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किसानों ने ठुकराया केंद्र सरकार का प्रस्ताव

farmer protestनए कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच जारी गतिरोध कम होने के बजाय और बढ़ गया है। बुधवार को किसान संगठनों ने ड्राफ्ट प्रस्‍ताव ठुकरा कर केंद्र की मुसीबत और बढ़ा दी। किसान यूनियनों के नेताओं ने आंदोलन और तेज करने, मंत्रियों का घेराव करने और हाइवे जाम करने की चेतावनी दी है। पिछले करीब दो हफ्ते से जारी किसानों के तेवरों में जरा भी नरमी नहीं आई है। सरकार में शीर्ष स्‍तर पर किसानों की बात सुनी जा रही है, ऐसे संकेत पिछले कुछ दिनों से दिए जा रहे थे। गृह मंत्री अमित शाह ने अब कमान अपने हाथ में ले ली है। ड्राफ्ट प्रस्‍ताव खारिज होने के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शाह से मुलाकात की है। आगे सरकार का क्‍या रुख रहेगा, उसपर इस मुलाकात में चर्चा हुई।

करीब दो हफ्ते से आंदोलनरत किसानों के साथ केंद्र ने कई दौर की बातचीत की थी। जब कुछ हल नहीं निकल सका farmer protest 2तो मंगलवार को खुद शाह की किसान यूनियनों के नेताओं के साथ मुलाकात हुई थी। इसी के बाद एक ड्राफ्ट प्रस्‍ताव तैयार कर किसान संगठनों को भेजा गया। इसमें केंद्र की तरफ से किसान नेताओं की कई आपत्तियों पर जवाब दिया गया था। हालांकि बुधवार को इसे किसान संगठनों ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सीधे शाह के घर पहुंचे और दोनों नेताओं में ताजा घटनाक्रम पर चर्चा हुई। किसानों के तेवरों में कोई बदलाव नहीं है, वे तीनों कृषि कानूनों को पूरी तरह वापस लेने के साथ-साथ एमएसपी को लेकर गारंटी की मांग कर रहे हैं। हमारे सहयोगी टाइम्‍स नाउ के अनुसार, 14 दिसंबर को किसानों के आंदोलन तेज करने से पहले, सरकार एक बार फिर उन्‍हें बातचीत की मेज तक लाने की कोशिश कर सकती है। शाह इस बारे में पीएम नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार किसानों की चिंताओं के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने किसानों के साथ जारी वार्ता को ‘‘कार्य प्रगति पर है’’ (वर्क इन प्रोग्रेस) बताया और भरोसा जताते हुए कहा कि इसके जल्द परिणाम आएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दे पर सरकार ‘‘संवेदनशील’’ है और उसने आंदोलनकारी किसानों से कई दौर की वार्ता की है और उनके मुद्दों का समाधान करने के लिए इच्छुक है।

farmer protest3केंद्र सरकार के प्रस्‍ताव में क्‍या था?

केंद्र सरकार ने किसानों के सामने प्रस्ताव रखा था कि वह वर्तमान में लागू न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था को जारी रखने के लिए ‘‘लिखित में आश्वासन’’ देने को तैयार है। सरकार ने कम से कम सात मुद्दों पर आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव भी दिया है, जिसमें से एक मंडी व्यवस्था को कमजोर बनाने की आशंकाओं को दूर करने के बारे में है। सरकार ने यह भी कहा कि सितंबर में लागू किए गए नये कृषि कानूनों के बारे में उनकी चिंताओं पर वह सभी आवश्यक स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार है।

 

केंद्र के प्रस्‍ताव में क्‍या है?

