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साेनिया के घर प्रदर्शन- हरियाण-महाराष्ट्र कांग्रेस में बगावत….

ashok-tanvar-.1570022778नई दिल्ली। उम्मीद की जा रही थी कि कांग्रेस के अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे और उनके स्थान पर सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस का संकट दूर हो जाएग लेकिन दो राज्यों हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों की घोषणा होने के साथ ही कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई सोनिया गांधी की चौखट पर ही खुल कर सामने आ गई। हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन के लिए सोनिया गांधी द्धारा बुलाई गई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में भाग लेने पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी नहीं पहुंचे तो सवाल उठ खडे हुए। इतना ही नहीं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर के समर्थकाें ने तो 10 जनपथ स्थित साेनिया गांधी के घर के सामने प्रदर्शन कर डाला।जाहिर है सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद भी स्थिति संभाले नहीं संभल रही। हरियाणा और महाराष्ट्र जहां विधानसभा चुनाव हो रहे हैं वहां कांग्रेस में लगभग भगदड की स्थिति है।क्षत्रप बागी तेवर दिखा रहे हैं तो कांग्रेस का आम कार्यकर्ता शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली को देख यह सवाल पूछ रहा है कि आखिर राजनीति और चुनाव के मैदान में ऐसे कैसे कांग्रेस खड़ी हो पाएगी।

Ahmed-Patel-with-Hooda-and-Azad-784x441 — एक तरफ राहुल गांधी का पार्टी की प्रमुख बैठकों में शामिल न होना कांग्रेस नेतृत्व के लिए सिरदर्द बन रहा है। तो दूसरी ओर हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए टिकट बंटवारे के साथ ही कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई खुल कर सामने आ गई। क्षत्रप बागी तेवर दिखा रहे हैं तो कांग्रेस का आम कार्यकर्ता शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली को देख यह सवाल पूछ रहा है कि आखिर राजनीति और चुनाव के मैदान में ऐसे कैसे कांग्रेस खड़ी हो पाएगी। तो हरियाणा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशाेक तंवर ने हरियाणा में टिकट पांच कराेड़ रुपए तक में बेचने का आरोप लगा डाला है।

congress finghting— ‘ हरियाणा में सोहना विधानसभा के लिए कांग्रेस पार्टी का टिकट पांच कराेड़ रुपए में बेचा गया है। वर्षाें तक कांग्रेस के लिए काम करने वालाें काे अनदेखा किया गया।’
हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर

— मैंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए मुंबई में सिर्फ एक सीट मांगी थी,वो भी नहीं दी गई है।  ऐसी स्थिति में मैं कांग्रेस पार्टी के लिए चुनाव प्रचार नहीं करूंगा।
मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरुपम

कांग्रेस सबसे ज्यादा कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के तेवरों और कार्यशैली से असामंजस्य में खड़ी दिखाई दे रही है। लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष बनने से इनकार कर दिया और अध्यक्ष कौन बने इसके लेकर कांग्रेस में लंबे समय तक अनिर्णय की स्थिति बनी रही। आखिरकर सोनिया गांधी ने पुत्र राहुल गांधी के चलते रिक्त हुई अध्यक्ष पद की कुर्सी को संभाला तो लगा कांग्रेस पार्टी अब संभल जाएगी। लेकिन लगता है राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी की बैठकों से दूरी बना ली है। सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष चुने जाने के बाद से राहुल गांधी ने पार्टी की किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया है। हाल ही में 10 जनपथ पर हरियाणा विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों के चयन के लिए बुलाई गई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में दिल्ली में होने के बावजूद राहुल गांधी नहीं पहुंचे तो उनकी शैली पर सवाल उठे।वैसे यह पहली बैठक नहीं थी, जिसमें राहुल गांधी अनुपस्‍थित रहे। राहुल गांधी कांग्रेस की 12 सितंबर की बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे। उस बैठक की अध्‍यक्षता भी सोनिया गांधी ने ही की थी जिसमें कई अहम फैसले लिए गए थे और देश के आर्थिक हालात पर भी चर्चा की गई। हालांकि राहुल गांधी के कार्यालय ने सफाई देते हुए इस बारे में कहा है कि कांग्रेस कार्यकारी समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य के नाते राहुल गांधी 10 अगस्त को हुई की बैठक में शामिल हुए थे। इसके अलावा अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद पार्टी की रणनीति तय करने के लिए आयोजित बैठक में भी राहुल गांधी मौजूद रहे थे।

