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पद प्रतिष्ठा पाने वाले मुसलमान और उनकी मुस्लिम सोच

hamid ansariनई दिल्ली। निवर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने यह कह कर एक नया विवाद खडा कर दिया कि देश के मुसलमानों में असुरक्षा की भावना है।अंसारी के इस वक्तव्य ने कई सवाल खडे कर दिए है।सबसे बडा सवाल तो यही कि देश में पद प्रतिष्ठा पाने वाले मुसलमान भी ऐसे वक्तव्य देंगे तो क्या होगा। पद प्रतिष्ठा पाने वाले मुसलमान ऐसा वक्तव्य क्यों देते हैं।पद से हटते ही क्यों मजहब और मुसलमान की बात करने लगते हैं। यदि उपराष्ट्रपति पद रहे व्यक्ति भी मुसलमान और असुरक्षा की बात करेंगे तो इसे सांप्रदायिक वक्तव्य क्यों नहीं माना जाता चाहिए। ऐसे तमाम उदाहरण है ​कि इस देश के मुसलमानों को जिनता मान सम्मान मिला हक मिला अधिकार मिले शायद इतना अधिकार सममान मुस्लिम देश में भी मुसलमानों को नहीं मिलता। तो आखिर पद प्रतिष्ठा पाने वाले अधिकांश मुस्लिम विद्धान मुस्लिम सोच की ही बात क्यों करते हैं। देश के मुसलमानों में असुरक्षा संबंधी उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान पर बीजेपी और शिवसेना नेताओं ने तीखी टिप्पणी की है. बीजेपी नेताओं ने इस बयान को पद की गरिमा के खि‍लाफ बताया है तो शिवसेना ने इससे भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि अगर उनको मुस्लिमों में असुरक्षा की भावना दिख रही थी, तो पहले ही इस्तीफा देकर जनता के बीच जाना चाहिए था.

क्यों नहीं दिया इस्तीफा

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान पर शिवसेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि अगर हामिद अंसारी जी को मुस्लिमों में बेचैनी और असुरक्षा की भावना दिखती है तो इस विषय को लेकर उन्होंने पहले ही अपने पद से इस्तीफा क्यों नहीं दे दिया. अब जब वह जा रहे हैं, तब इस तरीके का बयान दे रहे हैं. उनको पहले ही इस्तीफा देकर जनता के बीच मे जाना चाहिए. संजय राउत ने कहा कि अल्पसंख्यक मुस्लिम के लिए देश मे बहुसंख्यक हिंदुओं को गलत नजरिए से देखा जाता है. देश की पूरी मशीनरी मुस्लिमों की सुरक्षा में लगा दी गई है.

क्या कहा है हामिद अंसारी ने !

गौरतलब है कि निवर्तमान उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने एक इंटरव्यू में कहा कि देश के मुस्लिमों में बेचैनी का अहसास और असुरक्षा की भावना है. उपराष्ट्रपति के तौर पर 80 साल के अंसारी का दूसरा कार्यकाल गुरुवार को पूरा हो रहा है. उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब असहनशीलता और कथित गोरक्षकों की गुंडागर्दी की घटनाएं सामने आई हैं. हामिद अंसारी ने कहा कि उन्होंने असहनशीलता का मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कैबिनेट सहयोगियों के सामने उठाया है. उन्होंने इसे ‘परेशान करने वाला विचार’ करार दिया कि नागरिकों की भारतीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

भारत जितनी आजादी कहीं और नहीं

बीजेपी नेता गिरीराज सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया में भारत के नागरिकों से ज़्यादा कोई सुरक्षित नहीं है. उन्होंने कहा, ‘यहां कोई कुछ भी कह सकता हैं, कोई भी पत्थरबाजों का समर्थन कर सकता हैं, कोई भी अलगाववादियों का समर्थन कर सकता हैं. यहां आधी रात को आतंकियों के लिए कोर्ट खुल सकते हैं, इसलिए भारत में हिंदू और मुसलमान सभी सुरक्षित हैं. भारत जैसा देश कोई नहीं मिलेगा. भारत जैसा अभिव्यक्ति की आज़ादी वाला देश नहीं मिलेगा. भारत में जो चाहे किसी को गाली दे दे. लेकिन भारत में रहना है तो क़ानून एक ही होगा. अयोध्या पर एक क़ानून और ट्रिपल तलाक़ पर दूसरा क़ानून, भारत में ये नहीं चलेगा.

यह देश संविधान से चलता है

बीजेपी नेता साक्षी महाराज ने भी कहा कि वह हामिद अंसारी के बयान से सहमत नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘भारत में जितने मुसलमान सुरक्षित हैं, दुनिया में कहीं भी नहीं हैं. देश में जबसे मोदी जी प्रधानमंत्री बने हैं, कोई भी साम्प्रदायिक दंगा नहीं हुआ.  जबसे योगी जी मुख्यमंत्री बने हैं यूपी में भी कोई दंगा नहीं हुआ है. हालांकि पत्थर फेंकने वाले, बम फेंकने वाले आतंकवादी सुरक्षित नहीं हैं. ये दुर्भाग्य की बात है कि वे (हामिद अंसारी) तीन साल तक मौज मारते रहे, जब कुर्सी से विदाई का समय आ गया, तो उन्हें मुसलमान असुरक्षित लगने लगा है, इससे बड़ा दुर्भाग्य कुछ नहीं हो सकता है. मुझे लगता है कि वे किसी पार्टी की सदस्यता लेने वाले हैं, इसलिए इस तरह के बयान दे रहे हैं. ये देश संविधान से चलेगा न कि फ़तवों से और किसी के विचारों से चलेगा.