  • नये कानूनों के बाद मंडी व्यवस्था कमजोर होने की किसानों की आशंका पर सरकार ने कहा कि संशोधन किया जा सकता है, जहां राज्य सरकारें मंडियों के बाहर काम करने वाले व्यवसायियों का पंजीकरण कर सकती हैं। राज्य सरकारें भी उन पर कर और उपकर लगा सकती हैं, जैसा वे एपीएमसी (कृषि उत्पाद विपणन समिति) मंडी में करती थीं।
  • किसानों के अनुसार, उनकी एक चिंता यह भी है कि उनसे ठगी की जा सकती है क्योंकि पैन कार्ड धारक किसी भी व्यक्ति को एपीएमसी मंडियों के बाहर व्यवसाय करने की इजाजत होगी। इस पर सरकार ने कहा कि इस तरह की आशंकाओं को खारिज करने के लिए राज्य सरकार को शक्ति दी जा सकती है कि इस तरह के व्यवसायियों का पंजीकरण करे और किसानों के स्थानीय हालात को देखकर नियम बनाए।
  • विवाद के समाधान के लिए किसानों को दीवानी अदालतों में अपील का अधिकार नहीं मिलने के मुद्दे पर सरकार ने कहा कि वह दीवानी अदालतों में अपील के लिए संशोधन करने को तैयार है। वर्तमान में विवाद का समाधान एसडीएम के स्तर पर किये जाने का प्रावधान है।
  • बड़े कॉरपोरेट घरानों के कृषि जमीनों के अधिग्रहण की आशंकाओं पर सरकार ने कहा कि कानूनों में यह स्पष्ट किया जा चुका है, फिर भी स्पष्टता के लिए यह लिखा जा सकता है कि कोई भी क्रेता कृषि जमीन पर ऋण नहीं ले सकता है, न ही किसानों के लिए ऐसी कोई शर्त रखी जाएगी।
  • कृषि भूमि को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से जोड़ने के बारे में सरकार ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था स्पष्ट है लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे और स्पष्ट किया जा सकता है।
  • एमएसपी व्यवस्था को रद्द करने और व्यवसाय को निजी कंपनियों को देने की आशंका के बारे में सरकार ने कहा कि वह लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार है कि वर्तमान एमएसपी व्यवस्था जारी रहेगी।
  • प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक, 2020 को रद्द करने की मांग पर सरकार ने कहा कि किसानों के लिए वर्तमान में बिजली बिल भुगतान की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा।
  • एनसीआर के वायु गुणवत्ता प्रबंधन अध्यादेश 2020 को रद्द करने की किसानों की मांग पर सरकार ने कहा कि वह उपयुक्त समाधान की तलाश करने के लिए तैयार है।
  • कृषि कांट्रैक्ट्स का पंजीकरण मुहैया कराने की किसानों की मांग पर सरकार ने कहा कि जब तक राज्य सरकार पंजीकरण के लिए व्यवस्था करती है, तब तक एसडीएम कार्यालय में उपयुक्त सुविधा मुहैया कराई जाएगी जहां हस्ताक्षर के 30 दिनों बाद कांट्रैक्ट की प्रति सौंपी जा सकती है।
  • कृषि कानूनों की संवैधानिक वैधता पर केंद्र ने कहा कि समवर्ती सूची के तहत इसके पास शक्ति है कि वह कंट्रैक्ट कृषि और अंतर राज्यीय एवं राज्यों के बाहर व्यवसाय पर कानून पारित कर सके और राज्यों को एपीएमसी इलाकों के बाहर शुल्क, उपकर लगाने से रोके।

विपक्ष ने राष्‍ट्रपति से मिलकर सरकार पर बढ़ाया दबाव

सड़क पर उतरे किसानों के साथ अधिकतर विपक्षी दलों के आ जाने से सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। बुधवार को राहुल गांधी, शरद पवार समेत पांच विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। विपक्षी नेताओं ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने का अनुरोध किया। पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा के महासचिव डी राजा, और डीएमके नेता टीकेएस इलंगोवान शामिल थे।

राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है, ”भारतीय संविधान का संरक्षक होने के नाते, आपसे हम अनुरोध करते हैं कि अपनी सरकार को हठ छोड़ने और भारत के अन्नदाता की ओर से उठाई गई मांगों को स्वीकार करने के लिए मनाएं।” राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कई राज्यों में सरकार चला रहे दलों समेत 20 से अधिक विभिन्न पार्टियों ने किसानों के जारी ऐतिहासिक आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाई है।

आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं किसान संगठन

किसान संगठनों ने बुधवार को साफ कर दिया कि वे कानूनों को निरस्त किये जाने से कम कुछ नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि नए मसौदा में कुछ नया नहीं है जो तोमर किसान नेताओं के साथ बैठकों में कह न चुके हों। ‘संयुक्त किसान समिति’ ने प्रस्ताव को देश के किसानों का “अपमान” करार दिया। किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा वे शनिवार को जयपुर-दिल्ली और दिल्ली-आगरा एक्सप्रेस-वे को बंद करेंगे।

किसानों के तीखे तेवर बरकरार, आज क्‍या कहा?

  • 14 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन कर आंदोलन को तेज करेंगे। उत्तर भारत के सभी किसानों के लिये 14 दिसंबर को ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान किया गया है।
  • दक्षिण में रहने वाले किसानों से जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन के लिये कहा गया है।
  • देश के सभी टोल प्लाजा को 12 दिसंबर को ‘टोल-फ्री’ (कर मुक्त) किया जाएगा।
  • प्रदर्शनकारी किसान 14 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी के सभी राजमार्गों को बंद करेंगे।
  • जिला मुख्यालयों के साथ ही भाजपा के जिला कार्यालयों का भी घेराव करेंगे।
  • अगर तीन कृषि कानून रद्द नहीं किये गए तो किसान एक-एक कर दिल्ली की तरफ आने वाले सभी रास्तों को बंद करेंगे।
  • किसान नेता जंगवीर सिंह ने कहा, “हम अडानी और अंबानी के स्वामित्व वाले प्रतिष्ठानों व सेवाओं का बहिष्कार करेंगे।”
  • किसान नेताओं ने यह भी मांग की कि एमएसपी तंत्र को कानूनी समर्थन दिया जाए।
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