असल में राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद की कुर्सी छोड़ते वक्‍त कहा था कि वह पार्टी की जरूरत के मुताबिक हाजिर रहेंगे और 10 गुणा ज्यादा काम करेंगे। इसके उलट राज्यों में चुनावी बिगुल बज जाने के बाद भी राहुल गांधी के प्रचार अभियान की शुरुआत अब तक नहीं हुई है और न ही संभावित कार्यक्रम के बारे में किसी को जानकारी है। राहुल गांधी शायद नहीं चाहते कि हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावी नतीजों का ठीकरा उनके सिर फूटे। राहुल गांधी पार्टी के फैसले लेने वाली बैठकों में खुद शामिल भले ही न हो रहे हैं लेकिन जो फैसले ले रहे हैं उनकी जवाबदेही चुनाव के बाद जरूर तय करना चाहते हैं। राहुल गांधी कांग्रेस को रिमोट कंट्रोल से चलाने के आरोपों से बचना चाहते हैं और पार्टी के उन वरिष्ठ नेताओं को जवाब भी देना चाहते हैं जो उनपर मनमाने फैसले लेने के आरोप लगाते थे।वैसे राहुल की प्रमुख बैठकों खास कर चुनावी बैठकों से दूर रहने के कारण को पार्टी के भीतर नए और पुराने, युवा और बुर्जग के संघर्ष से भी जोड कर देखा जा रहा है। सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद वो कांग्रेस वरिष्ठ नेता सक्रिय हो गए हैं जिनके बारे में राहुल गांधी का यह मानना रहा कि कांग्रेस की बदहाली ऐसे लोगों के कारण हुई।

कांग्रेस में जहां शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर खींचतान मची हुई है और उसका असर चुनाव व राज्यों में संगठन स्तर पर भी साफ नजर आ रहा है। इसका उदाहरण हरियाणा और महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव है जहां कांग्रेस चुनाव से पहले आप में ही लड़ती नजर आ रही है। जैसा कि हरियाणा में चुनाव की सरगर्मियाें के बीच कांग्रेस की अंतर्कलह साेनिया गांधी के दरवाजे तक पहुंच गई। हरियाणा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशाेक तंवर ने पार्टी के टिकट पांच कराेड़ रुपए तक में बेचने का आरोप लगाया तो उनके समर्थकाें ने 10 जनपथ स्थित साेनिया के घर के सामने प्रदर्शन कर डाला। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर निशाना साधते हुए तंवर ने आराेप लगाया कि सोहना विधानसभा के लिए पार्टी का टिकट पांच कराेड़ रुपए में बेचा गया है। वर्षाें तक पार्टी के लिए काम करने वालाें काे अनदेखा किया गया। इसी के साथ तंवर और हुड्डा की लड़ाई दिल्ली की सड़कों तक पहुंच गई है। टिकटों के बंटवारे में अनदेखी के चलते पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर ने अपने समर्थकों को दिल्ली बुलाकर नारेबाजी करवाई।कांग्रेस मेनीफेस्टो कमेटी की चेयरमैन किरण चौधरी ने भी तेवर दिखाए। इसके अलावा कुमारी सैलजा के साथ अंबाला संसदीय सीट को लेकर पेंच फंसा। ऐसे में कांग्रेस भाजपा से मुकाबला करने से पहले अपने घर की राजनीति में जूझ रही है। टिकट वितरण में हुड्डा की चली है और वह अपने करीबियों को टिकट दिलाने में सफल हुए हैं। ऐसे में टिकट वितरण पर उंगली उठा रहे पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर की नाराजगी और बढ़ सकती है। तंवर ने टिकट के लिए 80 समर्थकों की सूची हाईकमान को सौंपी थी।

