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बगदादी का खौफनाक ख्वाब!

तपते रेगिस्तान में लहराता काला झंड़ा आज खौफ की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है. चंद सालों में ही लाखों मासूमों के लिए कफन बन चुका ये झंडा आतंकवाद के एक ऐसे प्रतीक के तौर पर उभरा है जिसे अब दुनिया अबूबक्र अल बगदादी के नाम से पहचानती है. दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी ओसामा बिन लादेन से भी ज्यादा खतरनाक और अफीक्रा के आतंकवादी संगठन बोको हराम से भी ज्यादा खूंखार उसके संगठन इस्लामिक स्टेट ने आज पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. हजारों लोगों की मौत का जिम्मेदार अबूबक्र बगदादी पिछले करीब एक दशक से इराक की जमीन पर अपने नापाक मसूंबों को अंजाम देने में जुटा है लेकिन पिछले दिनों जब उसने पेरिस में आतंकवादी साजिश को अंजाम दिया तो एक बार फिर उसका चेहरा दुनिया भर के कैमरों पर चमक उठा.

यूं तो बगदादी दुनिया की नजरों से छुप कर रहता है उसे आखिरी बार सार्वजनिक तौर पर इराक की एक मस्जिद में देखा गया था. लेकिन बंदूक हाथों में लहराते उसके ये खूंखार और खतरनाक लड़ाके इराक और सीरिया में सरेआम अपने आतंक का राज चला रहे हैं. दुनिया का नंबर वन दुश्मन बन चुके बगदादी ने एक ऐसी दुनिया बनाने का ऐलान किया है जहां मौत और जुल्मो- सितम के सिवाय और कुछ नहीं होगा. इराक और सीरिया में बगदादी आज मौत का दूसरा नाम बन चुका है. उसके लोग जहां  औरतों की मंडी में सरेआम बोली लगा रहे हैं वहीं मासूम बच्चों के हाथो में खतरनाक हथियार भी थमा रहे हैं और इसीलिए बगदादी के इन काले कारनामों के किस्से पूरी दुनिया में मीडिया की सुर्खिया बन रहे हैं.

व्यक्ति विशेष में  हम आपको बताएंगे अबूबक्र बगदादी की पूरी और काली दास्तान. साथ ही आपको ये भी बताएंगे की आंतकवादी संगठन आईएस के दिल में क्या है और कैसे बगदादी बन गया उसका सबसे बड़ा शैतान. और इसी के साथ पड़ताल इस बात की भी करेंगे कि दुनिया के एक हिस्से में कैसे बगदादी के जुल्म छोड़ रहे हैं तबाही और बर्बादी के निशान. बराक ओबामा ने 2011 में कहा था कि अमेरिका की सेना इस साल के आखिरी तक इराक से वापस लौट जाएगी.राष्ट्रपति बराक ओबामा के इस ऐलान के बाद अमेरिकी सेना इराक से वापस अपने वतन लौट आई थी लेकिन इराक में आठ साल लंबे खूनी संघर्ष के बाद जैसे ही 2011 में अमेरिकी सेना ने इराक छोड़ा था उसके कुछ महीनों बाद ही यहां आईएस यानी इस्लामिक स्टेट का नाम गूंजने लगा था. खास बात ये है कि चार साल पहले आईएस को एक छोटा आतंकी संगठन भर माना जाता था और इसीलिए उसके चीफ अबूबक्र बगदादी को ना तो अमेरिका और ना ही इराक सरकार ने संजीदगी से लिया था.

हांलाकि 38 साल का बगदादी, इराक के सुन्नी ट्रायबल कबीलों के साथ मिल कर इराक की शिया सरकार के खिलाफ लगातार हमले बोल रहा था बावजूद इसके अमेरिका ने बगदादी पर रखा दस लाख डालर का ईनाम भी घटा कर आधा कर दिया था क्योंकि बगदादी को उसके गॉडफादर और आईएस के पूर्व प्रमुख अबू मुसाब अल जरकावी से कम खतरनाक माना जा रहा था. इराक में बगदादी की पहचान एक एक लड़ाके की बजाए एक धार्मिक नेता के तौर पर ज्यादा होती थी. लेकिन आईएस का प्रमुख बनने के बाद अबूबक्र बगदादी ने क्रूरता के मामले में अलकायदा और बोकोहराम जैसे खूंखार आतंकवादी संगठनों को भी काफी पीछे छोड़ दिया. साल 2014 में जब आईएस ने इराक के दूसरे सबसे अहम शहर मोसुल पर कब्जा जमाया तो अबूबक्र बगदादी पहली बार सार्वजनिक तौर पर एक काले रंग की एसयूवी में बैठ कर शहर की सबसे बड़ी मस्जिद में पहुंचा. मोसुल की नूरी मस्जिद में बगदादी ने खुद को खलीफा घोषित किया और इसी के साथ इराक और सीरिया में उसने इस्लामिक राज कायम करने का ऐलान भी कर दिया था.

