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हंदवाड़ा एनकाउंटर की कहानी…..

handwara incounter jkजम्मू और कश्मीर के हंदवाड़ा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में सेना के कर्नल, मेजर और तीन जवान शहीद हो गए. एक ओर जहां देश कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रहा तो वहीं कश्मीर में सुरक्षा बल आतंकियों के मंसूबे को नाकाम करने में जुटे हैं. इसी कड़ी में हंदवाड़ा में सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में दो आतंकियों को ढेर कर दिया. हालांकि इसमें 5 सुरक्षा कर्मी भी शहीद हो गए. सुरक्षाकर्मियों को इन आतंकियों का इनपुट 6 दिन पहले 28 अप्रैल को सबसे पहले मिला था. तभी से जवान उनके पीछे पड़े थे.आइए सिलसिलेवार ढंग से जानते हैं कैसे शुरू हुई ये मुठभेड़ और कैसे देश ने अपने 5 वीर जवानों को खोया. दरअसल, 28 अप्रैल को कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा के राजवारा के जंगलों में सुरक्षा बलों को आतंकियों के होने की जानकारी मिली. इसके बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया. और 1 मई को दिन में 3 बजे पहली बार आतंकियों से आमना-सामना हुआ.हालांकि इस दौरान आतंकी यहां से फरार हो गए और 24 घंटे बाद हंदवाड़ा में 11 नागरिकों को बंधक बनाते हुए एक घर में छिप गए. उनके मूवमेंट की ताजा जानकारी इंटेलिजेंस को मिली. इसके बाद 2 मई को मिले इनपुट के आधार पर हंदवाड़ा में घर को घेरने को लेकर ऑपरेशन शुरू किया गया.ये सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस का ज्वाइंट ऑपरेशन था.सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच 13 घंटे तक चले एनकाउंटर का रुख एक शब्द से बदल गया- अस्सलाम वालेकुम। कर्नल आशुतोष शर्मा के फोन पर किए गए कॉल का यह जवाब मिलने के बाद हंदवाड़ा के छंजमुल्ला इलाके में स्थित घर को घेरे खड़े सैनिकों और पुलिस अधिकारियों को पता चला कि उनका बहुत बड़ा नुकसान हो गया है। इसके बाद तो उनकी बंदूकों से गोली निकलने का सिलसिला आतंकियों के धूल चाटने के बाद ही रुका। 44 वर्षीय कर्नल आशुतोष शर्मा 21 राष्ट्रीय राइफल्स की बटालियन को कमांड कर रहे थे। वह कंपनी कमांडर मेजर अनुज सूद (30), नायक राजेश कुमार (29), लांस नायक दिनेश सिंह (24) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के सब इंस्पेक्टर सागीर पठान उर्फ काजी (41) के साथ शनिवार शाम 5:30 बजे के बाद उस घर में घुसे और अंदर फंसे परिवार को बाहर निकालने में सफल रहे, लेकिन खुद घिर गए। इसके बाद उनकी ओर से कोई संकेत नहीं मिल रहा था।जम्मू कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया, ”6 बजे से 10 बजे रात तक हमने उनसे और टीम के अन्य सदस्यों से संपर्क करने के सभी तरीकों के बारे में सोचा और आजमाया, लेकिन ऐसा नहीं कर पाए।”  4 घंटे बाद रात करीब 10 बजे उत्तर मिला। कर्नल के फोन पर किए गए कॉल का जवाब देते हुए उधर से कहा गया,’अस्सलाम वालेकुम।’ इसके बाद 4 घंटे से रुकी गोलीबारी दोबारा शुरू हो गई। रातभर दोनों ओर से फायरिंग होती रही। अब सुरक्षाबलों के सामने कोई वजह नहीं थी जो उन्हें रोकती। एनकाउंटर के शुरुआती घंटों में उनके हाथ बंधे हुए थे। उन्हें इंटेलिजेंस इनपुट मिला था कि घर में परिवार को बंधक बनाया गया है। सुरक्षाबलों को चिंता थी कि उस परिवार को नुकसान ना पहुंचाया जाए। इसलिए कर्नल शर्मा और उनकी टीम परिवार को बचाने अंदर गई। उस परिवार की सुरक्षा ही उनकी पहली चिंता थी। सुबह होने के बाद गोलीबारी थमी। बाद में जब सुरक्षाकर्मी घर के अंदर घुसे तो दो आतंकवादियों के शव मिले। इनमें से एक की पहचान पाकिस्तानी आतंकवादी हैदर के रूप में हुई, जोकि कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर था।