कांग्रेस नेता अशोक तंवर का एक ऑडियो वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस मुख्यालय पहुंचने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस पार्टी का नाश करने के लिए कुछ लोग लगे हैं। ऐसे में अपने आप को भी बचाएं और कांग्रेस को भी बचाएं। जिसके बाद तंवर समर्थकों ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को लेकर जमकर नारेबाजी की। हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर के समर्थक दिन भर दिल्ली में पार्टी कार्यालय पर हंगामा कर विरोध जताते रहे परंतु कांग्रेस की पहली लिस्ट में उनको मायूसी मिली। तंवर समर्थकों ने टिकट पाने की अंतिम कोशिश में कांग्रेस मुख्यालय पर प्रदर्शन कर नारेबाजी की। तंवर ने बागी तेवर अख्तियार करते हुए समर्थकों को कहा है कि टिकट मिला तो ठीक नहीं तो पर्चा भरो चुनाव लड़ो। तंवर ने अंतिम हथियार के तौर पर अपने समर्थकों को मैदान में उतारने का ऐलान कर दिया। ऐसे में अब देखना होगा कि अशोक तंवर क्या रणनीति अपनाते हैं।

दरअसल तंवर राज्य में हुए टिकट के बंटवारे से नाराज हैं।तंवर ने मीडिया से कहा भी कि,’बीते पांच सालों में जिन्होंने पार्टी के लिए काम किया उन्हें टिकट बंटवारे के दौरान अनदेखा किया गया। जिन्होंने पार्टी के खिलाफ काम किया उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने तवज्जो दी है। राज्य में बीते 5 सालों में मैंने पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचा है। राजस्थान में नेतृत्व को खत्म किया जा रहा है। हम हमेशा से अपनी पार्टी को लेकर समर्पित रहे हैं। ऐसे लोगों को टिकट क्यों दिए जा रहे हैं जो पहले कांग्रेस की आलोचना करते थे और अब कांग्रेस में शामिल हो गए हैं।’ दूसरी ओर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के बेटे नितेश राणे ने भी आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। तो महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए टिकट बंटवारे से नाराज मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरुपम ने बगावती तेवर दिखाए हैं। उन्होंने ट्वीट किया, ‘ऐसा लगता है कि अब कांग्रेस पार्टी मेरी सेवा नहीं चाहती है।मैंने विधानसभा चुनाव के लिए मुंबई में सिर्फ एक सीट मांगी थी,वो भी नहीं दी गई है। हालांकि मैंने कांग्रेस आलाकमान को पहले ही बता दिया था कि ऐसी स्थिति में मैं कांग्रेस पार्टी के लिए चुनाव प्रचार नहीं करूंगा। यह मेरा आखिरी फैसला है। मुझको उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी को गुडबाय कहने का दिन अभी नहीं आया है। हालांकि कांग्रेस आलाकमान मेरे साथ जिस तरह का बर्ताव कर रहा है, उससे नहीं लगता है कि कांग्रेस में ज्यादा दिन तक रहूंगा।’

हरियाणा और महाराष्ट्र में टिकट बंटवारे के साथ उभरी आंतरिक कलह से साफ है कि कांग्रेस राहुल गांधी के बाद कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रही सोनिया गांधी के लिए दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव जीतने से ज्यादा पार्टी को बचाना चुनौती बन गया है। लोकसभा चुनाव 2019 में हार के बाद कांग्रेस का कार्यकर्ता पहले से ही पस्त है और ऐसे में पार्टी में शीर्ष स्तर पर मचा आंतरिक घमासान ने उसे भविष्य के लिए सोचने पर मजबूर कर रहा है। लिहाजा  गांधी जयंती पर आयोजित किए गए यूपी विधानसभा के विशेष सत्र का कांग्रेस द्वारा बहिष्कार करने के बावजूद सत्र में हिस्सा लेने वाली रायबरेली सदर पार्टी से विधायक अदिति सिंह को लेकर भी कयास लगने लगले लगे हैं।असल में गांधी जयंती पर जब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी लखनऊ में योगी सरकार के खिलाफ पदयात्रा निकाल रही थीं,तब यूपी विधानसभा के विशेष सत्र में कांग्रेस विधायक अदिति सिंह ने पहुंचकर कांग्रेस नेतृत्व सहित सबको चौंका दिया।

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