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जम्मू कश्मीर का महत्व गिलगित-बल्तिस्तान के कारण

GILGIT-BALTISTAN-REGIONआज जब हम आर्थिक शक्ति बनने की सोच रहे हैं क्या आपको पता है कि गिलगित से रोड मार्ग द्वारा आप विश्व के अधिकांश कोनों में जा सकते हैं। गिलगित से रोड मार्ग 5000 Km दुबई है, 1400 Km दिल्ली है, 2800 Km मुंबई है, 3500 Km रूस है, चेन्नई 3800 Km है लंदन 8000 Km है। जब हम सोने की चिड़िया थे तब हमारा सारे देशों से व्यापार इसी सिल्क मार्ग से चलता था 85% जनसंख्या इन मार्गों से जुड़ी हुई थी। मध्य एशिया, यूरेशिया, यूरोप, अफ्रीका सब जगह हम रोड मार्ग जा सकते हैं अगर गिलगित-बल्तिस्तान हमारे पास हो ।आज हम पाकिस्तान के सामने IPI (Iran-Pakistan-India) गैस लाइन बिछाने के लिए गिड़गिड़ाते हैं। ये तापी की परियोजना है जो कभी पूरी नहीं होगी। अगर हमारे पास गिलगित होता तो गिलगित के आगे तज़ाकिस्तान था, हमें किसी के सामने हाथ नहीं फ़ैलाने पड़ते ।

हिमालय की 10 बड़ी चोटियां जो कि विश्व की 10 बड़ी चोटियों में से हैं। ये सारी हमारी सम्पदा है और इन 10 में से 8 गिलगित-बल्तिस्तान में है l तिब्बत पर चीन का कब्जा होने के बाद जितने भी पानी के वैकल्पिक स्त्रोत (Alternate Water Resources) हैं वह सारे गिलगित-बल्तिस्तान में हैं।आप हैरान हो जाएंगे वहां बड़ी -बड़ी 50-100 यूरेनियम और सोने की खदानें हैं। POK के मिनरल डिपार्टमेंट की रिपोर्ट को पढ़िए, आप आश्चर्यचकित रह जाएंगे । वास्तव में गिलगित-बल्तिस्तान का महत्व हमको मालूम नहीं है। सबसे बड़ी बात गिलगित-बल्तिस्तान के लोग Strong Anti PAK हैं ।

दुर्भाग्य क्या है हम हमेशा कश्मीर ही बोलते हैं, जम्मू- कश्मीर नहीं बोलते हैं। कश्मीर कहते ही जम्मू, लद्दाख, गिलगित-बल्तिस्तान हमारे मस्तिष्क से निकल जाता है । ये पाकिस्तान के कब्जे में जो POK है उसका क्षेत्रफल 79000 वर्ग किलोमीटर है। उसमें कश्मीर का हिस्सा तो सिर्फ 6000 वर्ग किलोमीटर है। 9000 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा जम्मू का और 64000 वर्ग किलोमीटर हिस्सा लद्दाख का है, जो कि गिलगित-बल्तिस्तान है । यह कभी कश्मीर का हिस्सा नहीं था, यह लद्दाख का हिस्सा था वास्तव में सच्चाई यही है । तभी भारत सरकार ने दो संघ शासित राज्य जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का उचित निर्माण किया।

पाकिस्तान जो बार-बार कश्मीर का राग अलापता रहता है उससे यदि कोई यह पूछे तो सही कि क्या गिलगित-बल्तिस्तान और जम्मू का हिस्सा जिस पर तुमने कब्ज़ा कर रखा है क्या ये भी कश्मीर का ही भाग है ?? कोई उत्तर नहीं मिलेगा ।क्या आपको पता है कि गिलगित -बल्तिस्तान, लद्दाख के रहने वाले लोगों की औसत आयु विश्व में सर्वाधिक है। यहाँ के लोग विश्व के अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा जीते हैं।

भारत में आयोजित एक सेमिनार में गिलगित-बल्तिस्तान के एक बड़े नेता को बुलाया गया था। उसने कहा कि “we are the forgotten people of forgotten lands of BHARAT” उसने कहा कि देश हमारी बात ही नहीं जानता । जब किसी ने उससे सवाल किया कि क्या आप भारत में रहना चाहते हैं ?? तो उसने कहा कि 60 साल बाद तो आपने मुझे भारत बुलाया और वह भी अमेरिकन टूरिस्ट वीजा पर… आप मुझसे सवाल पूछते हैं कि क्या आप भारत में रहना चाहते हैं !! उसने कहा कि आप गिलगित-बल्तिस्तान के बच्चों को IIT, IIM में दाखिला दीजिए। AIIMS में हमारे लोगों का इलाज कीजिए। हमें यह लगे तो सही कि भारत हमारी चिंता करता है हमारी बात करता है । गिलगित-बल्तिस्तान में पाकिस्तान की सेना कितने अत्याचार करती है लेकिन आपके किसी भी राष्ट्रीय अखबार में उसका जिक्र तक नहीं आता है । आप हमें ये अहसास तो दिलाइये की आप हमारे साथ हैं।और मैं खुद आपसे यह पूछता हूं कि आप सभी ने पाकिस्तान को हमारे कश्मीर में हर सहायता उपलब्ध कराते हुए देखा होगा । वह बार बार कहता है कि हम कश्मीर की जनता के साथ हैं, कश्मीर की आवाम हमारी है । लेकिन क्या आपने कभी यह सुना है कि किसी भी भारत के नेता, मंत्री या सरकार ने यह कहा हो कि हम POK – गिलगित-बल्तिस्तान की जनता के साथ हैं, वह हमारी आवाम है, उनको जो भी सहायता उपलब्ध होगी हम उपलब्ध करवाएंगे, आपने यह कभी नहीं सुना होगा ।

कांग्रेस सरकार ने कभी POK गिलगित-बल्तिस्तान को पुनः भारत में लाने के लिए कोई बयान तक नहीं दिया, प्रयास करना तो बहुत दूर की बात है । हालाँकि पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार के समय POK का मुद्दा उठाया गया, फिर 10 साल पुनः मौन धारण हो गया। अब फिर से नरेंद्र मोदी जी की सरकार आने पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में ये मुद्दा उठाया ।आज अगर आप किसी को गिलगित के बारे में पूछ भी लोगे तो उसे यह पता नहीं है कि यह जम्मू कश्मीर का ही भाग है !वह सीधे ही यह पूछेगा क्या यह कोई चिड़िया का नाम है ?? वास्तव में हमारा जम्मू कश्मीर के बारे में जो गलत दृष्टिकोण है उसको बदलने की जरूरत है ।

अब करना क्या चाहिए ??

तो पहली बात है सुरक्षा में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा का मुद्दा बहुत संवेदनशील है। इस पर अनावश्यक वाद-विवाद नहीं होना चाहिए , वहीं एक अनावश्यक वाद विवाद चलता है कि जम्मू कश्मीर में इतनी सेना क्यों है ??तो उन तथाकथित बुद्धिजीवियों को बता दिया जाए कि जम्मू-कश्मीर का 2800 किलोमीटर का बॉर्डर है जिसमें 2400 किलोमीटर पर LOC है, आजादी के बाद भारत ने पांच युद्ध लड़े वह सभी जम्मू-कश्मीर से लड़े भारतीय सेना के 18 लोगों को परमवीर चक्र मिला और वह सभी 18 के 18 जम्मू कश्मीर में शहीद हुए हैं ।इनमें 14000 भारतीय सैनिक शहीद हुए हैं जिनमें से 12000 जम्मू कश्मीर में शहीद हुए हैं, अब सेना बॉर्डर पर नहीं तो क्या मध्यप्रदेश में रहेगी क्या यह सब जो सेना की इन बातों को नहीं समझते वही यह सब अनर्गल चर्चा करते हैं ।वास्तव में जम्मू कश्मीर पर बातचीत करने के बिंदु होने चाहिए- POK, वेस्ट पाकिस्तान से आए रिफ्यूजी, कश्मीरी हिंदू समाज, आतंक से पीड़ित लोग, धारा 370 और 35A का हुआ दुरुपयोग, गिलगित-बल्तिस्तान का वह क्षेत्र जो आज पाकिस्तान व चाइना के कब्जे में है ।जम्मू- कश्मीर के गिलगित- बल्तिस्तान में अधिकांश जनसंख्या शिया मुसलमानों की है। वह सभी पाकिस्तान विरोधी हैं। वह आज भी अपनी लड़ाई खुद लड़ रहे हैं, पर भारत उनके साथ है, ऐसा हमें उनको महसूस कराना चाहिए। देश कभी उनके साथ खड़ा नहीं हुआ। वास्तव में पूरे देश में इसकी चर्चा खुलकर होनी चाहिए ।वास्तव में जम्मू-कश्मीर के विमर्श का मुद्दा बदलना चाहिए। जम्मू कश्मीर को लेकर सारे देश में सही जानकारी देने की जरूरत है l इसके लिए एक इंफॉर्मेशन कैंपेन चलना चाहिए। पूरे देश में वर्ष में एक बार 26 अक्टूबर को जम्मू कश्मीर का विलय-दिवस के रूप में मनाना चाहिए। सबसे बड़ी बात है जम्मू कश्मीर को हमें राष्ट्रवादियों की नजर से देखना होगा। जम्मू कश्मीर की चर्चा हो तो वहां के राष्ट्रभक्तों की चर्चा होनी चाहिए। ऐसा हो तो उन 5 जिलों के कठमुल्ले तो फिर वैसे ही अपंग हो जाएंगे ।

इस जम्मू कश्मीर लेख श्रृंखला के माध्यम से मैंने आपको पूरे जम्मू कश्मीर की पृष्ठभूमि और परिस्थितियों से अवगत करवाया। मेरा मुख्य उद्देश्य सिर्फ यही है। जम्मू कश्मीर के बारे में देश के प्रत्येक नागरिक को यह सब जानकारियां होनी चाहिए ।अब आप इतने समर्थ हैं कि जम्मू कश्मीर को लेकर आप किसी से भी वाद-विवाद या तर्क-वितर्क कर सकते हैं। किसी को आप समझा सकते हैं कि वास्तव में जम्मू-कश्मीर की परिस्थितियां क्या हैं। वैसे तो जम्मू कश्मीर पर एक ग्रन्थ लिखा जा सकता है लेकिन मैंने जितना हो सका उतने संक्षिप्त रूप में इसे आपके सामने रखा है ।इस श्रृंखला को केवल जोड़ने करने से कुछ भी नहीं होगा चाहे आप पढ़कर लाइक कर रहे हों या बिना पढ़े लाइक कर रहे हों उसका कोई भी मतलब नहीं है । अगर आप इस श्रृंखला को अधिक से अधिक जनता में प्रसारित करेंगे तभी हम जम्मू कश्मीर के विमर्श का यह मुद्दा बदल सकते हैं अन्यथा नहीं। इसलिए मेरा आप सभी से यही अनुरोध है श्रृंखला को अधिक से अधिक लोगों की जानकारी में लाया जाए ताकि देश की जनता को जम्मू कश्मीर के संदर्भ में सही तथ्यों का पता लग सके।

Dr.(Capt) Sikander Rizvi
Nationalist Speaker expert on Gilgit Baltistan.Capt Rizvis family roots in Gilgit – Baltistan.

-विवेक श्रीवास्तव जी की वाल से

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