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झारखंड में भाजपा की हार, जेएमएम गठबंधन की जीत

Hemant-soren twoरांची झारखंड में हेमंत सोरेन की अगुवाई वाले झामुमो, कांग्रेस और राजद के महागठबंधन ने राज्य विधानसभा चुनावों में धमाकेदार जीत दर्ज की है। 81 सदस्यीय विधानसभा में जहां महागठबंधन ने बहुमत से ज्यादा 47 सीटें जीतीं, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा को सिर्फ 25 सीटों से ही संतोष करना पड़ा।चुनावों में भाजपा का 65 सीटें जीतने का अभियान ध्वस्त हो गया। इसी के साथ महाराष्ट्र में सत्ता से बाहर होने के बाद अब झारखंड भी भाजपा के हाथ से फिसल गया। एक साल में भाजपा ने पांच राज्यों (राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और अब झारखंड) में सत्ता गंवा दी। झारखंड के बनने के 19 साल के इतिहास में कोई भी सत्तारूढ़ पार्टी सत्ता में वापसी नहीं कर पाई है।चुनाव में मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत भाजपा के 5 मंत्री हार गए। चुनाव पूर्व सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा से पहली बार अलग होकर चुनाव लड़ने वाली ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) पार्टी को भी 2 सीटें ही मिलीं। इस बीच महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार व झामुमो प्रमुख हेमंत सोरेन पिता शिबू सोरेन से मिलने पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हेमंत को जीत की बधाई दी है। 15 नवंबर, 2000 को बिहार से अलग होकर नया राज्य बनने के बाद झारखंड में 19 साल में पांचवीं बार सोरेन परिवार को सत्ता मिलने जा रही है। हेमंत के पिता तीन बार राज्य के सीएम रहे, वहीं हेमंत दूसरी बार सीएम पद संभालेंगे। इस बीच, करारी हार के बाद रघुबर दास ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मिलकर अपना इस्तीफा सौंप दिया है।27 दिसंबर को हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. इस दौरान जेएमएम के 6, कांग्रेस के 5 और आरजेडी के कोटे से एक मंत्री शपथ लेंगे. यानी हेमंत सोरेन के साथ 12 मंत्री शपथ लेंगे. इसके अलावा कांग्रेस के खाते में स्पीकर पद जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक हेमंत सोरेन का शपथ ग्रहण समारोह मोरबड़ी ग्राउंड में आयोजित किया जा सकता है.

  • सीएम रघुवर दास समेत पांच मंत्री हारे
  • महागठबंधन को 47, भाजपा को 25 सीटों पर जीत
  • एक साल में पांचवां राज्य जहां भाजपा ने सत्ता गंवाई
  • 19 साल में पांचवीं बार सोरेन परिवार को मिलने जा रही है सत्ता

जनता की आशाओं और आकांक्षाओं पर खरा उतरना ही अब मेरा ध्येय;हेमंत सोरेन

झारखंड में पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने वाले हेमंत सोरेन राज्य में दूसरी बार सीएम बनेंगे। इससे पहले 6 महीने के लिए 2014 में भी राज्य की कमान संभाल चुके हैं। जीत के बाद वह कैसा महसूस कर रहें हैं? कैसे करेंगे वादों का पूरा? इन तमाम सवालों पर बात की हेमंत सोरेन ने।हेमंत सोरेन – आज लोकतंत्र की जीत हुई है। झारखंड के वीर शहीदों, आदरणीय गुरुजी का आर्शीवाद और जनता के स्नेह, गठबंधन के साथियों का मुझ पर भरोसे का ही यह प्रतिफल है कि आज फासीवादी ताकतों को करारी शिकस्त मिली है। जनता ने भारी जनमत से बहुत उम्मीद के साथ यह जनादेश दिया है। उन्होंने अपना काम कर दिया है। अब काम करने की बारी हमारी है। जनता की आशाओं और आकांक्षाओं पर खरा उतरना ही अब मेरा ध्येय है।जनता ने इसका विनम्र जवाब दिया है। वे पूरे चुनाव में बांटने की बात करते रहे। हम युवाओं का काम,किसानों को दाम और लोगों को उनकी जमीन के हक की लड़ाई लड़ते रहे। लड़ाई साफ दो भाग में बंटी थी। हमने खुद पर भरोसा रखा। भावनात्मक मुद्दे से चुनाव को अलग किया। मैंने कई बार पूरी राज्य की यात्रा पूरी की। बदलाव रैली के अंतिम दिन बारिश के बीच खुले मैदान में बिना पंडाल के जो सभा की उसमें किसी के उम्मीद से अधिक भीड़ आयी थी। सभी जगह हजारों लोगों की भीड़ आई। साफ संदेश था कि परिवर्तन आने को है। हमने राज्य की जनता को एक कर दिया।हर पंथ,धर्म,समुदाय, वर्ग के बीच में हमने विश्वास पाया। वोट पाया। शहर से लेकर गांव तक वोट पाया। इस जनादेश के बाद अब ऐसा कहने वालों को जवाब मिल गया। न हमने पहले किसी खास धर्म-जाति-समुदाय की राजनीति की न आगे करेंगे। ऐसा करने वाले शायद हर किसी को इसी नजर से देखते होंगे।यह सही है कि आम चुनाव में भावनात्मक मुद्दों के आधार पर नरेन्द्र मोदी चुनाव जीतने में सफल रहे थे लेकिन हर बार यह काम नहीं आता है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बहुत अंतर होता है। आपने देखा होगा कि आर्थिक मोर्चे पर सरकार की विफलता की बात अब जनता तक पहुंचने लगी। इससे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए हर हथकंडा भी अपनाया जा रहा है। लेकिन अब लोगों तक इनकी असलियत पहुंच गयी है। दिल्ली का तख्त भी बदलेगा। लेकिन अभी हमारा पहला फोकस राज्य की जनता को उनका हक दिलाना है।

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