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येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा

लंबे समय से चल रहे कर्नाटक के नाटक पर  विराम लगाते हुए बीएस येदियुरप्पा ने सोमवार को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि आज ही येदियुरप्पा की सरकार बने दो साल पूरे हुए हैं। इस दौरान वह रो पड़े और कहा कि उन्होंने हमेशा अग्निपरीक्षा दी है।  सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर येदियुरप्पा विधानसभा में भाषण दे रहे थे। येदियुरप्पा ने इस दौरान कहा कि उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है।बीएस येदियुरप्पा के कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के तुरंत बाद, शिवमोग्गा जिले में उनके गृहनगर शिकारीपुरा में उनके समर्थकों ने सोमवार को सभी दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद कर दिया। समाचार एजेंसी  की रिपोर्ट के अनुसार, येदियुरप्पा के इस्तीफे से निराश उनके समर्थकों ने शिकारीपुरा में सभी दुकानें बंद कर दीं। शिकारीपुरा में पुरसभा अध्यक्ष के रूप में अपनी चुनावी राजनीति शुरू करने वाले येदियुरप्पा पहली बार 1983 में शिकारीपुरा से कर्नाटक विधानसभा के लिए चुने गए थे और उसी सीट से आठ बार जीते थे। लिंगायत समुदाय के एक प्रमुख सदस्य येदियुरप्पा को कर्नाटक भाजपा के चेहरे के रूप में जाना जाता है। ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री के रूप में उनके इस्तीफे ने उनके गढ़ में कई लोगों को परेशान किया है।अपने इस्तीफे पर अनिश्चितता और अटकलों के हफ्तों के बाद, बीएस येदियुरप्पा ने सोमवार को अपने इस्तीफे की घोषणा की और राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

yediyurappa newयेदियुरप्पा ने पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह को धन्यवाद दिया। अपनी सरकार के दो साल के कार्यकाल का रिपोर्ट सौंपते हुए येदियुरप्पा ने बुझी हुई आवाज में कहा, “आपकी अनुमति से मैंने फैसला किया है कि दोपहर के भोजन के बाद मैं राजभवन जाऊंगा और राज्यपाल को मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप दूंगा।” येदियुरप्पा ने कहा, “दुख से नहीं, बल्कि खुशी के साथ अपना इस्तीफा देने जा रहा हूं।” उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा को धन्यवाद दिया कि उन्होंने 75 साल से अधिक उम्र के होने के बावजूद उन्हें दो साल तक मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का मौका दिया।भाषण के दौरान, येदियुरप्पा ने दो साल के अपने कार्यकाल को अग्नि परीक्षा करार दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती दिनों में बिना कैबिनेट के प्रशासन चलाना था, इसके बाद विनाशकारी बाढ़ और फिर कोरोना वायरस के कहर का सामना किया।

78 वर्षीय बीएस येदियुरप्पा, भारत में एकमात्र ऐसे राजनेता साबित हो सकते हैं जो चार बार किसी राज्य के मुख्यमंत्री बने और कभी भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। पांच दशकों से अधिक लंबा उनका राजनीतिक जीवन उथलपुथल से भरा रहा।सबसे पहले 12 नवंबर 2007 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने, लेकिन महज सात दिन बाद 19 नवंबर 2007 को ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद 30 मई 2008 को दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते इस बार 4 अगस्त 2011 को इस्तीफा दिया। तीसरी बार 17 मई 2018 को मुख्यमंत्री बने और फिर महज छह दिन बाद 23 मई 2018 को इस्तीफा हो गया। चौथी बार 26 जुलाई 2019 को मुख्यमंत्री बने और ठीक दो साल बाद 26 जुलाई 2021 को इस्तीफा दे दिया।

सरकारी लिपिक से मुख्यमंत्री तक का सफर
सरकारी लिपिक से हार्डवेयर स्टोर के मालिक और चार बार के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने राजनीति की कठिर डगर को नापा है। दो वर्ष पहले कानूनी लड़ाई और हफ्तों चले राजनीतिक ड्रामे के बाद 2019 में वह सत्ता में आए थे।

15 वर्ष की उम्र में आरएसएस से जुड़ गए थे, आठ बार विधायक बने
आरएसएस के स्वयंसेवक रहे बूकनकेरे सिद्धलिंगप्पा येदियुरप्पा का जन्म 27 फरवरी 1943 को मांड्या जिले के के. आर. पेट तालुका के बूकनकेरे में हुआ था। अपने अनुयायियों में राजा हुली के नाम से विख्यात येदियुरप्पा महज 15 वर्ष की उम्र में आरएसएस से जुड़ गए और जनसंघ के साथ शिवमोगा जिले में गृह नगर शिकारीपुरा से राजनीतिक पारी की शुरुआत की। वह 1970 के दशक की शुरुआत में जनसंघ के शिकारीपुरा तालुका के प्रमुख बने।येदियुरप्पा ने शिकारीपुरा में पुरसभा अध्यक्ष के तौर पर अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत की। 1983 में ही शिकारीपुरा से वह विधानसभा में पहली बार चुने गए और फिर वहां से आठ बार विधायक बने। कर्नाटक में भाजपा के विकास का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है। वह पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष रहे, विधानसभा में विपक्ष के नेता बने, विधान परिषद् के सदस्य बने और फिर संसद के लिए भी चुने गए।

आपातकाल के दौरान जेल गए
कला में स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले येदियुरप्पा आपातकाल के दौरान जेल गए, समाज कल्याण विकास विभाग में लिपिक के पद पर काम किया, शिकारीपुरा की चावल मिल में भी लिपिक रहे और फिर शिवमोगा में उन्होंने अपनी हार्डवेयर की दुकान खोल ली। उनकी शादी मैत्रादेवी से 5 मार्च 1967 को हुई जो उस चावल मिल मालिक की बेटी थीं जहां येदियुरप्पा काम करते थे। येदियुरप्पा के दो बेटे और तीन बेटियां हैं। बड़े बेटे बी.वाई. राघवेंद्र शिवमोगा लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं।

उम्र के कारण शीर्ष पद से हटना पड़ा
दक्षिण भारत में भाजपा की पहली सरकार बनाने के मुख्य कर्ता-धर्ता येदियुरप्पा को प्रथमदृष्ट्या उम्र के कारण शीर्ष पद से हटना पड़ा। भाजपा में एक अलिखित नियम है कि 75 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को चुनाव की राजनीति से अलग कर दिया जाता है और आलाकमान ने भी 2023 में होने वाले चुनाव से पहले नये नेतृत्व के लिए रास्ता साफ किया है। उनके पद से हटने के अन्य कारणों में पार्टी के अंदर असंतोष भी है और उनके कामकाज के कथित अधिनायकवादी रवैये की शिकायत होती रही है। साथ ही प्रशासन में उनके छोटे बेटे और भाजपा उपाध्यक्ष बी वाई विजयेन्द्र के कथित हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं।

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