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यदि यह खबर सच है तो पत्रकारों के लिए शर्मनाक है….

jounalsit rajeevनई दिल्ली। बीती 14 सितंबर को दिल्ली से ऑफिशल सीक्रेट ऐक्ट के तहत गिरफ्तार किए गए फ्रीलांस पत्रकार राजीव शर्मा को लेकर पुलिस ने कई खुलासे किए हैं। पुलिस ने बताया है कि राजीव भारत की सीमा रणनीति की जानकारी चीनी खुफिया तंत्र को दे रहा था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार यादव ने बताया कि पत्रकार राजीव शर्मा 2016 से 2018 तक संवेदनशील जानकारी चीनी खुफिया अधिकारियों तक पहुंचा रहा था। कई देशों में शर्मा चीनी अधिकारियों से मिलता था। पुलिस के मुताबिक, राजीव शर्मा बॉर्डर पर सेना की तैनाती और भारत की सीमा रणनीति की जानकारी भी चीनी खुफिया तंत्र को दे रहा था।

गिरफ्तार राजीव शर्मा को बीते एक साल में 40-45 लाख रुपये मिले।

journalist arrestदिल्ली पुलिस ने बताया कि चीनियों को गोपनीय सूचना देने के आरोप में गिरफ्तार राजीव शर्मा को बीते एक साल में 40-45 लाख रुपये मिले। शर्मा को प्रत्येक सूचना के बदले 1000 डॉलर मिलते थे। उन्होंने बताया कि राजीव शर्मा के पास करीब 40 साल का पत्रकारिता का अनुभव है और वो भारत के कई मीडिया संस्थानों के साथ चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में भी रक्षा मामलों पर लिखता था। राजीव 2016 में चीनी एजेंट के संपर्क में आया था। बता दें कि स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा को केंद्रीय खुफिया एजेंसी की सूचना के आधार पर 14 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से रक्षा मंत्रालय के गोपनीय दस्तावेज मिले थे।

राजीव के चीनी और नेपाली साथी भी अरेस्ट
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने शनिवार को बताया कि एक चीनी महिला और उसके नेपाली साथी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने दावा किया कि वे ‘चीनी खुफिया एजेंसी’ को संवेदनशील सूचना देने के एवज में फ्रीलांसर पत्रकार राजीव शर्मा को बड़ी राशि का भुगतान कर रहे थे। पुलिस ने बताया, ‘आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य आपत्तिजनक/संवेदनशील सामग्री बरामद की गई है।’

पत्रकारिता पर गंभीर सवाल

चीनियों को गोपनीय सूचना देने के आरोप में गिरफ्तार राजीव शर्मा को बीते एक साल में 40-45 लाख रुपये मिले। शर्मा को प्रत्येक सूचना के बदले 1000 डॉलर मिलते थे। इस खबर से दिल्ली का हर पत्रकार सन्न है। नाम न लिखने की शर्त पर प्रेस क्लब आफ इंडिया और पीआईबी के मीडिया सेंटर में आने वाले पत्रकार हैरान है क्योंकि राजीव शर्मा इन दोनों ही स्थानों पर अनेक पत्रकारों से मिला करता था। आए दिन पत्रकारिता के नाम पर यही से अपने कार्य करता रहा है। सिटन संवाददाता ने इन दोनों स्थानों पर पत्रकारों से बात की तो हर किसी ने एक ही बात कहीं यदि यह सच है तो बेहद गंभीर मामला है। पत्रकारिता के आड में किसी भी पत्रकार के राष्ट्र विरोधी कार्य को सही नहीं कहा जा सकता है। यदि राजीव पर लगे आरोप सच है तो यह पूरी पत्रकार बिरादरी के लिए शर्म की बात होगी। इस पूरे मामले की बहन छानबीन की जाए। यदि आरोप गलत हैं तो पत्रकारों को झूठे मामले में फंसाने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो और यदि यह खबर सच है तो दोषी पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई हो।

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