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कश्मीर ; गर्भवती को बचाने के लिए 100 जवानों की टीम

kashmir-armyश्रीनगर. आर्मी के खैरियत प्रोग्राम के तहत 100 जवानों ने 6 घंटे तक अभियान चलाकर बारामूला में एक गर्भवती और उसके बच्चे की जान बचाई। इस दौरान आर्मी के जवान महिला को स्ट्रैचर पर लेकर 4 फीट बर्फ में 5 किलोमीटर तक पैदल चले। महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया। महिला ने स्वस्थ बेटे को जन्म दिया है।बारामूला के उपलोना कैंप में आर्मी ने स्थानीय लोगों की समस्याएं दूर करने के लिए खैरियत प्रोग्राम शुरू किया है। इसके तहत टीम के नंबर लोगों के साथ शेयर किए गए हैं।

  • बारामूला में आर्मी की खैरियत टीम को गर्भवती और उसके बच्चे की खराब हालत की जानकारी मिली, तुरंत 3 टीमें बनाई गईं
  • एक टीम गर्भवती को दर्दपुरा गांव से बारामूला बेस कैंप लाई, दूसरी टीम ने हेलिपैड और तीसरी टीम ने रोड से बर्फ हटाई
  • खैरियत प्रोग्राम सिविलियंस की समस्याओं को दूर करने के लिए बनाया गया, टीम के नंबर स्थानीय लोगों से शेयर किए गए

इस तरह ऑपरेशन को अंजाम दिया गया

1. ‘खैरियत’ को 14 जनवरी को फोन पर जानकारी मिली
12 जनवरी से कश्मीर घाटी में भारी बर्फबारी हो रही है। इसकी वजह से सभी कस्बों और शहरों को गांवों से जोड़ने वाली सभी सड़कें बंद हो गई हैं। आर्मी प्रवक्ता के मुताबिक, बारामूला के उपलोना बेस कैंप में खैरियत टीम को 14 जनवरी को दर्दपुरा गांव के रिजवान अहमद मीर ने परेशान हालत में फोन किया। कहा कि पत्नी शमीमा को गर्भावस्था से जुड़ी गंभीर परेशानियां शुरू हो गई हैं। ऐसे में पत्नी और बच्चे, दोनों की जान खतरे में हैं। सड़क पर बर्फ जमा होने की वजह से अस्पताल जा पाना संभव नहीं है।

2. कॉल रिसीव होने के तुरंत बाद सेना ने 3 टीमें बनाईं
न्यूज एजेंसी और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उपलोना गांव में खैरियत टीम के कमांडर ने कॉल रिसीव करने के बाद बिना वक्त बर्बाद किए 100 जवानों और 25 सिविलयंस की तीन टीमें बनाईं। एक टीम मेडिकल अफसर के साथ गांव की ओर रवाना हुई। यह टीम 4 फीट बर्फ में गर्भवती को स्ट्रैचर पर लेकर उपलोना तक लाई। इस दौरान टीम 4 घंटे तक करीब 5 किलोमीटर पैदल चली। दूसरी टीम ने उपलोना स्थित हेलिपैड से बर्फ हटाने का काम शुरू किया, ताकि आपात स्थिति में महिला को हेलिकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाया जा सके। हेलिपैड पर 5 फीट तक बर्फ जमी थी। तीसरी टीम ने उपलोना से कांसीपोरा तक के एरिया से बर्फ हटाने का काम किया गया। यह सड़क जिला मुख्यालय बारामूला को जोड़ती है। आर्मी टीम चाहती थी कि एंबुलेंस के जरिए जल्द से जल्द गर्भवती को उपलोना से बारामूला जिला मुख्यालय तक पहुंचाने में परेशानी न आए।

3. जवान बर्फ हटाते रहे, एंबुलेंस आगे बढ़ती रही
आर्मी प्रवक्ता ने बताया, गर्भवती के उपलोना पहुंचने पर उसे तुरंत एंबुलेंस से आर्मी डॉक्टर की निगरानी में बारामूला जिला मुख्यालय रवाना किया गया। एंबुलेंस के आगे बढ़ने के दौरान जवान लगातार सड़क से बर्फ हटा रहे थे।

4. मुश्किल परिस्थितियों में महिला ने बेटे को जन्म दिया
प्रवक्ता के मुताबिक, बारामूला डिस्ट्रिक्ट अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि गर्भवती की हालत नाजुक है। तुरंत इलाज मुहैया कराए जाने की जरूरत है। इस दौरान किसी भी तरह की मदद मुहैया कराने के लिए आर्मी के डॉक्टर और जवान अस्पताल में ही मौजूद रहे। कुछ वक्त काफी तनाव में गुजरा और इसके बाद महिला ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। महिला और बच्चा, दोनों ही अब सुरक्षित हैं।

आर्मी ने कहा- अवाम मेरी जान, सेना और सिविलयन हमसाया हैं
टीमों के गठन का निर्देश देने वाले लेफ्टिनेंट जनरल कंवलजीत सिंह ढिल्लों ने कहा- यह देखना बेहद शानदार रहा कि जवानों ने तत्परता का परिचय दिया। उन्होंने महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मल्टीपल टीमों का गठन किया। उन्होंने कहा- “अवाम मेरी जान’ हमारा आदर्श वाक्य है। हमारा मानना है कि अवाम और आर्मी दोनों हमसाया हैं। हम एक-दूसरे का सुख और दुख बांटते हैं। समस्याओं को सुलझाते हैं और चुनौतियों से निपटते हैं। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्थानीय लोगों को आर्मी टीमों के मोबाइल नंबर शेयर किए गए हैं ताकि किसी भी स्थिति में हम मदद के लिए मौजूद रहें।

2 किमी पैदल चलकर जवानों ने बुजुर्ग की जान बचाई

कुपवाड़ा के लालपोरा में 14 जनवरी को बर्फबारी में घायल हुए 75 साल के गुलाम नबी गनी को भी जवानों ने अस्पताल में भर्ती कराया। सेना ने बताया कि आर्मी के जवान गुलाम नबी के पास दो किमी पैदल चलकर पहुंचे थे। जम्मू, लद्दाख और कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में कई दिनों से भारी बर्फबारी हो रही है। श्रीनगर में 5 सेमी बर्फ गिर चुकी है। यहां नल में पानी तक जम चुका है।

लद्दाख में बर्फबारी में फंसे 107 पर्वारोहियों को बचाया गया
वायुसेना ने लद्दाख क्षेत्र में बर्फबारी में फंसे नौ विदेशियों समेत 107 पर्वारोहियों को बचाया है। सूत्रों ने बताया कि वायुसेना को 107 पर्वतारोहियों के ऊंची चोटियों में फंसे होने का आपात संदेश मिला था। उन्हें तत्काल मदद की जरूरत थी। पर्वतारोहियों को बचाने के लिए हेलिकॉप्टराें की सहायता ली गई। सभी पर्वताराहियों को वहां से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया।

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