मध्य पूर्व मामलों के जानकार कमर आगा बताते हैं कि बगदादी को मैं समझता हूं किसी दूसरे के साथ कंपेयर नहीं करना चाहिए ये अबु मुसफ अलजरखाबी की तरह का एक लीडर है उसका भी ये था कि बहुत ब्रूट था और बूरी तरह से औऱ सख्त तरीके से अपने निजाम को लगाता था और मर्डर करता था ये एक माडर्न था जो सबसे पहले मुल्ला उमर ने इसको इंप्लिमेंट किया था वहां इसके ऊपर अफगानिस्तान में तो य़े बेसिक्ली वही माडल है थोड़ा सा फर्क औऱ चेंज यही नजर आता है कि कहीं थोड़ा ज्यादा स्ट्रांग लीडर आ जाता है और ज्यादा सख्ती से इंप्लिमेंट करता है कुछ थोड़ा कम चाहें अल शबाब को ले लें या फिर बोको हराम को ले वहां पर उनके जो लीडर्स हैं वो भी बिल्कुल इसी तरीके से आपरेट करना एक दिन में कई कई सौ लोगों को मार देना.

इराक में पांच साल पहले तक आईएस छोटे- मोटे आतंकी हमले करने तक ही सीमित था. दरअसल सीरिया और इराक में आईएस और अबूबक्र बगदादी के उभार की जड़े 2003 के इराक युद्ध और अफगानिस्तान पर अमेरिका के हमलें से जुड़ी हुई है अमेरिका और बगदादी के इस कनेक्शन के इतिहास में भी हम उतरेंगे आगे. लेकिन पहले बाद अबूब्रक बगदादी की. जिसने अपनी क्रूरता से इराक और सीरिया में कहर बरपा रखा है. उसके संगठन आईएस ने उपनिवेशी दौर में इराक और सीरिया के बीच खींची गई सौ साल पुरानी सरहद को भी मिटाकर रख दिया है. आज इराक और सीरिया के काफी बड़े हिस्से पर आईएस का कब्जा हो चुका है. बगदादी और आईएस के जुल्म किस कदर बढ़ चुके है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके खौफ ने सीरिया के करीब 65 लाख लोगों को बेघर कर दिया है. करीब 30 लाख लोग सीरिया छोड़ कर आस-पास के मुल्कों में शरण ले चुके हैं. सीरिया और इराक की दिल दहला देने वाली तस्वीरे यहां के उस भयानक हालात का दस्तावेज बन गई जो आतंकवादी संगठन आईएस ने इस देश में अपनी क्रूरता से पैदा किए है.

मध्य पूर्व मामलों के जानकार कमर आगा बताते हैं कि इस्लाम के नाम पर ये ट्राईबिज्म को इंप्लिमेंट कर रहै हैं औऱ ये पहली बार नहीं हो रहा है मुस्लिम देशों में ये पहले भी बहुत बार हो चुका है. लाइब्रेरी भी जलाई गई हैं लोगों को मारा गया है औरतों को बंदी बनाया गया है उनको बेचा गया है मार्केट में लाकर मिडीवल अर्ली मीडिवल पीरियड से हम देखते चले आ रहें हैं तो इस्लाम के नाम पर ये पहली बार नहीं हो रहा है. ये एक टेंडेंसी है. प्रॉब्लम ये है समस्या ये है कि इनके पास बहुत सफेस्टिकेटेड हथियार हैं टैंक्स हैं और राकेट हैं और कई सारे हथियारों से लैस हैं इराक को और सीरिया में जो मिले हैं टेक्नोलाजी है और आईटी का इस्तेमाल कर रहें हैं तो ये औऱ खतरनाक हो गए हैं.

इस्लामिक स्टेट ने अपना दायरा बढाते हुए पिछले दो हफ्तो में इराक और सीरिया से बाहर पेरिस और बेरुत पर भी आतंकावादी हमला बोला था. आईएस ने रुस के उस जहाज को भी गिराने का दावा किया जिसमें 224 लोग मारे गए थे. आईएस के आतंकावादियों ने बेरुत में करीब 43 और पेरिस में करीब 129 लोगों की जान ले ली. और इन घटनाओं के बाद पूरी दुनिया में ये सवाल शिद्दत से गूंज उठे हैं कि आखिर कौन है अबूबक्र बगदादी और क्या है उसका संगठन आईएसआएस और ये चाहता क्या है? इन दोनों सवालों के जवाबों की गहराई से पड़ताल भी हम करेंगे आगे और आपको बताएंगे अबूबक्र बगदादी और उसके इस्लामिक स्टेट की पूरी एक्सरे रिपोर्ट. लेकिन उससे पहले ये जान लीजिए कि खुद को खलीफा कहने वाला अबूबक्र बगदादी इराक और सीरिया में जिस खलीफा राज यानी इस्लामिक स्टेट को स्थापित करने का ऐलान कर रहा है उस खलीफा राज का कॉन्सेप्ट आया कहां से और ये भी समझ लीजिए की ये खलीफा राज आखिर होता क्या है?

मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना अतहर दहेलवी बताते हैं कि खिलाफत का कांसेप्ट और खलिफा का कांसेप्ट इस्लाम में बहुत साफ है पवित्र कुरान में अल्लाह ने कहा इन्नू जायलू फिजूल ए खलिफा हमनें इंसान को मुसलमान को नहीं इंसान को जमीन पर खलिफा बनाया है नाईब बनाया है. ताकि संपूर्ण सृष्टि और कायनात की वो देखभाल कर सके उसका सरंक्षण कर सके विकास कर सके ये खिलाफत का बुनियादी मूल ये कारण था पैगम्बर साहब ने कभी अपने आप को राजा और खलिफा नहीं कहा वो कहते थे कि मैं इस दुनिया में आया हूं लोगों के रिफॉर्म के लिए बंदे और खुदा को मिलाने के लिए उनके इंतकाल के बाद खिलाफत शुरु हुई. जैसा कि मैंने कहा नाईब के हैसियत से खिलाफत शुरु हुई और इस खिलाफत में जो बुनियाद थे वो ये थे कि आप जनता तक कैसे पहुंचेगें पॉलिसी के तरीके और रिफॉर्म क्या होगा?

इस्लाम धर्म के संस्थापक पैंगबर मुहम्मद साहब सऊदी अरब के मक्का शहर के रहने वाले थे. पैगंबर मोहम्मद बाद में मदीना शहर में बस गए थे. पैंगबर मुहम्मद की जिंदगी में ही जब मुसलमानों ने मक्का और मदीना जीता तो यहां पर इस्लामिक राज कायम किया गया था. जिसका प्रशासन शरीयत यानी इस्लामिक कानून के हिसाब से चलाया जाता था. पैंगबर मोहम्मद के बाद खलीफा राज या खिलाफत के दौर की शुरुआत हुई थी जिसमें इस्लामिक स्टेट के प्रमुख को खलीफा कहा गया. इस्लाम धर्म में कुल चार खलीफा मुख्य माने जाते है जिनमें पहले हजरत अबूबक्र सिद्दीक, दूसरे हजरत उमर, उनके बाद हजरत उस्मान गनी और हजरत अली का नाम शामिल है. सऊदी अरब में इस्लामिक राज स्थापित होने के बाद शुरु में खलीफा मक्का, मदीना में रहे. लेकिन इसके बाद जब इस्लामिक स्टेट का दायरा कुछ दूसरे अरब देशों जैसे यमन, ईरान, इराक और सीरिया तक फैल गया तो इस्लामिक स्टेट का एक केंद्र सीरिया की राजधानी दमिश्क भी बन गया था.

जामिया मिलिया इस्लामिया के लेक्चरर मकसूद अहमद कासमी बताते हैं कि उस जमाने में ये प्रोफेट का देश था जो अरब में था प्रोवेटके बाद मक्का मदीने में ही खलीफा रहे जितना इनरके इलाके साथ अरवियन कंट्री थी फिर प्रोवेट ने अपनी वफाज में बताया कुछ इलाके सीरिया में खिलाफत आयेगी इसके बाद अबूबकर उमर ने इसे वहां तक बढ़ाया लेकिन उसके बाद इसको आगे बढ़ाने का प्रोवेंड ने नही बताया और न कोई उसके आगे जाने की हिम्मत कर सकता है अगर वहां कि मेजोरिटी के लोग  इस्लामिक हुकूमत चाहते हैं बना सकते हैं सिर्फ इतना है लेकिन जबरजस्ती कहीं भी जायज नहीं है और इस्लाम का पूरा सिस्टम और कुरान में कहा गया वो अम्ल उल सुरा बिम आपस के मामले आपस से मशविरे से मशविरे से जो तय होता है उसी को किया जाता है. यही ड़ेमोक्रेटिक प्रोसीजर है यही ड़ेमोक्रेटिक जमूरी तरीका है.

करीब 14 सौ साल पहले सऊदी अरब में खलीफा राज या इस्लामिक राज कायम किया गया था. जिसे अब अबूब्रक बगदादी दोबारा स्थापित करना चाहता है. बगदादी खुद खलीफा बन कर अपने उस इस्लामिक स्टेट पर हुकूमत करना चाहता है जिसको बनाने के लिए वो सरेआम कत्लेआम कर रहा है, जिस इस्लामिक स्टेट के लिए उसका संगठन क्रूरता की सारी सीमाएं पार कर रहा है. बगदादी का उसका आतंकी संगठन आईएस आज इराक और सीरिया के एक बड़े हिस्से पर काबिज हो चुका है. खास बात ये है कि अबूबक्र बगदादी इस्लामिक स्टेट का जो नक्शा पेश कर रहा है उसमें सीरिया, ईराक, ईरान और सऊदी अरब का कुछ हिस्सा शामिल है इस पूरे इलाके को मिलाकर बगदादी ऐसा इस्लामिक स्टेट बनाना चाहता है जिसका पूरा कंट्रोल खलीफा के हाथ में हो यानी सुप्रीम पावर हासिल करना चाहता है बगदादी.

मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना अतहर दहेलवी बताते हैं कि इस्लामी रियासत का जो कांसेप्ट था व यही था तालिम काम किया जाएगा लोगों के हूकों को पामाल नहीं किया जाएगा आपका धर्म आपके लिए मेरा धर्म मेरे लिए मैं आपकी आस्था में हस्तक्षेप नहीं करूंगा और आप मेरी आस्था में हस्तक्षेप नहीं करेंगे लाइकराहाफिद्दिन जो जबरदस्ती की बातें होती है धर्मांतऱण और धर्म बदलना कुरान से बढ़कर कौन हो सकता है दीन में आप जबरदस्ती मत कीजिए पैगम्बर के जो करीबी रिश्तेदार थें. उन्होंने इस्लाम नहीं कबूल किया. पैगम्बर क्या चाहते थे वो लेकिन खुदा ने कहा लाइकराहाफिद्दिन अगर नहीं चाहते तो छोड़ दीजिए आप उसके हाल पर. लेकिन बगदादी जो कर रहा है यजिदियों के साथ शियों के साथ जो कुछ किया सूफी लोगों के साथ जो कुछ किया औरतों की मंडियां लगा रहें है ये इस्लाम नहीं है केवल और केवल फिसादात है जो वो कर रहे हैं.

जामिया मिलिया इस्लामिया के लेक्चरर मकसूद अहमद कासमी बताते हैं कि उस जमाने में अबू बकर उमर उस्मान अलीके जमाने में जो गैर मुस्लिम थे उनके साथ इंसाफ का और अद्ल का मामला किया गया उनके हिफाजत की स्टेट जिम्मेदारी ने ली और उनको उनके धर्म के अनुसार चलने की  उनको पूरी आजादी दी गयी उनको मुसलमान नहीं बनाया गया आईएसआईएस का जो प्लान है. वो बिल्कुल अलग है ये गैर मुस्लिम औरतों को यजीदी औरतों को इन्होंने पकड़ कर बेंचा  उनके साथ और उनकी इज्जतें लूटी गयी ये इस्लाम में कहीं नही मिलती ये फसादी लोग हैं और ऐसे लोगों का दुनिया में रहना मुसीबत और अजाब के अलावा कुछ नही है.

जाहिर है अबू बक्र बगदादी इराक और सीरिया के आस – पास के पूरे इलाकों पर कब्जा जमा कर अपना कथित इस्लामिक स्टेट कायम करना चाहता है. लेकिन अब बारी है सवाल नंबर दो की पड़ताल करने की. कि आखिर ये बगदादी और उसका संगठन आईएस आया कहां से हैं और ये कैसे काम करता है?

भारत से करीब 4 हजार 2 सौ किलोमीटर दूर मेडीटेरियन समुद्र के किनारे इराक और सीरिया देश बसे है. इराक की राजधानी बगदाद और सीरिया की राजधानी दमिश्क है जो पुराने वक्त से ही मशहूर शहर रहे हैं. लेकिन इराक और सीरिया के कई शहर इन दिनों खंडहरों में तब्दील हो चुके हैं. इन दोनों देशों के करीब आधे इलाकों पर आतंकवादी संगठन आईएस का कब्जा हो चुका है. लाल रंग के जो निसान इन दोनों देशों के नक्शे पर नजर आ रहे हैं इन पर अबूबक्र बगदादी के संगठन आईएस का कब्जा है. इन इलाकों में मौजूद तेल और गैस के कुओं से बगदादी लगातार अपनी तिजोरी भर रहा है और इसीलिए आईएस एक ताकतवर संगठन के तौर पर उभरा है. ईराक में मलिक अल नूरी की शिया बहुमत वाली सरकार है तो वही सीरिया के राष्ट्रपति बसर अल असद है जिनकी सेनाएं लगातार बगदादी और उसके आतंकी सगंठन आईएस के हमलों से जूझ रही हैं.

सीरिया के शहर कोबेन बदतर हो चुके हालात साफ बयान कर रही हैं. आईएस की दरिंदगी की वजह से पिछले पांच सालों में करीब 60 लाख सीरीयाई देश छोड़ चुके है. सीरिया में पलायन की ये समस्या ही आईएस के खौफ को बयान करने के लिए काफी है. आखिर महज चार साल में ISIS दुनिया के लिए इतना बड़ा खतरा कैसे बन गया ये समझने से पहले मध्य पूर्व के देशों की भौगोलिक और राजनीतिक स्थिती पर नजर डालना भी जरुरी है.भारत से करीब 4 हजार 2 सौ किलोमीटर दूर मेडीटेरियन समुद्र के किनारे सीरिया बसा है. सीरिया के एक तरफ समंदर है तो दूसरी तरफ इसकी सीमाएं लेबनान, इजराइल, जॉर्डन, इराक और टर्की के साथ लगी हुई है. यही वजह है कि भौगोलिक तौर पर सीरिया बेहद अहम देश माना जाता है लेकिन लीबिया, सीरिया और इराक में छिड़े गृहयुद्ध से यहां के लोग अपना देश छोड़ कर यूरोप के देशों मे जा रहे है. मध्यपूर्व और अफ्रीका के देशो से पलायन दो रास्तों से सबसे ज्यादा हो रहा है. पहला रास्ता है ग्रीस का. अवैध तरीके से यूरोप में घुसने के लिए शरणार्थी मेडीटेरियन समंदर को पार करके पहले ग्रीस पहुंच रहे हैं. और फिर यहां से आगे हंगरी, ऑस्ट्रिया होते हुए जर्मनी और फ्रांस में जाकर शरण लेने की कोशिश कर रहे हैं. अफ्रीकी देश लीबिया से भी बड़ी तादाद में यूरोप की तरफ पलायन हो रहा है अलजीरिया, मोरक्को से होते हुए स्पेन, फ्रांस और जर्मनी तक पलायन का ये दूसरा रास्ता जा रहा है. खास बात ये है कि शरणार्थी को अवैध तरीके से यूरोपीय देशों में घुसने के लिए लंबा और जोखिम भरे सफर से गुजरना पड़ता है लेकिन इन शरणार्थियों के लिए इराक और सीरिया में हालात भयानक बने हुए है जहां खूंखार आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी आईएसआईएस के हमले जारी है.

