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भारत पर टिड्डी दल का सबसे खतरनाक हमला…

tidhi dalनई दिल्ली कोरोना संक्रमण के बीच किसानों की बड़ी फिक्र अब पाकिस्तान के रास्ते मालवा में घुसा टिड्डी दल है जो तेजी से मध्यप्रदेश के कई जिलों में पहुंच गया है. देश के 6 राज्यों में इसका हमला हो चुका है, कई जिलों में टिड्डी दल फसलों को प्रभावित कर रहा है. राजस्थान से पहले मध्यप्रदेश के नीमच और मंदसौर में टिड्डी दल ने हमला बोला. उन्हें भगाने कहीं डीजे बजाए गए, कहीं ढोल तो कहीं थाली दमकल की गाड़ी से केमिकल का भी छिड़काव हुआ. मंदसौर कलेक्टर मनोज पुष्प ने कहा यह जो सिस्टम बना है ईस्ट अफ्रीका और पाकिस्तान के रास्ते राजस्थान होते हुए मध्यप्रदेश में प्रवेश कर रहा है. राजस्थान के कंट्रोल रूम से बात हुई थी जिसके अनुसार अभी इनका आना लगातार जारी रहेगा, वाटर बॉडी और ग्रीनरी से आकर्षित होकर बड़ी संख्या में यह दल लगातार आ रहे हैं…हमारी एक्सपर्ट से बात हुई जिसके अनुसार इनका मूवमेंट बरसात की शुरुआत तक लगातार जारी रह सकता है.टिड्डियों के एक बड़े दल ने अप्रैल में पाकिस्तान से भारत में प्रवेश किया और ये तब से ये फसलों को चट कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि पिछले 26 सालों में भारत पर ये टिड्डी दल का सबसे खतरनाक हमला है.यह टिड्डी दल अफ्रीका के सींग से फैलकर यमन तक गया, फिर ईरान और पाकिस्तान. पाकिस्तान में कई हेक्टेयर में फैले कपास के खेतों पर हमला करने के बाद इन्होंने भारत को निशाना बनाया. एक अकेला दल एक वर्ग किलोमीटर तक के क्षेत्र में फैला हो सकता है. 8 से 15 करोड़ के करीब टिड्डियां 35,000 से ज्यादा लोगों के लिए पर्याप्त फसल को तबाह कर सकती हैं.पिछले एक साल में, टिड्डियों से प्रभावित ज्यादातर खेतों में एक तिहाई से अधिक फसल बर्बाद हो चुकी है. ये गर्मियों की फसल खाने के लिए अक्सर जून के आसपास भारत आते हैं, लेकिन इस साल ये अप्रैल में आ गए.इसने कई राज्यों की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्थाओं को खतरे में डाल दिया है और टिड्डी दल के हमले से बचने का कोई रास्ता नहीं है. कीटनाशकों से भरे ट्रकों को देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जा रहा है लेकिन इन कीटों को केवल रात में ही नष्ट किया जा सकता है जब वे पेड़ों पर आराम करते हैं.

फायर ब्रिगेड व दवाई छिड़कने वाले पंप मैदान में 
रतलाम के कई गांव में टिड्डी दल का झुंड उड़ता हुआ नजर आया. किसान परेशान थे अपने स्तर पर उन्हें भगाने की कोशिश की, वहीं प्रशासन 4 फायर ब्रिगेड, 5 दवाई छिड़कने वाले ट्रैक्टर पंप के साथ मैदान में उतरा. आगर मालवा जिले में टिड्डी दल ने रतलाम से प्रवेश किया. गुडभेली, ढाबला क्षत्री, गुदरावन गांव में बबूल, नीम, आम, संतरा  के पेड़ों पर बैठे तीन किलोमीटर लंबे और दो किलोमीटर चौड़ा टिड्डी दल बैठा था, जिसे भगाने डीजे बजा, थालियां बजीं..पम्प की मदद से मेलाथियानऔर क्लोरो पाइरिफास का छिड़काव हुआ.

