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कर्नाटक चुनाव क्यों है कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण

karnatak congressकर्नाटक में चुनावी अभियान चरम पर है. 12 मई को राज्य की जनता अपने जनादेश का इस्तेमाल करेगी और 15 मई को मतगणना के साथ ही राज्य की चुनावी तस्वीर भी साफ हो जाएगी. मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही माना जा रहा है जबकि जेडीएस तीसरी ताकत के रूप में अपनी सियासी किस्मत आजमा रही है. देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के लिए ये चुनाव काफी अहम है. पंजाब के बाद कर्नाटक देश में कांग्रेस का दूसरा सबसे बड़ा गढ़ बचा हुआ है. इसे जीतकर 2019 के चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी अपनी दावेदारी मजबूती से पेश कर सकेंगे. कर्नाटक में कांग्रेस की जीत या हार से क्या स्थितियां उत्पन्न होंगी. पढ़ें.

अगर जीते तो-

1. कर्नाटक मॉडल से गुजरात मॉडल को मिलेगी चुनौती

मोदी के गुजरात मॉडल के सामने कांग्रेस का कर्नाटक मॉडल अभी चुनौती है. अगर पार्टी कर्नाटक का चुनाव जीत जाती है तो इसे 2019 के चुनाव में पेश करेगी. पार्टी ने कर्नाटक में युवाओं, दलितों, महिलाओं का मुद्दा उठाया है तो धर्मनिरपेक्षता का कार्ड भी खेला है. साथ ही मंदिरों और मठो का दौरा कर राहुल गांधी ने सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड को भी आगे बढ़ाने की कोशिश की है. अगर ये प्रयोग सफल रहा तो कांग्रेस पार्टी इसे 2019 के चुनाव में भी आजमा सकती है.

2. मोदी विरोधी दलों की खेमेबंदी तेज होगी

कर्नाटक में अगर कांग्रेस जीतती है तो इससे उसके पीछे मोदी विरोधी दलों की खेमेबंदी तेज होगी. राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकारने में अभी जो दल हिचक रहे हैं उनके साथ आने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी. एनडीए के जो दल असंतुष्ट हैं जैसे शिवसेना. वह साथ आ सकती है.

3. ब्रांड मोदी के मुकाबले ब्रांड राहुल की दावेदारी मजबूती होगी

नए और आक्रामक अंदाज में कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी को गुजरात चुनाव में उतारा था. उसका फायदा भी पार्टी को मिला. कांग्रेस जीत के एकदम करीब तक पहुंच गई थी. कर्नाटक जीतने से ब्रांड राहुल ब्रांड मोदी के मुकाबले कड़ी चुनौती बनकर उभरेगा. 2014 की करारी हार के बाद से विपक्ष को मोदी के मुकाबले एक बड़े चेहरे की जरूरत थी. पिछले साल राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालकर इस चुनौती को फ्रंट से स्वीकार किया है. अब कर्नाटक चुनाव उसकी सफलता पर मुहर साबित हो सकती है. विपक्षी दलों में ये भरोसा जगेगा कि ब्रांड मोदी को चुनौती दी जा सकती है और इसमें राहुल का फेस स्वीकार्य हो सकता है.

4. 2019 के लिए मोदी सरकार के खिलाफ एजेंडा तय होगा

कर्नाटक चुनाव जीतने में अगर कांग्रेस पार्टी कामयाब रहती है तो इससे मोदी सरकार के खिलाफ 2019 का एजेंडा भी तय होगा. युवाओं के मुद्दे, बेरोजगारी, किसानों की बदहाली, दलितों-मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा आदि मुद्दों को आगे कर कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी कर्नाटक के सियासी समर में उतरे हैं अगर पार्टी यहां जीतती है तो 2019 के लिए इसी एजेंडे पर आगे बढ़ सकती है.