lead incounterसुरक्षा कर्मी नागरिकों को बचाने में सफल रहे

इस टीम में सेना के पांच और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान नागरिकों को बचाने के लिए इलाके में दाखिल हुए. एक अधिकारी ने कहा कि जैसे ही टीम अंदर की ओर बढ़ी, घर के एक छोर से फायरिंग शुरू हुई.अधिकारी ने बताया कि इसके बाद पाया गया कि घर में आतंकी छुपे हुए हैं और वहीं से वे फायरिंग कर रहे हैं. मुठभेड़ में 2 आतंकी ढेर गए, लेकिन हमने भी अपने जवानों को खो दिया. दो आतंकियों को हमने पहले ढेर कर दिया था, लेकिन घर में दो आतंकी और मौजूद थे जो लगातार फायरिंग कर रहे थे. इन्हीं की फायरिंग में हमने भी अपने जवानों को खोया.शहीद सुरक्षाकर्मियों में 21 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद, नायक राजेश, लांस नायक दिनेश के साथ जम्मू कश्मीर पुलिस के सब इंस्पेक्टर काजी पठान हैं. हालांकि इस पूरे मुठभेड़ में सुरक्षा कर्मी नागरिकों को बचाने में सफल रहे.

कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा, 21-राष्ट्रीय राइफल्स की कमान संभाल रहे थे. 21-राष्ट्रीय राइफल्स हंदवाड़ा इलाके में सुरक्षा करती है. शुक्रवार को जैसे Colonel-Ashutosh-Sharmaही कर्नल आशुतोष को आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली वो अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए सर्च ऑपरेशन के लिए निकल पड़े. लेकिन जिस घर में आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी दरअसल वो वहां नहीं थे.इसके बाद कर्नल आशुतोष शर्मा आतंकियों को घेरने जिस दूसरे घर में दाखिल हुए, आतंकी दरअसल वहीं थे. शनिवार दोपहर को बाहर से कमांड ले रहे ऑफिसर्स का कमांडिंग ऑफिसर से संपर्क टूट गया. आखिरकार रविवार को एक घर से सभी लोगों का शव बरामद हुआ. इसमें दो आतंकी समेत पांच सुरक्षाकर्मियों का मृत शरीर भी मौजूद था.21 राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर रहे कर्नल आशुतोष अपनी साहस और वीरता की वजह से पहले भी चर्चा में रहे हैं. उन्हें दो बार वीरता पुरस्कार से नवाजा जा चुका है. शहीद आशुतोष पिछले पांच सालों में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में अपनी जान गंवाने वाले कर्नल रैंक के पहले कमांडिंग अफसर थे.इससे पहले साल 2015 के जनवरी में कश्मीर घाटी में कर्नल एमएन राय शहीद हुए थे. इसके अलावा, उसी साल नवंबर में कर्नल संतोष महादिक भी आतंकियों के खिलाफ अभियान में शहीद हो गए थे.कर्नल आशुतोष शर्मा काफी लंबे समय से गार्ड रेजिमेंट में थे. गार्ड रेजिमेंट लंबे समय से घाटी में सेवा दे रही है. कर्नल आशुतोष शर्मा इकलौते कर्नल थे, जिन्हें कश्मीर में दो बार वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. जिसमें एक कमांडिंग ऑफिसर के रूप में उनकी बहादुरी के लिए शामिल है.शहीद आशुतोष शर्मा को कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर अपने कपड़ों में ग्रेनेड छिपाए हुए आतंकी से जवानों की जिंदगी बचाने के लिए वीरता मेडल से सम्मानित किया जा चुका है. दरअसल, एक आतंकी उनके जवानों की ओर अपने कपड़ों में ग्रेनेड लेकर बढ़ रहा था, तब शर्मा ने बहादुरी का परिचय देते हुए आतंकी को गोली मारकर अपने जवानों की जान बचाई थी.

