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गहलोत-पायलट खेमे में फिर से ‘शीतयुद्ध’

sachin-pilot-and-ashok-gehlot-1594661918-1594693928जयपुर. कोरोना काल में जहां जीवन बचाने की जद्दोजहद चल रही है, वहीं राजस्थान में सियासत नई करवट ले रही है. वरिष्ठ कांग्रेस विधायक हेमाराम चौधरी  के विधानसभाध्यक्ष को इस्तीफा भेजे जाने के बाद राजस्थान में फिर से सियासी भूचाल के कयास लगाए जा रहे हैं. हेमाराम चौधरी के इस्तीफे को पायलट खेमे के अंदर भभक रहे लावे की चिंगारी के रूप में देखा जा रहा है जो आने वाले दिनों में फिर से सियासी संकट की वजह बन सकता है.चौधरी के इस्तीफे को पायलट खेमे का एक बड़ा दांव माना जा रहा है. यह गहलोत कैम्प की मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है. पायलट कैम्प अब इस मुद्दे को पार्टी आलाकमान के सामने भुनाने की पूरी कोशिश करेगा और यह जताने की कोशिश करेगा कि पार्टी के वरिष्ठ सिपहसालार भी कितने पीड़ित और प्रताड़ित हैं. मामले को लेकर गहलोत कैम्प से आलाकमान द्वारा जवाब-तलब भी किया जा सकता है. आने वाले दिनों में यदि पायलट कैम्प के दूसरे कुछ विधायक भी इस तरह का कदम उठाते हैं तो गहलोत कैम्प की मुश्किलें बढ़ना तय है.

कोरोना काल में फिर खड़ा होगा बड़ा बखेड़ा?अगर हेमाराम चौधरी का इस्तीफा सोची समझी रणनीति के तहत हुआ है तो इस बार भी प्रदेश में कोरोना काल में बड़ा सियासी घमासान देखने को मिल सकता है. पिछले साल भी कोरोना संक्रमण जब तेजी से बढ़ रहा था तब बड़ा सियासी संकट खड़ा हुआ था. पायलट खेमा मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में हो रही देरी से नाराज चल रहा है. खुद पायलट ने पिछले दिनों मीडिया से बातचीत में कहा था कि अब देरी का कोई कारण नहीं है.
विपक्ष इसी तरह के मौके की तलाश
इसके बावजूद हलचल नहीं होने से आहत पायलट खेमा इस बार फिर से कोई बड़ा सियासी दांव खेल सकता है. इस बार गहलोत कैम्प के सामने संकट यह है कि कई वो विधायक भी नाराज हैं जो पिछली बार सियासी संकट में सरकार के साथ थे. दरअसल, इनमें से कई विधायकों को एडजस्ट करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन उसमें हो रही देरी से वे भी सरकार से खफा हैं. जबकि बार-बार सरकार के संकट में होने की बात कह रहा विपक्ष इसी तरह के मौके की ताक में बैठा है.

हेमाराम चौधरी के बाद अब कई और कांग्रेस विधायक भी दे सकते हैं इस्तीफा

हाल ही में विधानसभा चुनाव में बुरी हार के बाद पंजाब और राजस्थान के घटनाक्रम ने कांग्रेस पार्टी (INC) की चिंताएं बढ़ा दी हैं. कांग्रेस पार्टी को डर है कि इन दोनों प्रदेशों में विधायकों की नाराजगी को जल्द दूर नहीं किया गया, तो आगे चलकर कुछ और विधायक पार्टी से इस्तीफ़ा दे सकते हैं. पंजाब कांग्रेस में पार्टी को बहुत ज्यादा डर नहीं है, लोकिन हाल ही में हो रहे घटनाक्रम से राजस्थान में विधायकों की नाराजगी पार्टी को भारी नुकसान पहुंचा सकती है. प्रदेश के सत्तारूढ़ विधायक हेमाराम चौधरी  के इस्तीफे और चाकसू से पार्टी विधायक वेद सोलंकी के मुखर होने को पार्टी सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  सरकार पर काफी दबाव के तौर पर देख रही है. क्योंकि लगभग पिछले एक साल बीत जाने के बावजूद पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के समर्थकों को सरकार में कोई महत्वपूर्ण हिस्सेदारी नहीं मिली है. कैबिनेट मंत्रिमंडल विस्तार और दूसरी राजनीतिक नियुक्तियां नहीं हो रही हैं.

प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों को गया टाला

पिछले साल जुलाई में सियासी संकट के दौरान सचिन पायलट खेमे का साथ देने वाले एक विधायक ने बताया है कि हमें अपने क्षेत्र से जुड़े कामों को कराने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों को जानबूझकर टाला जा रहा है. फिलहाल कोई आखिर कब तक सब्र कर सकता है. विधायक हेमाराम चौधरी ने भी इसलिए इस्तीफा दिया है. लेकिन इसके बावजूद प्रदेश कांग्रेस बहुत ज्यादा फिक्रमंद नहीं है.

कांग्रेस विधायक के इस्तीफे को न बनाएं मुद्दा

कांग्रेस पार्टी के एक सीनियर नेता ने बताया है कि हेमाराम चौधरी के इस्तीफे को लेकर पार्टी को बहुत ज्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए. क्योंकि चौधरी इससे पहले भी कई बार इस्तीफा दे चुके हैं. लेकिन उन्हें मनाने की कोशिश जारी है, उम्मीद है जल्द ही वह अपना इस्तीफा वापस ले लेंगे. फिलहाल प्रदेश में बकौल उनके, राजस्थान में सब ठीक है और कांग्रेस पार्टी एकजुट है.

तीन सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट नहीं आई सामने

बता दें कि, पिछले साल जुलाई में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सटिन पायलट के बीच कुछ राजनीतिक मुद्दों पर आपस में मतभेद होने के बाद पायलट ने अपने समर्थक विधायकों के साथ बगावती तेवर अपना लिए थे. हालांकि, कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेताओं के हस्तक्षेप होने के बाद ही पायलट पार्टी के साथ खड़े नजर आए. पार्टी ने भी उनकी शिकायतों की जांच और प्रदेश में समन्वय बैठाने के लिए तीन सदस्य समिति का गठन किया था. जिसको लेकर लगभग 10 महीने बीत चुके हैं. फिर भी इस समिति की कोई रिपोर्ट नहीं आई है.

कोरोना के मामलों में बढ़ोत्तरी

प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के 10 हजार से कम नए केस आए हैं. लेकिन बीते 24 घंटे में यहां 8,398 पॉजिटिव मरीज मिले हैं, जबकि 146 लोगों की मौत हुई है. हालांकि प्रदेश में मंगलवार को कुल मौतों की संख्या 7 हजार के पार पहुंच गई है. बता दें कि राजस्थान में सबसे कम 2 मरीज जालौर में मिले हैं. यहां मंगलवार को 1,369 सैंपल की जांच की गई, जिसमें से केवल 2 ही पॉजिटिव निकले. सबसे ज्यादा संक्रमित केस 2,676 जयपुर में मिले हैं. जयपुर में संक्रमण की दर 20 फीसदी से कम रही, जबकि मौत की संख्या 35 रही. जयपुर के अलावा जोधपुर में 620 और उदयपुर 550 केस मिले हैं. राज्य में मंगलवार को कोरोना की ढाई लाख वैक्सीन भी पहुंची है. इसमें कोवैक्सीन की एक लाख और कोवीशील्ड की 1.50 लाख डोज जयपुर पहुंची हैं.

 

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