5. गठबंधन को लेकर सहयोगी दलों से बातचीत में कांग्रेस की स्थिति मजबूत होगी

कर्नाटक अगर कांग्रेस जीत जाती है तो इससे 2019 के लिए उसकी बार्गेनिंग पावर बढ़ेगी. देश के 5 बड़े राज्यों- बिहार, यूपी, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जहां कांग्रेस गठबंधन सहयोगियों के दम पर चुनावी दम दिखाने की तैयारी में है वहां कांग्रेस की स्थिति बहुत मजबूत नहीं है. ऐसे में कर्नाटक जीतने के बाद वहां सीटों के बंटवारे में कांग्रेस मजबूती से अपनी बात रख पाएगी.

 अगर कांग्रेस हार गई तो-

1. एक बड़ा सियासी दुर्ग हाथ से निकलेगा

कांग्रेस अगर कर्नाटक का चुनाव हार जाती है तो इससे उसका एक बड़ा सियासी दुर्ग छिन जाएगा. इसके बाद कांग्रेस के पास सिर्फ पंजाब का किला बचेगा. 2019 से पहले पार्टी के लिए ये बड़ा झटका साबित हो सकता है. इसलिए कांग्रेस किसी भी कीमत पर कर्नाटक चुनाव जीतना चाहेगी.

2. 2019 से पहले ब्रांड राहुल को बड़ा झटका लगेगा

ब्रांड मोदी के मुकाबले ब्रांड राहुल को खड़ा करने की कांग्रेस की रणनीति के लिहाज से कर्नाटक के नतीजे काफी अहम साबित होने जा रहे हैं. अगर पार्टी ये चुनाव हार जाती है तो इससे विपक्ष में फूट की संभावना बढ़ जाएगी. तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट तेजी होगी और इससे सीधा फायदा बीजेपी को पहुंचेगा.

3. कर्नाटक मॉडल फेल साबित हो जाएगा

कर्नाटक अगर कांग्रेस के हाथ से निकल जाता है तो मोदी के गुजरात मॉडल के मुकाबले कांग्रेस का कर्नाटक मॉडल कमजोर साबित होगा. कांग्रेस कर्नाटक में पिछले 5 साल से सत्ता में है. वहां के काम के दावों और नीतियों का प्रचार पार्टी ने खूब किया है. यहां तक कि पार्टी के रणनीतिकार गुजरात मॉडल के सामने अपने कर्नाटक मॉडल की चर्चा लगातार कर रहे हैं. बीजेपी का दांव जहां येदियुरप्पा से ज्यादा मोदी मैजिक पर है वहीं कांग्रेस केंद्रीय नेताओं की जगह सिद्धारमैया कार्ड पर ज्यादा निर्भर है. साथ ही राहुल गांधी के सॉफ्ट हिंदुत्व की एक और प्रयोगशाला भी कर्नाटक साबित हो रहा है. अगर ये प्रयोग सफल नहीं होता है तो पार्टी के सामने मुश्किलें बढ़ेंगी.

4. गठबंधन को लेकर बातचीत में स्थिति कमजोर होगी

कांग्रेस अगर कर्नाटक का चुनाव हार जाती है तो 2019 के लिए जिन दलों के साथ उसकी बातचीत चल रही है वहां कांग्रेस की स्थिति कमजोर होगी. वैसे भी सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी, डीएमके, आरजेडी ये सब ऐसे दल हैं जिनकी अपने-अपने राज्यों में जबरदस्त पकड़ है. कर्नाटक हारने से कांग्रेस की बार्गेनिंग कैपेसिटी कम होगी.

5. दक्षिण भारत में भी ब्रांड मोदी की चुनौती बढ़ जाएगी

मोदी मैजिक के दम पर बीजेपी ज्यादात्तर हिंदी भाषी राज्यों की सत्ता पर काबिज है लेकिन गैर हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस की स्थिति अब भी मजबूत है. 2014 के चुनाव में जब कांग्रेस 44 सीटों पर सिमट गई थी तब भी कांग्रेस को 33 सीटें दक्षिण भारत और बाकी गैर हिंदी भाषी राज्यों से ही मिली थीं. कर्नाटक में अगर कांग्रेस हार जाती है तो बीजेपी के लिए दक्षिणी राज्यों में संभावनाओं के नए द्वार खुलेंगे. तेलंगाना, हैदराबाद, तमिलनाडु, केरल जैसे कांग्रेस के मजबूत गढ़ों में बीजेपी अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुट जाएगी.

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