टिड्डी दल ने गोभी की फसल की चौपट

आगर मालवा से टिड्डी दल उज्जैन जिले के रना हेड़ा गांव में दिखा. दिल्ली से आई टीम ने टैंकरों से उनपर दवाई का स्प्रे किया. उज्जैन से धार के कई गांवों में टिड्डी उड़ते पहुंचे किसान जब तक खेत में पहुंचे उनकी फसल वो चट कर चुके थे. राजेश पटेल के खेतों में टिड्डी दल ने हमला किया था वो बताते हैं रात में अचानक टिड्डी दल हमारे खेतों में उड़ते हुए पहुंच गया सूचना मिलते ही हम अपने खेतों को देखने पहुंच गए जब देखा तो गोभी की फसल पूरी तरह टिड्डी दल चौपट कर चुका था, 2 लाख का नुकसान हो गया.

ढोल-पटाखों से भगाया गया
धार से टिड्डी दल इंदौर के सांतेर, भिडोता, काछी बड़ोदा जैसे गांवों में फसल को नुकसान पहुंचाते हुआ आगे बढ़ा. किसानों ने अपने स्तर पर इन्हें भगाने पटाखे चलाए,थाली बजाई. लॉकडॉउन और बीज नहीं मिलने से किसान खासे परेशान हैं. ऐसे में खरगोन जिले में टिड्डी गैंग की दस्तक उनकी और मुश्किलें बढ़ाने वाला है.टिड्डी दल रतलाम, मंदसौर, बड़नगर, इंदौर देपालपुर महू से होता हुआ खरगोन जिले के बड़वाह तहसील के बलवाड़ा , थरवर ,गव्लु पंचायत में घुस गया. इसके बाद टिड्डी दल सीधे वीआईपी इलाके पहुंचा. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के जिले, पटत्तलाई, झोलियापुर, बारदा, नरेला, कोठरा ,चक्लदी जैसे गांवों में मूंग को नुकसान पहुंचाया. टिड्डियों का दल ढोल, पटाखों से आगे भागा.

35 हजार लोगों के हिस्सा का अनाज खा सकता है
मालवा-निमाड़, नर्मदा अंचल और बुंदेलखंड के बाद विंध्य क्षेत्र में भी टिड्डी घुसे, लेकिन सतना में घेराबंदी कर उनका सफाया कर दिया गया. सतना कलेक्टर अजय कटेसरिया ने कहा दो टिड्डी दल आए थे, मूंग के एरिया में नहीं गये, आम यूकिलिप्टस को टारगेट बना रहे हैं एक है एक रीवा के रास्ते निकल गया है लेकिन उसको डैमेज हुआ है.अलग-अलग राज्यों में टिड्डियों के हमले से 1 लाख 25 हजार एकड़ खेतों को नुकसान पहुंचा है. 4 करोड़ टिड्डियों का दल 35 हजार लोगों के हिस्सा का अनाज खा सकता है. मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा हमने मीटिंग की हाई अलर्ट किया, भारत सरकार ने भी हाई अलर्ट किया, फायर गाड़ियों से स्प्रे करके 70 परसेंट का सफाया कर दिया है, जिन किसानों को नुकसान हुआ है, उन्हें आरबीसी 6 (4 ) के अंतर्गत मुआवजा देकर क्षतिपूर्ति की जाएगी.

एक दिन में 100 से 200 किलोमीटर तक का सफर तय
टिडि्डयों का जीवन सामान्यतया 3 से 6 माह का होता है. नमी वाले इलाकों में ये एक बार में 20 से 200 तक अंडे देती हैं, जो 10 से 20 दिन में फूटते हैं. शिशु टिड्डी का पेड़-पौधे खाती है, 5-6 हफ्ते में बड़ी हो जाती है. इन्हें मारने का सबसे अच्छा उपाय अंडों के फूटते ही उन पर रसायन का छिड़काव है. टिड्डी अपने वजन से कहीं अधिक भोजन एक दिन में खाती है. ये एक दिन में 100 से 200 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है  फिलहाल मध्यप्रदेश में 8000 करोड़ रू की मूंग की फसल को इनसे खतरा है, बाकी राज्यों में ये कपास और मिर्ची को निशाना बना सकते हैं.

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