वरिष्ठ पत्रकार कमर आगा बताते हैं कि सीरिया इराक यमन और बहुत से ऐसे देश हैं वहां पर संभव नहीं है जीना इस वजह से माइग्रेशन शुरु हुआ वहां पर जो आंतकी संगठन है लोगों को मार रहें हैं उनकी औरतों को बंदी बना ले रहे हैं और सेक्स स्लेव की तरह रखते हैं बच्चों को जबरदस्ती कर रहें है कि वो उनके आंतकवादी संगठन को ज्वाइन करें और फोर्स करके ले आते है न वहां पर कोई नौकरियां है न कोई जाब हैं और न ही कोई सरकार हैं एक आराजकाता फैली हुई है उनको जब जी चाहता है सुबह भी हो जाता है तो मिलिटेंट आकर गोली मार देते हैं. ये सब पढ़े लिखे लोग है सीरिया में सभ्य लोग हैं तो पुराना सीविल रीलेशन का सेंटर रहा है सीरिया में औऱ फिर खिलाफत का भी दौर रहा है लगातार उसका डिवलपमेंट हुआ है अब इनकी लाइफ इतनी मुश्किल हो गई की कोई घर बार छोड़ कर नहीं जाता.

सीरिया और इराक में गृहयुद्ध के हालात है लेकिन इस समस्या की जड़ में वो आईएसआईएस संगठन है जिसमें पश्चिमी देशों के जेहादी भी शामिल है और आईएस की ये आग अब इराक और सीरिया के बाहर बाहर यूरोपीय देशों तक भी पहुंच चुकी है. लेकिन आईएस के आंतक की आग की चिंगारी उस वक्त सुलगी थी जब आंतकी संगठन अलकायदा ने साल 2001 में अमेरिका पर आतंकवादी हमला किया था.साल 2001 में जब अलकायदा ने अमेरिका पर आतंकी हमला किया था उस वक्त ISIS भी अलकायदा का ही एक हिस्सा हुआ करता था. आईएसआईएस यानी इस्लामिक स्टेट ऑफ सीरिया एंड इराक तब इराक में सक्रिय था और इसका चीफ अबु मुसाब अल जरकावी हुआ करता था. जॉर्डन के रहने वाले जरकावी ने इराक में बगावत का झंडा बुलंद कर रखा था. और इराक युद्ध के बाद वो बेहद क्रूर आंतकी हमले कर रहा था.

अमेरिकी सेना ने 2006 में इराक में आईएस का खात्मा कर दिया और उसके प्रमुख अबु मुसाब अल जरकावी को भी मार गिराया था. अमेरिकी फौज के इस मिशन में जरकावी के कई वफादार लड़ाके भी पकड़े गए थे जिनमें इराक के ही समारा शहर का रहने वाला अबूबक्र बगदादी भी शामिल था. अमेरिकी सेना ने अगले 4 सालों तक बगदादी को इराक की अबू बूक्का जेल में कैद रखा था. साल 2009 में जब बगदादी जेल से निकला तब तक इराक और अफगानिस्तान के हालात बदल चुके थे.अमेरिकी सेना दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी ओसामा बिन लादने को चप्पे– चप्पे पर तलाश रही थी. अलकायदा कमजोर पड़ रहा था लेकिन इराक और उसके आस- पास इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया यानी आईएस मजबूत हो रहा था. साल 2009 में अबूबक्र बगदादी एक बार फिर आईएस से जुड़ गया था और इसके अगले ही साल आईएस के दो टॉप कमांडरों की मौत के बाद उसे आईएस का चीफ भी बन गया था. बगदादी ने इस्लामिक स्टेट को क्रूरता की ऐसी ऊंचाई तक पहुंचाया जिसको लेकर अलकायदा जैसे आतंकी सगंठने से भी उसका अलगाव हो गया. साल 2011 में आतंकी ओसामा बिन लादेन मारा गया और अलकायदा बेहद कमजोर पड़ गया. बगदादी ने ऐसे में सीरिया के आतंकी संगठन अल नुसरा और लेवांत इलाके में काम कर रहे आतंकियों को भी अपने संगठन में मिला लिया और नए संगठन का नाम रखा गया आईएसआईएल यानी अब बगदादी बड़े इस्लामिक राष्ट्र का सपना देख रहा था जिसे लेवांत कहा जाता है.

