीजन से भरा गया है। उन्होंने कहा कि संकट के समय सशस्त्र बल एक साथ हैं। हम इसे को जीत (Co-Jeet) कहते हैं। क्योंकि हमें कोविड पर यह युद्ध जीतने की जरूरत है। हमें यह युद्ध हर हाल में जीतना है। सभी सशस्त्र बल इस मौके एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं। पीएम मोदी के साथ सीडीएस और आर्मी चीफ की बैठकों के बारे में लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानितकर ने कहा कि संकट के समय सशस्त्र बल इकट्ठा हुए हूं। हम देशवासियों को आश्वस्त करते हैं कि जरूरत के समय सशस्त्र बल हर संभव मदद करेंगे। हम राष्ट्र का हिस्सा हैं। हमें साथ काम करने के लिए दिशा-निर्देश आए हैं और जितना संभव होगा, उतना काम करेंगे।

विदेश से आक्सीजन लाने के लिए भारतीय नौसेना के पोत रवाना

navy covidदेश में कोरोना संकट के बीच भारतीय नौसेना एक बार फिर देशवासियों के बचाव में सामने आई है। नौसेना ने विदेश से आक्सीजन से भरे क्रायोजेनिक कंटेनर लाने के लिए विशेष अभियान की शुरुआत की है। कोरोना संक्रमण के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी से इस समय देश में आक्सीजन की भारी किल्लत है। अधिकारियों ने बताया कि भारतीय नौसेना के युद्धक पोत शुरू में बहरीन, सिंगापुर और थाईलैंड से आक्सीजन लेकर आ रहे हैं।

बहरीन में मनामा बंदरगाह पर पहुंच चुके हैं दो पोत 

उन्होंने बताया कि दो पोत आइएनएस कोलकाता और आइएनएस तलवार बहरीन में मनामा बंदरगाह पर पहुंच चुके हैं। ये 40 मीट्रिक टन तरल आक्सीजन लेकर मुंबई लाएंगे। एक अन्य पोत आइएनएस जलाश्व बैंकाक रवाना हो गया है जबकि आइएनएस ऐरावत इसी मिशन के तहत सिंगापुर जा रहा है। भारतीय नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मधवल ने बताया कि नौसेना ने आक्सीजन लाने के लिए समुद्र सेतु द्वितीय अभियान शुरू किया है। पिछले साल लाकडाउन के कारण विदेश में फंसे लोगों को लाने के लिए नौसेना ने वंदेभारत अभियान के तहत समुद्र सेतु अभियान चलाया था।

सेना ने किया एक कोविड मैनेजमेंट सेल तैयार

सेना ने बयान जारी कर बताया कि कोविड के खिलाफ साउथ ब्लॉक स्थित एक कोविड मैनेजमेंट सेल तैयार किया गया है. इसके प्रमुख एक डायरेक्टर जनरल रैंक के लेफ्टिनेंट जनरल हैं और वे वाइस चीफ (सह-सेना प्रमुख) को रिपोर्ट करेंगे. इस सेल का मुख्य कार्य कोविड से जुड़ी स्टाफिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट होगा. क्योंकि, राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन की मदद के लिए सेना के डॉक्टर्स और पैरा-मेडिकल स्टाफ दिल्ली, लखनऊ, अहमदाबाद, पटना, वाराणसी, भोपाल, पुणे, बाडमेर, सागर इत्यादि जगहों पर लगा है.

विदेशों से मदद ला रहे हैं नौसेना के युद्धपोत

इसके अलावा नौसेना के दो युद्धपोत-आईएनस कोलकता और ऐरावत कुवैतस सिंगापुर से 4000 ऑक्सीजन सिलेंडर, दो 40 टन के ऑक्सीजन भरे टैंक और आठ खाली टैंक लेकर भारत के लिए रवाना हो गए हैं. बुधवार को आईएनएस तलवार भी 54 टन लिक्विड ऑक्सीजन लेकर बहरीन से मंगलौर बंदरगाह लौट आया था.नौसेना के मुताबिक, 26 सदस्यों की एक मेडिकल टीम विशाखापट्टनम से अहमदाबाद स्थित डीआरडीओ के धंवन्तरी हॉस्पिटल के लिए पहुंच गई है. इससे पहले 214 सदस्यों की एक नेवल मेडिकल टीम पहले से ही अहमदाबाद, दिल्ली और पटना में तैनात है. इस टीम में 58 डॉक्टर्स, 30 नर्सिंग ऑफिसर्स, 64 मेडिकल अस्सिटेंट और 62 बैटल फील्ड नर्सिंग अस्सिटेंट शामिल हैं.

कोरोना के खिलाफ जंग में जुटी है वायुसेना 

भारतीय वायुसेना के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स भी सिंगापुर, बैंकाक, आस्ट्रेलिया और बेल्जियम से खाली क्रायोजैनिक ऑक्सीजन कंटनेर लाने में जुटे हुए हैं. इसके अलावा एक राज्य से दूसरे राज्य में भी खाली ऑक्सीजन टैंकर्स एयरलिफ्ट कराने में वायुसेना की ट्रांसपोर्ट फ्लीट जुटी हुई है. वायुसेना ने बेंगलुरू में एक 100 बेड का कोविड हॉस्पिटल स्थानीय प्रशासन की मदद के लिए तैयार किया है.

सेना के रिटायर्ड डॉक्टर देशभर में किए जाएंगे तैनात

indian-army-aid-1620321198सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (AFMS) कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए रिटायर्ड डॉक्टरों को भर्ती करने जा रही है. ये डॉक्टर 11 महीनों के लिए भर्ती किए जाएंगे. रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को एक आदेश पारित किया कि 2017 और 2019 के बीच सेवा से मुक्त किए गए इन डॉक्टरों को भर्ती करने के लिए AFMS को अनुमति दी जाए.रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, आदेश में कहा गया है कि इन डॉक्टरों को वेतन उनकी अंतिम सैलरी के बेसिक पे और स्पेशलिस्ट अलाउंसेज को जोड़कर दिया जाएगा. यह राशि अनुबंध की अवधि के लिए अपरिवर्तित रहेगी और किसी अन्य भत्ते का भुगतान नहीं किया जाएगा. दरअसल, भारतीय सेना कोरोना से लड़ाई लड़ने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है. उसकी कोरोना महामारी की दूसरी लहर से निपटने में बड़ी भूमिका है.

सेना पंजाब और हरियाणा में बना रही है अस्पताल

सेना की पश्चिमी कमान पंजाब एवं हरियाणा में कोविड अस्पतालों की स्थापना कर रही है, जिनमें हल्के से मध्यम लक्षण वाले 100 मरीजों को भर्ती किया जा सकेगा. चंडीगढ़, पटियाला और फरीदाबाद में बनाए जा रहे इन अस्पतालों का उद्घाटन कर 10 मई को इन्हें जनता के लिए खोले जाने की उम्मीद है. पश्चिमी कमान के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आर पी सिंह ने कहा कि कमान सैन्य कोविड फील्ड अस्पतालों की स्थापना कर रही है और पंजाब में बंद पड़े ऑक्सीजन संयंत्रों को दोबारा शुरू करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को तकनीकी एवं अन्य सहायता उपलब्ध करा रही है. अधिकारी ने कोविड संकट से निपटने में सहायता के लिए हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है. पश्चिमी कमान के क्षेत्र में आने डीआरडीओ द्वारा स्थापित अस्पतालों में अब तक कमान की तरफ से 108 डॉक्टरों, 14 नर्सिंग अधिकारियों और 205 चिकित्साकर्मियों को तैनात किया गया है.

Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »