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” चीन ने मस्जिदों को या तो तोड़ डाला या उन्हें कम्युनिटी सेंटर में तब्दील कर दिया “

शिनजियांग: चीन के पश्चिमोत्तर प्रांत शिनजियांग में मुसलमानों को डिटेंशन कैंप में भेजने की खबरें कई सालों से आ रही हैं. लेकिन अब चीन अपनी छवि को चमकाने की कोशिश कर रहा है. इसी लिए उसने इंटरनेशनल मीडिया से जुड़े पत्रकारों को शिनजियांग का दौरा कराया हा, लेकिन ये कदम उसपर भारी पड़ गया. दरअसल, पत्रकरों की टीम ने चीन के उस दावे को पूरी तरह से बेपर्दा कर दिया है, जिसमें वो कहता है कि चीन में अल्पसंख्यकों को धार्मिक आजादी हासिल है. जबकि हकीकत ये है कि चीन ने अधिकतर मस्जिदों को तोड़ डाला है. और जो मस्जिदें बची भी हैं, उन्हें कम्युनिटी सेंटर में तब्दील कर डाला है.

जियामेन मस्जिद की हालत

china one muslmanकीरा शहर की जियामेन मस्जिद को ऊंची दीवारों के पीछे ढ़क दिया गया है. बाहर चीन का झंडा लगा दिया गया है. जिससे किसी को लग ही नहीं सकता कि ये इस दीवार के पीछे मस्जिद भी है. लेकिन रायटर्स के पत्रकारों ने चीन सरकार की इस कोशिश की बखिया उधेड़ दी. उन्होंने अंदर घुसकर मस्जिद में बैठी दो महिलाओं को देखा. मस्जिद के अंदर दोनों महिलाएं धार्मिक क्रियाकलाप कर रही थीं, लेकिन उनपर सर्विलांस कैमरों का पहरा था. इस बीच जब वहां तस्वीरें लेने की कोशिश की, तो सादी वर्दी में चीनी सुरक्षा बलों से जुड़े लोगों ने उन्हें रोक दिया. उन्होंने बिल्डिंग का गेट बंद कर दिया और कहा कि ये मस्जिद ही नहीं है. हालांकि एक साल पुरानी सेटेलाइट तस्वीरों मस्जिद के छोटे छोटे गुंबद दिख रहे थे.

चीन का दावा, कोई मस्जिद नहीं तोड़ी

chinaबीजिंग और शिनजियांग के अधिकारियों ने पत्रकारों से कहा कि किसी धार्मिक स्थल को नुकसान नहीं पहुंचाया। गया है. बल्कि इसकी जगह उन्होंने पुरानी मस्जिदों की जगह नई मस्जिदों को बनाया है. हालांकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने माना कि कुछ मस्जिदों को नष्ट किया गया है. लेकिन मुसलमानों को नमाज पढ़ने से नहीं रोका गया. वो अपने घरों में, मस्जिदों धार्मिक कार्यों को अंजाम दे सकते हैं. हालांकि  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ से पूछा गया कि वो पत्रकारों को घुमाकर क्या साबित करना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा कि सरकार लोगों का भरोसा जीतना चाहती है. वेबसाइट WION के मुताबिक, रायटर्स की टीम ने शिनजियांग प्रांत की सात काउंटी का दौरा किया. 12 दिनों के इस दौरे में टीम ने बताया कि चीन सरकार के दावे और हकीकत में बड़ा अंतर है, क्योंकि शिनजियांग की हकीकत ये है कि लोगों में बोलने तक की आजादी नहीं है. यहां अधिकतर मस्जिदों को ढहा दिया गया है. बता दें कि चीन वीगर मुसलमानों को अलगाववादी मानता है. और उन्हें सुधारने, शिक्षित करने के नाम पर डिटेंशन कैंपों में बंद कर देता है.

चीन वीगर मुसलमान इलाक़े में मौलवियों पर कस रहा है शिकंजा – रिपोर्ट

china muslim चीन पर वीगर मुसलमानों के उत्पीड़न, धार्मिक स्थलों को नष्ट करने के आरोप हैं. लेकिन अब वो इंटरनेशनल मीडिया में अपना नाम चमकाने की कोशिशों में लगा है. इसी कड़ी में पिछले कुछ महीनों से वो विदेशी पत्रकारों को शिनजियांग के विभिन्न इलाकों का दौरा करा रहा है. इस ग्रुप में शोधकर्ताओं, मानवाधिकार समूहों से जुड़े लोगों और शिनजियांग के पूर्व निवासियों को भी शामिल किया जाता है. ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि वो अपने पक्ष में लोगों को खड़ा कर सके.  वीगर राइट्स ग्रुप की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने शिनजियांग क्षेत्र में साल 2014 से अब तक कम से कम 630 इमाम और अन्य मुस्लिम धार्मिक हस्तियों को कैद या हिरासत में लिया है.वीगर मानवाधिकार प्रोजेक्ट (यूएचआरपी) ने ये शोध तैयार किया है और बीबीसी के साथ साझा किया है. इसमें इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि हिरासत में या उसके कुछ ही समय बाद 18 मौलवियों की मौत हो गई थी.हिरासत में लिए गए कई मौलवियों पर “चरमपंथ का प्रचार करने”, “सामाजिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए भीड़ जुटाने” जैसे गंभीर आरोप लगे थे.लेकिन, उनके रिश्तेदारों के बयानों के मुताबिक इन मौलवियों पर लगे आरोपों के पीछे असली अपराध अमूमन ये होता है कि धार्मिक उपदेश देना, प्रार्थना समूह बुलाना, या एक इमाम के तौर पर काम करना.माना जाता है कि चीन ने शिनजियांग में 10 लाख से ज़्यादा वीगर और अन्य मुसलमानों को हिरासत में लिया है.शिनजियांग उत्तर-पश्चिमी चीन का एक बड़ा इलाक़ा है जहां तुर्क मूल के मुसलमान रहते हैं.चीन पर इस इलाक़े में मानवाधिकार हनन का आरोप लगाया जाता है जिसमें ,नसबंदी और रेप शामिल है. शिनजियांग में हिरासत में लिए गए अधिकतर लोगों को “पुन:शिक्षा” शिविरों में भेज दिया जाता है. ये एक तरह के जेल जैसे शिविर हैं जहां बिना आरोपों के अनिश्चित काल तक लोगों को रखा जाता है.
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