आशुतोष शर्मा का परिवार वैसे तो उत्तर प्रदेश का रहने वाला है लेकिन फिलहाल सभी लोग जयपुर में रहते हैं

जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में रविवार को सेना और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो विदेशी आतंकी मार गिराए गए. इस एनकाउंटर में लश्कर कमांडर हैदर भी मारा गया है. हालांकि इस ऑपरेशन में दो बड़े अफसर समेत पांच जवान भी शहीद हो गए हैं. शहीदों में एक कर्नल, एक मेजर, दो सेना के जवान और एक जम्मू-कश्मीर पुलिस के सब-इंस्पेक्टर शामिल हैं. शहीद अफसर में कर्नल आशुतोष शर्मा भी शामिल हैं जो मुठभेड़ में मोर्चा संभाले हुए थे.शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा का परिवार वैसे तो उत्तर प्रदेश का रहने वाला है लेकिन फिलहाल सभी लोग जयपुर में रहते हैं. बातचीत में कर्नल आशुतोष के भाई ने कहा, बहुत गर्व की बात है कि आज हमारा भाई देश के काम आया और देश के लिए शहीद हुआ. परिवार के लिए, मां के लिए, एक भाई के लिए, एक पत्नी के लिए यह दुखद घड़ी है लेकिन इसके साथ ही यह बहुत गर्व की बात है कि भाई ने देश के लिए शहादत दी है. देश का, घर का, खानदान का, सबका नाम ऊंचा किया है.कर्नल आशुतोष के भाई ने कहा, पार्थिव शरीर जयपुर लेकर आएंगे, सेना से यही जानकारी मिली है. पैतृक परिवार बुलंदशहर का है, लेकिन हम लोग यहीं (जयपुर) पर रहते हैं. हमारी मां भी यही रहती हैं. कोरोना के समय में इतनी दूर ट्रैवल करके जाना, मां को बेटी को वहां ले जाना संभव नहीं हो पाएगा, इसलिए पार्थिव शरीर यही पर लेकर आएंगे. यहीं अंत्येष्टि करेंगे.

पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

मुठभेड़ में शहीद सुरक्ष कर्मियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धांजलि दी है. पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुये लिखा, ‘ हंदवाड़ा में शहीद हुए हमारे साहसी सैनिकों और सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि. उनकी वीरता और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा. उन्होंने अत्यंत समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा की और हमारे नागरिकों की रक्षा के लिए अथक परिश्रम किया. उनके परिवारों और दोस्तों के प्रति संवेदना.’

मारा गया पाकिस्तान का रहने वाला लश्कर का टॉप आतंकी हैदर

जम्मू-कश्मीर के आतंकियों के साथ हंदवाड़ा मुठभेड़ में भारतीय सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। पाकिस्तान का रहने वाला लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर आतंकी हैदर मारा गया है। हंदवाड़ा में सुरक्षाबलों ने हैदर के अलावा एक और आतंकी को मौत के घाट उतारा है और वह भी पाकिस्तानी बताया जा रहा है। हालांकि, उत्तरी कश्मीर में हंदवाड़ा क्षेत्र के एक गांव में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में एक कर्नल और एक मेजर समेत पांच सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजी विजय कुमार ने  बताया कि हंदवाड़ा एनकाउंटर में लश्कर का टॉप कमांडर हैदर को मार गिराया गया है। सेना ने बताया कि हालांकि इस प्रक्रिया के दौरान आतंकवादियों ने टीम पर भारी गोलीबारी की और इसके बाद हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए तथा पांच सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए। अधिकारियों ने बताया कि ऐसा माना जा रहा है कि आतंकवादी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से घुसपैठ करने वाले एक समूह को लेने के लिए हंदवाड़ा पहुंचे थे।

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