दरअसल लेवांत का मतलब है वो भौगोलिक क्षेत्र, जिसमें साइप्रस, इज़रायल, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया और फिलिस्तीन जैसे देश आते हैं. लेकिन इराक के मौजूदा संदर्भ में इसका मुख्य तौर पर मतलब सीरिया से है. आंतकी संगठन आईएसआईएस का मुखिया बनने के बाद जिद्दी बगदादी ने बशर अल असद सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए अपने चहेते लेफ्टिनेंट को सीरिया भेजा और इसी के बाद से जहां सीरिया में भी बगदादी का दखल बढ़ गया. वहीं साल 2014 में इराक के दूसरे अहम शहर मोसुल पर आईएस के कब्जे के बाद बगदादी ने खुद को खलीफा भी घोषित कर दिया था.  वरिष्ठ पत्रकार कमर आगा बताते हैं कि ये इराक को सीरिया की बहुत ही स्ट्रेटजिक लोकेशन है यहीं पर जो अगर इसके कब्जे में है तो अरब वर्ल्ड उसके कब्जे में है पश्चिम गल्फ उसके कब्जे में हो जाएगी सबसे इंपार्टेंट देश यही दो है यहां पर फिर आगे नार्थ अफ्रिका में इजिप्ट हो जाता है लेकिन अरब ईस्ट में या फिर गल्फ के रीजन में ये सब ईजली अमेरिकन ने सबसे पहले ईराक को चुना. ईराक की बहुत सी कंट्रीज से बार्डर मिलते हैं इसी तरह सीरिया सीरिया मेडिट्रेरिएन है सीरिया से यूरोप बहुत करीब है औऱ इजराएल मिला हुआ है तो ये स्ट्रेटजिक्ली लोकेटेड कंट्रीज हैं इनको अगर आप कंट्रोल कर लीजिए औऱ दूसरी बात ये की सीरिया औऱ ईराक इस्लामिक दौरे हुकूमत में बहुत इंपार्टेंट रोल इन लोगों ने प्ले किया है जो बिल्कुल अब तबाह औऱ बर्बाद हो गए हैं. यमन सीरिया और इराक इनकता तीन का बहुत इंपार्टेंट रोल रहा है और तीन के तीन मुल्क तबाह होते चले जा रहे हैं और ये तीन सबसे इंपार्टेंट देश थे उस वक्त और मैं सभी प्वाइंट आफ व्यू से नहीं कह रहा जो दारुल खिलाफत थी इन्हीं दो देशों में थी ये बगदाद था औऱ दमिश्क था और इनकी नजरें उसी पर थी हमेंशा से.

आईएस को इराक और सीरिया में लड़ रहे जेहादी सुन्नी लड़ाकों का संगठन माना जाता है. आईएसआईएस का पूरा नाम इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया है और ये संगठन इराक के शिया बहुसंख्यकों को खत्म कर देना चाहता है. इराकी सेना ने आईएस के जो डॉक्यूमेंट बरामद किए हैं उनसे ये पता चला है कि आईएस में बड़े पदों पर वो लीडर है जो सद्दाम हुसैन की सेना में ऑफिसर रहे हैं. सद्दाम की सेना के इन्हीं सुन्नी अफसरों ने आईएस के आतंकियों को ट्रेनिंग दी है. अगर आईएस के सिस्टम पर नजर डाले तो इसके काम करने के तौर तरीके साफ हो जाते हैं. आईएस के सिस्टम में इसका प्रमुख अबूब्रक बगदादी है जो खुद को खलीफा कहता है. बगदादी के नीचे उसके दो डिप्टी है जिनमें से एक इराक और दूसरा सीरिया के लिए जिम्मेदार होता है. बगदादी ने एक लीडर्स काउंसिल भी बना रखी है जिसमें वो लोग शामिल है जो उसके सीधे संपर्क में रहते हैं. आईएस के लीडर काउंसिल के सदस्य बगदादी को धार्मिक मामलों, आदेशों को लागू कराने और आईएस की विचारधारा को प्रचारित और लागू कराने में मदद करते हैं. इसके अलावा उसकी एक कैबिनेट भी है जिसमें उसने फायनेंस, सुरक्षा, मीडिया, जेल और भर्ती जैसे विभागों के लिए मैनेजर तैनात कर रखे हैं. इसी के साथ साथ बगदादी ने इराक और सीरिया में करीब एक दर्जन लोकल लीडर ऐसे भी तैनात कर रखे हैं जो इन दोनों देशो में तैनात उसके डिप्पी को रिपोर्ट करते हैं. इनमें से ज्यादातर वो लीडर है जो सद्दाम हुसैन की सेना में थे.

