Pages Navigation Menu

Breaking News

अयोध्या विकास प्राधिकरण की बैठक में सर्वसम्मति से राम मंदिर का नक्शा पास

मानसून सत्र 14 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलेगा, दोनों सदन अलग-अलग समय पर चलेंगे

  7 सितंबर से चरणबद्ध तरीके से मेट्रो सेवाएं होंगी शुरू, 12 सितंबर तक सभी मेट्रो लगेंगीं चलने 

कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार के 30 साल, दिल्ली में दिखा दर्द

kashmiri pandit protestनई दिल्लीकश्मीरी पंडितों के घाटी से विस्थापन को 30 साल पूरे हो गए हैं। रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सैकड़ों कश्मीरी पंडित जुटे, जिनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे। अपने घर और संपत्ति को छोड़कर निकलने को मजबूर किए गए पंडित समुदाय के लोगों ने मूक प्रदर्शन किया और उस काले दिन के दर्द को याद किया। जम्मू-कश्मीर विचार मंच (JKVM), कश्मीर समिति दिल्ली, रूट्स इन कश्मीर (RIK) और पनुन कश्मीर की अगुआई में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनके मानविधाकारों की रक्षा होनी चाहिए क्योंकि उन्होंने सालों तक भेदभाव और सौतेले व्यवहार का सामना किया है। रूट्स इन कश्मीर के कोऑर्डिनेटर अनूप भट ने कहा, ‘हमारे समुदाय को भुला दिया गया है। हमारी संस्कृति लुप्त हो रही है। हमारा अस्तित्व खतरे में है।’ प्रदर्शन में शामिल स्कूल और कॉलेज जाने वाले बच्चों ने कविताओं और गानों के लिए विस्थापन के दर्द को बयां किया।

  • घर और संपत्ति को छोड़कर निकलने को मजबूर किए गए पंडित समुदाय के लोगों ने मूक प्रदर्शन किया
  • बड़ी संख्या में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी लिया प्रदर्शन में भाग, बयां किया अपना दर्द
  • आंखों में आंसू लिए 11 साल के नील पंडिता ने कहा, ‘मैं अपना घर देखना चाहता हूं, वहां रहना चाहता हूं

‘पीएम मोदी करें घर लौटने में मदद’
hunted-hindus-4_647_042516081859आंखों में आंसू लिए 11 साल के नील पंडिता ने कहा, ‘मैं अपना घर देखना चाहता हूं। मैं अपने घर में रहना चाहता हूं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करता हूं कि वह घर जाने में मेरी मदद करें।’ JKVM के दिलीप मट्टू ने कहा, ‘लोगों के मन में भय और असुरक्षा थी। हमें बलपूर्वक वहां से निकाल दिया गया।’ उन्होंने आगे कहा, ‘आतंकियों द्वारा नरसंहार किए जाने का खतरा था। 5 लाख से अधिक कश्मीरी पंडितों को जबरन निकाला गया। लोगों को मारा गया, महिलाओं के साथ रेप हुआ, सिर्फ इसलिए कि वे सभी हिंदू थे और उन्हें भारतीय पहचान के रूप में देखा जाता था।’

‘जिंदगी की सबसे लंबी रात थी वह भयानक रात’
वरिष्ठ बीजेपी नेता सुरिंदर अंबरदार ने कहा, ‘बलपूर्वक निष्कासन के 30 साल पूरे हो गए हैं। 19 जनवरी 1990 को हजारों हिंसक प्रदर्शनकारियों और हथियारों से लैस आतंकियों ने कश्मीर की गलियों पर कब्जा कर लिया था, जिसकी वजह से लोगों को घर छोड़कर भागना पड़ा।’ कश्मीर समिति दिल्ली के समीर चुरुंगू ने कहा, ‘वह भयानक रात हमारी जिंदगी की सबसे लंबी रात थी। भीड़ ने कश्मीर की हर सड़क पर कब्जा कर लिया था। वे पंडितों के खिलाफ नारे लगा रहे थे वे हमें उनके साथ मिल जाने, मर जाने या कश्मीर से भाग जाने के लिए कह रहे थे।’
‘कश्मीर से बाहर हो केसों की सुनवाई’
कश्मीरी पंडितों के सम्मान को वापस दिलाने और उन्हें दोबारा बसाने के लिए सरकार से ठोस प्रयास की मांग करते हुए प्रदर्शनकारी मोना पंडिता ने कहा, ‘जिन लोगों ने स्वीकार किया कि वे हत्याओं में शामिल थे उनमें से किसी को भी सजा नहीं हुई। इन केसों को कश्मीर से बाहर लाया जाए ताकि हमारे समुदाय की ओर राष्ट्र का ध्यान जाए और हमें न्याय मिले।’ कार्यक्रम का समापन मूक प्रदर्शन और भारत की एकता अखंडता को बरकरार रखने के लिए कश्मीर में जान देने वालों की याद में दिया जलाकर किया गया।

Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *