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महाराष्ट्र में ठाकरे सरकार; ‘बेटा-बेटी’, ‘भतीजा-भतीजी’ सब मंत्री बने

thakrey govtनई दिल्ली: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया है. लेकिन जिस तरह मंत्रिमंडल का गठन हुआ है उसको देखकर कहा जा सकता है कि इस सरकार में बेटा, बेटी, भतीजा-भतीजे मंत्री बन गए हैं. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे अदित्य ठाकरे, शरद पवार के भतीजे अजित पवार, पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे अमित देशमुख, पूर्व डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे धनंजय मुंडे, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एकनाथ गायकवाड़ की बेटी वर्षा गायकवाड़ ने ली मंत्री पद की शपथ ली है. इसमें अजित पवार ने रिकॉर्ड चौथी बार डिप्टी सीएम पद की जिम्मेदारी संभाली है.  पिछले डेढ़ महीने में दूसरी बार  अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है.  इससे पहले उन्होंने एनसीपी से बगावत करते हुए बीजेपी से हाथ मिला लिया था और 23 नवंबर को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली थी. हालांकि 26 नवंबर को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली सरकार तीन दिन में ही गिर गई.

पवार के अलावा महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने भी सोमवार को कैबिनेट मंत्री की शपथ ली.  एनसीपी नेता और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष दिलीप वाल्से पाटिल, विधान परिषद में विपक्ष के पूर्व वेता धनंजय मुंडे और विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता विजय वडेट्टीवार ने भी शपथ ली. राज्यपाल बी एस कोश्यारी ने नए मंत्रियों को विधान भवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और रांकापा नेता शरद पवार मौजूद थे.   एनसीपी नेता दिलीप वाल्से पाटिल, धनंजय मुंडे और कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कैबिनेट मंत्रियों के रूप में शपथ ली. इसके अलावा सबकी नजरें उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे पर थी जिन्होंने मंत्री पद की शपथ ली है.
अजित पवार: 37 दिन में फिर बने डिप्टी CM
महाराष्ट्र सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजित पवार ने भी मंत्री पद की शपथ ली है. वह राज्य के उप-मुख्यमंत्री होंगे. पवार एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे हैं. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में वह बारामती से सातवीं बार विधायक चुने गए हैं.
महाराष्‍ट्र कैबिनेट में संजय राउत के भाई को नहीं मिली एंट्री
उद्धव ठाकरे सरकार के पहले विस्‍तार में वो सब कुछ देखने को मिला जिसकी पहले से ही उम्‍मीद की जा रही थी। इस कैबिनेट विस्तार में कुल 36 मंत्रियों ने शपथ ली है। हालांकि इस विस्‍तार में जहां कई नेताओं के सगे संबंधियों को कैबिनेट बर्थ मिली वहीं शिवसेना के तेजतर्रार नेता संजय राउत के भाई सुनील राउत को शामिल नहीं किया गया।महाराष्‍ट्र में चली राजनीतिक उठापठक के दौरान भी सुनील की पार्टी के प्रति निष्‍ठा पर कोई अंगुली नहीं उठी थी। इसके बाद भी उन्‍हें मंत्रिमंडल से बाहर रखा गया।  संजय राउत शिवसेना के उन तेजतर्रार नेताओं में शामिल हैं जो पार्टी का रुख कड़ाई से रखते आए हैं। कई बार वह अपने तीखे बयानों के चलते भी सुर्खियों में रहे हैं। वह पार्टी के राज्‍य सभा सांसद होने के अलावा सामना अखबार से भी जुड़े हुए हैं। इसके अलावा उन्‍होंने ही बाला साहब ठाकरे के जीवन पर बनी फिल्‍म ‘ठाकरे’ के लेखक भी रहे हैं। वह काफी लंबे समय से शिवसेना से जुड़े रहे हैं।मंत्रिमंडल में सुनील का नाम शामिल करने को लेकर भले ही कोई वजह अब तक सामने नहीं आई है लेकिन, इसको लेकर संजय राउत ने साफतौर पर कहा कि अपने भाई के लिए उन्‍होंने कभी कुछ नहीं मांगा। उन्‍होंने मंत्रिमंडल विस्‍तार के बाद एक निजी चैनल पर कहा कि कहा कि हम हमेशा देने वाले रहे हैं। पार्टी में हमारा योगदान पहले की ही तरह है। उन्‍होंने ये भी साफ कर दिया कि सुनील की भी ऐसी कोई मंशा नहीं थी। संजय का कहना था कि गठबंधन की सरकार में सभी को कुछ न कुछ देना होता है। उन के मुताबिक हर पार्टी में काबिल लोग हैं, लेकिन जितना जिसके कोटे में आता है मिल जाता है। ऐसे में जिसको कुछ नहीं मिला उन्‍हें संयंम रखना चाहिए।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव मे बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं. बीजेपी और शिवसेना ने मिलकर बहुमत का 145 का आंकड़ा पार कर लिया था. लेकिन शिवसेना ने 50-50 फॉर्मूले की मांग रख दी जिसके मुताबिक ढाई-ढाई साल सरकार चलाने का मॉडल था. शिवसेना का कहना है कि बीजेपी के साथ समझौता इसी फॉर्मूले पर हुआ था लेकिन बीजेपी का दावा है कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ. इसी लेकर मतभेद इतना बढ़ा कि दोनों पार्टियों की 30 साल पुरानी दोस्ती टूट गई. इसके बाद बड़े नाटकीय घटनाक्रम के बाद शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना ली. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव मे बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं.
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