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कांग्रेस के इस प्लान ने बिगाड़ा बीजेपी का खेल

Modi-Rahul-collageढाई दिन की राजनीतिक नूराकुश्ती के बाद भाजपा की सभी तिकड़म फेल हो गए और कर्नाटक की सत्ता कांग्रेस-जेडीएस के हाथ आ गई. लेकिन राजनीति के इस ड्रामे पर नज़र डाले तो कांग्रेस चुनाव से लेकर मतगणना और उसके बाद की स्थिति के लिए पहले से अपना प्लान बना कर बैठी थी. जानिए कैसे दो प्लान के जरिए कांग्रेस ने ज्यादा सीटें हासिल करने वाली बीजेपी को मात दी…

प्लान- 1
चुनाव में राहुल गांधी का आक्रामक चुनाव प्रचार रहा. राहुल गांधी की युवा टीम की जिम्मेदारी रणदीप सुरजेवाला देख रहे थे. उनके अलावा प्रियंका चतुर्वेदी, सचिन पायलट, जतिन प्रसाद, जयवीर शेरगिल सब कर्नाटक के अलग-अलग जिलो में प्रचार की कमान संभाल रहे थे. लेकिन चुनाव ख़त्म होते ही राहुल गांधी ने दूसरे राज्यों में की गई गलती से सबक लेते हुए पहले ही अपना प्लान तैयार कर लिया था.
15 मई को जब सुबह मतगणना शुरू हुई, 12 बजे तक ये साफ़ होने लगा की कर्नाटक में किसी भी राजनीतिक पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा. राहुल के रणनीतिकार (ग़ुलाम नबी आज़ाद और अशोक गहलोत) बेंगलुरु में पहले से मौजूद थे. उन्होंने राहुल के प्लान-1 पर काम करना शुरू कर दिया था. यहां भाजपा जश्न मना रही थी, वहां कांग्रेस ने JDS को समर्थन देकर सारी बाज़ी पलट दी. कहा जा रहा है कि सरकार बनाने में मुख्य भूमिका सोनिया गांधी की थी. उनके कहने पर ग़ुलाम नबी आज़ाद ने देवेगौड़ा से बात की, जिसके बाद सरकार बनने का रास्ता साफ़ हुआ.

प्लान- 2
बहुमत होने के बावजूद कर्नाटक के राज्यपाल ने गोवा, मणिपुर की तर्ज़ पर एक बार फिर भाजपा को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया. अपने विधायकों को टूटने से बचाना ही कांग्रेस-जेडीएस की सबसे बड़ी चुनौती थी. एक तरफ राज्यपाल के फ़ैसले के ख़िलाफ कांग्रेस-JDS ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटकाया. देर रात तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्यपाल का फ़ैसला तो नहीं बदला, लेकिन येदुरप्पा को 48 घंटे के भीतर अपना बहुमत साबित करने का आदेश दिया. जिसके बाद भाजपा-कांग्रेस खुलकर सामने आ गईं.

भाजपा लगातार विधायक तोड़ने का काम करती रही, वही कांग्रेस येदियुरप्पा सहित कई नेताओ के ऑडियो टेप सामने लेकर आई, जिसमें बीजेपी नेता विधायकों को खुलकर पैसे और पद का लालच दे रहे थे. इस बीच कांग्रेस के विधायकों को टूटने से रोकने की ज़िम्मेदारी कर्नाटक कांग्रेस वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार को दी गई. शिवकुमार ने पहले कांग्रेस के विधायकों को अपने भाई के रिज़ॉर्ट में रखा और फिर उन्हें हैदराबाद शिफ्ट किया. ये सारी प्रक्रिया डीके शिवकुमार की निगरानी में हुई. कांग्रेस की क़िलेबंदी ने येदियुरप्पा और भाजपा को सेंध लगाने का मौक़ा ही नहीं दिया.

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