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क्या भाजपा छोड़ रही है पंकजा मुंडे ?

pankaja-munde-dna-01-780x405नई दिल्ली: भाजपा नेता पंकजा मुंडे की ओर से फेसबुक पर लिखे गए पोस्ट के बाद कई सारे सवाल उठने लगे हैं. महाराष्ट्र में विपक्ष में बीजेपी के बैठने के बाद लिखे गए इस पोस्ट के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या महाराष्ट्र बीजेपी में सब ठीक है?  पंकजा मुंडे की ओर से फेसबुक पर लिखे गए पोस्ट में कहा गया कि भविष्य के लिए आत्मचिंतन करने की ज़रूरत है और इसका जवाब 12 दिसंबर को पिता गोपीनाथ मुंडे की जयंती पर किया जाएगा. इसके अलावा पंकजा मुंडे के ट्विटर बायो से बीजेपी का ज़िक्र भी गायब था. इससे यह कयास लगने शुरू हो गए कि क्या पंकजा मुंडे बीजेपी को अलविदा कहने वाली हैं. इन खबरों के बीच महाराष्ट्र बीजेपी प्रमुख चंद्रकांत पाटिल का रिएक्शन आया है. महाराष्ट्र भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल से जब यह पूछा गया कि क्या पंकजा मुंडे बीजेपी छोड़कर शिवसेना  में शामिल हो रही हैं? जवाब में उन्होंने इन खबरों को बेबुनियाद बताया. उन्होंने कहा कि इन रिपोर्टों और अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है. बता दें इससे पहले शिवसेना नेता संजय राउत यह कह चुके हैं कि बीजेपी के कई नेता हमारी पार्टी के संपर्क में हैं.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में चचेरे भाई के हाथों परली विधानसभा सीट चुनाव हारने के पीछे भितरघात की आशंकाओं के बाद से पंकजा मुंडे बीजेपी से नाराज बताई जाती हैं। सोमवार को उन्होंने ट्विटर प्रोफाइल से ‘बीजेपी’ का टैग हटा दिया और रविवार को लिखे एक फेसबुक पोस्ट से इस बात के संकेत मिले हैं। वहीं शिवसेना नेता संजय राउत से जब पूछा गया कि क्या पूर्व बीजेपी मंत्री पंकजा मुंडे शिवसेना में शामिल होने के लिए तैयार हैं? राउत ने इसका जवाब देते हुए कहा कि हमारे संपर्क में अन्य कई नेता हैं।वहीं शिवसेना के विधायक अब्दुल सत्तार ने कहा कि 12 दिसंबर को पंकजा मुंडे तय करेगी कि वह आगे कहां जाएंगी। अगर वह शिवसेना में शामिल होती हैं, तो हम खुशी से उनका स्वागत करेंगे। स्वर्गीय गोपीनाथ जी और बालासाहेब जी के बीच काफी अच्छे संबंध थे।

महाराष्ट्र भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने सोमवार को कहा कि वह पार्टी छोड़ नहीं रही हैं। पाटिल ने यहां पत्रकारों से कहा, ” भाजपा के नेता, पंकजा मुंडे से संपर्क में हैं। वह हार के बाद आत्मनिरीक्षण कर रही हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह भाजपा छोड़ रही हैं। उन्होंने शिवसेना नेता संजय राउत के इस दावे को खारिज किया कि कई नेता उद्धव ठाकरे नीत पार्टी में शामिल होने के लिए उत्सुक हैं। पाटिल ने कहा, ” महाराष्ट्र में दुर्घटनावश बनी सरकार निराधार खबरें फैला रही है। उनके ठाकरे परिवार से अच्छे पारिवारिक रिश्ते हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वह शिवसेना में शामिल होने जा रही हैं।महाराष्ट्र की पिछली देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री रह चुकीं पंकजा ने पिता गोपीनाथ मुंडे की जयंती 12 दिसंबर को समर्थकों की एक बैठक बुलाई है, जिसमें वह कोई बड़ा फैसला ले सकती हैं। समर्थकों का आरोप है कि ओबीसी वर्ग और पार्टी में नेतृत्व खत्म करने के लिए भाजपा के कुछ नेताओं ने ही पंकजा को चुनाव में हराया।

एनसीपी नेता और चचेरे भाई धनंजय मुंडे के हाथ मराठवाड़ा की परली विधानसभा सीट से चुनाव हारने के बाद से पंकजा भाजपा की गतिविधियों में पहले की तरह हाल-फिलहाल सक्रिय नहीं दिख रहीं। पंकजा ने रविवार को एक फेसबुक पोस्ट लिखकर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। मराठी में लिखे इस पोस्ट मे उन्होंने कहा है, “बदले राजनीतिक माहौल को देखते हुए यह सोचने की जरूरत है कि आगे क्या किया जाए? अपनी शक्ति पहचानने की जरूरत है। मुझे स्वयं से बात करने के लिए  8-10 दिनों की जरूरत है।”पंकजा मुंडे ने अपने समर्थकों से 12 दिसंबर को गोपीनाथ मुंडे की जयंती पर बीड के गोपीनाथगढ़ में आयोजित बैठक में पहुंचने की अपील की है। माना जा रहा है कि पंकजा मुंडे इस बैठक के जरिए शक्ति प्रदर्शन करना चाहती हैं। अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर वह कोई घोषणा भी कर सकती हैं।

गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने ट्वीट कर आशा जताई थी कि राज्य का भविष्य उज्ज्वल होगा। बीजेपी के अंदरखाने इसे पंकजा मुंडे की दबाव की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि ओबीसी का प्रमुख चेहरा होने के कारण वह पाटीर् में कोई बड़ी भूमिका चाहती हैं। सूत्र बताते हैं कि 2014 में मोदी-शाह की पसंद से मुख्यमंत्री बनने के बाद भाजपा में देवेंद्र फडणवीस के बेहद मजबूत होने पर जिन स्थानीय नेताओं में असंतोष पनपा, उनमें पंकजा भी एक हैं। ट्विटर प्रोफाइल से भाजपा का टैग हटाने और फेसबुक पोस्ट से असंतोष जताने के बाद माना जा रहा है कि पंकजा मुंडे राजनीति की नई राह चुनने पर विचार कर रही हैं।

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