वरिष्ठ पत्रकार कमर आगा बताते हैं कि ईराक के अंदर डेमोक्रेसी के आने से हुआ ये कि वहां पर शिया की हुकूमत बनी और शिया ने वहां के ट्राइबल के जो चीफ थे इनके हाथ में सत्ता रहती थी और बेपनाह इनको दौलत मिलती थी औऱ सद्दाम के पीरियड में तेल का जो कारोबार था उसमें ये लोग शामिल थे अमेरिकन ने आकर उनकी फौज को डिस्बेंज कर दिया और इनको बरतऱफ कर दिया पावर से और सत्ता से क्योंकि ये सद्दाम हुसैन के समर्थक थे और पहले तो सद्दाम हुसैन उनसे लड़ रहे थे सद्दाम हुसैन की तरफ से अमेरिकन से लड़ रहे थे फिर बाद में ये बिल्कुल अलग होते चले गए और किसी हदतक मैं जरूर समझूंगा कि इनको ये किसी कंप्रोमाइज पर राजी नहीं थे इनका कहना था कि शिया भले इराक में मेजारिटी में हों लेकिन ये रिजन्स में हैं औऱ ये बात वो अकेले में नहीं कह रहे थे रुलर्स के साथ वो ये बात कह रहें थे. ओपन स्टेटमेंट आ रहे थे औऱ ये कह रहे थे कि हम कभी अंडर शिया गवर्नमेंट के नहीं रहेंगे.

इराक में नूरी अल मलिकी की मौजूदा शिया सरकार के खिलाफ लड़ रहे आईएस के आतंकवादियों की तादाद दो से तीन लाख के बीच बताई जाती है. इन लड़ाकों में यूरोप और मध्यपूर्व के आतंकवादी भी शामिल बताए जाते है. सद्दाम समर्थकों के सहारे साल 2011 में तेजी से उभरे चरमपंथी संगठन आईएसआईएस ने इराक के कई अहम शहरों और उसके तेल के ठिकानों पर कब्जा जमा लिया है. इराक के बाद आईएसआईएस का अगला निशाना पडोसी देश सीरिया बना. ये संगठन पूर्वी सीरिया के भी एक बड़े इलाके और उसके तेल और गैस के ठिकानों पर कब्जा जमा चुका है. खास बात ये है सीरिया में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गैस के भंडार मिले है और यही वजह है कि तेल और गैस के इस खेल ने यहां छिड़ी जंग को और ज्यादा अहम बना दिया है.

सीरिया के वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डॉ. वेल एस एच अव्वाद बताते हैं कि अभी मुल्क में उनके हाथ में 50 पर्सेंट सीरिया के अंदर है लेकिन जो लेस पापुलेटेड एरिया है. जिस जगह तेल है जिस जगह गैस है जिस जगह मान्यूमेंट है. उसके हाथ में कब्जा कर लिया था. यह नॅार्थन पार्थ आफ सीरिया है जिस पूरे पार्थ में कम से कम 70फीसदी उन्होंने कब्जा कर लिया क्योंकि तुर्की के अंदर आ रहे उनकी बंदूके आ रही सप्लाई लाईन भी है वहां पर तो इसलिए कब्जा हो गया था. थोड़ा सा अंदर बलमाहेरा की तरफ है जो हमारा हेरिटेज है और हमारा गैस और पाइपलाइन भी है वो हमारा जो सरकारी एनर्जी सपोर्ट कर रहा है वहा पर भी कब्जा कर लिया था लेकिन यह खत्म करने के लिए मैं एक चीज़ एश्योर करना चहता हूं हमारे मुल्क में हमारी अपनी सीरीयन आर्मी है पीकेके है और ईराकी आर्मी है ये तीनों सच आईएस आईएस में फाईट कर रहा है बाकी मुल्क में र्सिफ बोलने वाले लोग है.

इराक और सीरिया में जड़े जमा चुके आईएस का खौफ तस्वीरों के जरिए आपके टेलीविजन तक भी पहुंचता रहा है. पश्चिमी देशों का मानना है कि सीरिया के कई कट्टरपंथी संगठन भी छुपकर आईएस की मदद कर रहे हैं. जी 20 देशों के सम्मेलन के दौरान मीडिया से बात करते हुए रुस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने कहा है कि ‘रूस की खुफिया एजेंसियों से एक रिपोर्ट मिली है जिसके मुताबिक जी-20 के कुछ देशों सहित 40 देश आईएस को वित्तीय मदद कर रहे हैं. मैंने आईएस को वित्तीय मदद से संबंधित सूचनाएं साझा की है. यह पैसा, जैसा कि हमें पता चला है करीब 40 देशों से आता है. इसमें कुछ जी-20 के देश भी शामिल हैं. पुतिन ने कहा कि उन्होंने जी-20 देशों के अपने सहयोगियों को हवाई जहाज से ली गई पेट्रोलियम पदार्थों के ट्रेड की तस्वीरें भी दिखाई हैं.

सीरिया के वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डॉ. वेल एस एच अव्वाद बताते हैं कि 2003 में अलकायदा इराक के अंदर है नहीं. अमेरिकन इनवेजन आ गया था. उसके बाद अलकायदा शुरु हो गया था. अलकायदा शुरु किया था ये वाला रेडिकल एलीमेंट आ गया था अलनुसरा और हमारे देश में आईएस शुरु किया था. हमारा देश सेक्युलर कंट्री है. तो उसके बाद ये सारा पूरा दुनिया शुरु हो गया था. 2011 हमारे देश में शुरु किया था. लीबिया के अंदर भी अभी तक शुरु किया था जब तक आपकी पालिसी है जो यूरोपियन पॉलिसी है औऱ जो अमेरिकन पॉलिसी है. स्पोर्टेड बाय अरब कंट्री हमारा तुर्की भी हमारा नेबर है और सउदी अरब और कतर ने सारा बोर्डर खोल दिया था हमारे मु्ल्क में और ये लोग पैसा देते, बंदूक देते और कहते कि सीरिया के लिए रिजीम चेंज शुरु करे. तो पांच साल पहले सीरिया में और 2003 से पहले इराक में ये कभी हुआ नहीं. तो इसका मकसद क्या होता.