पद की गरिमा के अनुकूल नहीं ऐसे बयान  

 बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने भी हामिद अंसारी के बयान से असहमति जताई. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि देश के शीर्ष पद पर बैठकर इस तरह का बयान देना ठीक नहीं है. मैं उनके बयान से सहमत नहीं हूं. तीन-चार घटनाओं के आधार आकलन करना ठीक नहीं हैं. ऐसे हज़ारों उदाहरण मिल जाएंगे कि हिन्दू-मुसलमान मिलकर एक साथ रहते हैं. अगर इस तरह से आप नकारात्मक दृष्टि से देश आकलन करेंगे तो देश के साथ न्याय नहीं करेंगे. लगता है कि इस तरह के बयान करके वो भविष्य में राजनीतिक सम्भावनाओं को तलाश रहे हैं. किसी शीर्ष पद पर बैठ व्यक्ति से इस तरह के हलके बयान की उम्मीद नहीं की जा सकती है. इस तरह के बयान देना शीर्ष पद की गरिमा को गिराना है.

प्रधानमंत्री को बताई थीं चिताएं

टीवी पर इंटरव्यू में जब अंसारी से पूछा गया कि क्या उन्होंने अपनी चिंताओं से प्रधानमंत्री को अवगत कराया है, इस पर उपराष्ट्रपति ने ‘हां’ कहकर जवाब दिया. सरकार की प्रतिक्रिया पूछे जाने पर अंसारी ने कहा, ‘यूं तो हमेशा एक स्पष्टीकरण होता है और एक तर्क होता है. अब यह तय करने का मामला है कि आप स्पष्टीकरण स्वीकार करते हैं कि नहीं और आप तर्क स्वीकार करते हैं कि नहीं.’ इस इंटरव्यू में अंसारी ने भीड़ द्वारा लोगों को पीट-पीटकर मार डालने की घटनाओं, ‘घर वापसी’ और तर्कवादियों की हत्याओं का हवाला देते हुए कहा कि यह ‘भारतीय मूल्यों का बेहद कमजोर हो जाना, सामान्य तौर पर कानून लागू करा पाने में विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों की योग्यता का चरमरा जाना है और इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात किसी नागरिक की भारतीयता पर सवाल उठाया जाना है.’ यह पूछे जाने पर कि क्या वह इस बात से सहमत हैं कि मुस्लिम समुदाय में एक तरह की शंका है और जिस तरह के बयान उन लोगों के खिलाफ दिए जा रहे हैं, उससे वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, इस पर अंसारी ने कहा, हां, यह आकलन सही है, जो मैं देश के अलग-अलग हलकों से सुनता हूं. मैंने बेंगलुरु में यही बात सुनी. मैंने देश के अन्य हिस्सों में भी यह बात सुनी. मैं इस बारे में उत्तर भारत में ज्यादा सुनता हूं. बेचैनी का अहसास है और असुरक्षा की भावना घर कर रही है.

ओवैसी ने किया बयान का समर्थन

सांसद असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि हामिद अंसारी की स्पीच स्कॉलर स्पीच थी, उस पर कोई टिप्पणी करना ठीक नहीं है. उन्होंने जो कुछ कहा बिल्कुल सही है. उन्होंने कहा, आए दिन हमारे मुल्क में जो वाकयात पेश हो रहे हैं, उससे असुरक्षा की भावना पैदा नहीं हो रही है क्या? अगर कोई ट्रेन में जा रहा है बीफ नाम पर उसको जान से मार दिया जाता है. अगर किसी मुसलमान की बीवी और बच्चे टॉयलेट में जाते हैं तो उनको मार दिया जाता है. यकीनन उन्होंने इस सच्चाई को पेश किया है.’शिवसेना और बीजेपी की आलोचना पर ओवैसी का कहना है कि हामिद अंसारी साहब पिछले 2 साल में मुस्लिम कम्युनिटी को लेकर पहले भी बोले हैं, उस पर क्यों खामोश बैठे हुए थे, क्या हामिद अंसारी ने तीन तलाक पर राय नहीं दी थी. शिवसेना BJP के लोग उनकी आलोचना करके ठीक नहीं कर रहे हैं. मैं जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि वे अपनी जहालत का इजहार कर रहे हैं. पूरे इंटरव्यू को देखना चाहिए. प्रधानमंत्री ने क्या खुद नहीं कहा कि गाय के नाम पर लोगों को मारा जा रहा है, बंद करिए, तो क्या कहेंगे पराइममिस्टर को?

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