चरमपंथी संगठन आईएसआईएस इराक और सीरिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है. बेहद खतरनाक हो चुका ये चरमपंथी संगठन ऑटोमैटिक मशीनगनों, रॉकेट और टैंकों जैसे अत्यआधुनिक हथियारों से लैस है. आईएस आधुनिक संचार के साधनों और इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी का भी बखूबी इस्तेमाल कर रहा है इराक और सीरिया में अपने कब्जे वाले इलाके को आईएसआईएस ने इस्लामिक स्टेट का नाम दिया है और अब इस आतंकी संगठन का नाम भी बदल कर आईएस रखा जा चुका है. अखबार, लांस एजिलंस टाइम ने एक साल पहले अमेरिकी खुफिया एंजेसी के हवाले से आईएस की ताकत का अंदाजा पेश किया था. लॉस एंजिलिस टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2014 में करीब 10 हजार लड़ाकों के आईएस में शामिल होने का अनुमान था. लेकिन ये तादाद 20 हजार से 35 हजार के बीच हो सकती है. इसमें से करीब दो हजार आतंकवादी विदेशी मूल के हैं यानी इराक और सीरिय़ा से इनका कोई नाता नहीं हैं लेकिन साल भर में आईएस की शक्ल बड़े दैत्य में तब्दील हो चुकी है. जाहिर है आईएस पूरी दुनिया में इंटरनेट के माध्यम से अपना प्रचार तंत्र खड़ा कर चुका है. वो लगातार दुनिया के कई देशों से अपने संगठन के लिए भर्तिया कर रहा है. इसी साल फरवरी में आई यूएस टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक – आईएस हर महीने 1 हजार नए लड़के भर्ती कर रहा है और इस संगठन ने अब तक करीब बीस हजार विदेशी युवाओं को अपना आंतकी बना लिया है. ये अमेरिका के चौदह हजार विदेशी मूल के आईएस आंतकियों के अनुमान से कहीं ज्यादा है.

सीरिया के वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डॉ. वेल एस एच अव्वाद बताते हैं कि ये तो अमेरिकन ने वहां पर अलकायदा शुरु किया था वहां पर जेहादी कल्चर में जो उन्होंने अफगानिस्तान शुरु किया था. तो वहां पर शुरु किया था उनके साथ में वो सारे लीडर है वहां पर अलकायादा वाले लोग हैं लेकिन आइडियोलाजी डिफरेंट है. ये कह रहे हैं कि पहले हमारा अमेरिकन दुश्मन है जो शैतान है. अलकायदा. औऱ ये कह रहे हैं हमारे दुश्मन है माइनारिटी है. ये इस्लाम नहीं है ये हमारा वहाबिस्ट है. वो तो हार्ड लाइन है ये हमारा मुसलमान लोग नहीं है. सिर्फ मुसलमान है जो वहाबी है. और सलाफिस्ट है. सीरियन, वहाबी, हनफी कोई मानते भी नहीं है. कोई माडरेट इस्लाम है नहीं अभी वहां पर कह रहे हैं कि इस्लाम है सिर्फ हमारी है सउदी अरेबिया के अंदर वाली है जो वहाबिस्ट इस्लाम है. और बाकी मुसलमान को बिल्कुल एकसेप्ट नहीं कर रहे हैं. इनके दिमाग में ये तो पैसा है औऱ बिल्कुल एक्स्ट्रीमिस्ट है. वो तो मानते भी नहीं है हर दुनिया में हर देश में हर जगह में. जो एक्स्ट्रीमिस्ट एलीमेंट है सिर्फ वहाबिस्ट और सलाफिस्ट है.

सीरिया के एक बड़े इलाके पर आईएस का कंट्रोल बताया जाता है खास बात ये है कि सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद एक शिया मुस्लमान है लेकिन उनकी बीवी सुन्नी है. एक सुन्नी संगठन के तौर पर उभरे आईएस का सीरिया की उस सेना से मुकाबला जारी है जिसमें करीब 95 फीसदी सुन्नी मुसलमान है जाहिर है कि इराक और सीरिया में सत्ता परिवर्तन के नाम पर शिया और सुन्नी के बीच छिड़ी ये जंग अब एक नए मुकाम और एक नए मोड़ तक पहुंचती नजर आ रही है. लेकिन ये जंग महज आईएस के साथ ही नहीं है बल्कि ये उन शैतानों के खिलाफ लड़ी जा रही है जो इस्लाम के नाम पर कर रहे है हैवानों वाला काम. और इसीलिए अबूबक्र बगदादी सिर्फ मुसलमानों ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का बन गया है दुश्मन नंबर वन.

 

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