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मोदी की वाराणसी में हुंकार भरेंगी ममता बनर्जी

mamata-fbयूपी विधानसभा चुनाव में भले ही ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी चुनाव नहीं लड़ रही है लेकिन बीजेपी को हराने के लिए रणनीति बनाने में जरूर लगी है। ममता बनर्जी ने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को खुला समर्थन दिया हुआ है। लखनऊ में अखिलेश के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस के बाद ममता बनर्जी 3 मार्च को बनारस में सभा और रोड-शो करने जा रही हैं। ममता के कार्यक्रम को लेकर समाजवादी पार्टी ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सोमवार को कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता किरणमय नंदा और युवजन सभा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास यादव भी सोमवार 22 फरवरी को वाराणसी पहुंच रहे हैं। प्रत्याशियों के साथ बैठक करने के अलावा ममता बनर्जी के आगमन को लेकर पूरी प्लानिंग तैयार की जाएगी।

सीधे पीएम मोदी को चुनौती की तैयारी
ममता बनर्जी के बनारस से हुंकार भरने के कई मायने हैं। उनके निशाने पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर वाला इलाका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के गढ़ में जाकर उन्हें लगातार चैलेंज कर रहे थे। अब उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी पीएम मोदी के गढ़ में पहुंचकर उन्हें ललकारने की तैयारी में हैं।इससे पहले ममता बनर्जी ने लखनऊ में  अखिलेश यादव के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा था। लखनऊ से उन्होंने उत्तर प्रदेश में खेला होबे का नारा देते हुए वाराणसी आने की घोषणा भी की थी। ममता बनर्जी ने वाराणसी में जनसभा के साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर में दीया जलाने की बात कही थी। इस दीया का भी एक संकेत है।

बनारस की पांचों सीटों पर पिछली बार का रिजल्ट
सीट      भाजपा गठबंधन    सपा गठबंधन

उत्तरी        116017       70515
कैंट          132609       71283
रोहनियां   119885        62332
सेवापुरी     103423        54241
दक्षिणी      92560         75334

बनारस का बड़ा इलाका बंगाली बाहुल्य, निशाने पर दक्षिणी
ममता बनर्जी बंगाल के वोटर्स को साधने के साथ ही भाजपा के सबसे मजबूत किले वाराणसी दक्षिणी में सेंधमारी की कोशिश करेंगी। वाराणसी दक्षिणी ही वह इलाका है जहां बड़ी संख्या में बंगाली समाज के लोग रहते हैं। माना जा रहा है कि इन इलाकों में ममता डोर टू डोर जनसंपर्क भी कर सकती हैं। वाराणसी दक्षिणी से लगातार सात बार भाजपा के विधायक रहे श्यामदेव राय चौधरी भी बंगाली कम्युनिटी से ही आते हैं। पिछली बार उनका टिकट काटकर भाजपा ने नीलकंठ तिवारी को मैदान में उतार दिया था। नीलकंठ ने जीत हासिल की और मंत्री भी बने। इस बार भी नीलकंठ ही भाजपा से मैदान में हैं। वाराणसी दक्षिणी में ही काशी विश्वनाथ कॉरिडोर भी स्थित है।बीजेपी जहां विश्वनाथ कॉरिडोर को एक मॉडल की तरह पेश कर रही है, वहीं ममता बनर्जी यहां से विस्थापित हुए लोगों के दर्द पर मरहम लगाने का काम करेंगी। उनका दीया जलाने की बातें करने को इसी का संकेत माना जा रहा है। सपा नेताओं का कहना है कि यहां हजारों लोगों के साथ अन्याय हुआ है। उनसे किये गए वायदे पूरे नहीं हुए हैं। विश्व प्रसिद्ध विश्वनाथ गली को तबाह कर दिया गया है। वहां के कारोबारी परेशान हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि ममता बनर्जी इन लोगों की सहानुभूति लेने की कोशिश करेंगी।

सबसे कम वोट और मार्जिन से जीती भाजपा
पिछली बार भाजपा की लहर में भी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर वाले वाराणसी दक्षिणी सीट पर बीजेपी सबसे कम अंतर से जीती। वाराणसी की पांचों सीटों से तुलना करें तो यहां बीजेपी को सबसे कम वोट भी मिले थे। अन्य सीटों पर जहां भाजपा ने एक लाख से ज्यादा वोट हासिल किये, वहीं दक्षिणी सीट पर 92 हजार वोट ही मिले थे।भाजपा की जीत का अंतर भी बेहद कम था। बनारस की अन्य सीटों के मुकाबले कांग्रेस-सपा गठबंधन के प्रत्याशियों ने इसी सीट पर सबसे ज्यादा 75 हजार वोट हासिल किये थे। ऐसे में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर वाले शहर दक्षिणी में सपा उलटफेर की फिराक में लगी है। सपा को पता है कि अगर ऐसा करने में वह सफल होती है तो इसका संदेश पूरे देश में जाएगा।

सपा ने महामृत्युंजय मंदिर के महंत परिवार पर खेला दांव
समाजवादी पार्टी ने इस बार वाराणसी दक्षिणी सीट पर महामृत्युंजय मंदिर के महंत परिवार के किशन दीक्षित को मैदान में उतारा है। कांग्रेस की तरफ से पिछली बार भाजपा को कड़ी टक्कर देने वाल राजेश मिश्रा दक्षिणी के बजाय कैंट सीट पर उतारे गए हैं। इसे भाजपा के खिलाफ सपा-कांग्रेस की खास रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।

इस बार सपा के साथ कमलापति त्रिपाठी का भी परिवार
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे कमलापति त्रिपाठी के परिवार का साथ भी इस बार सपा को मिल रहा है। औरंगाबाद हाउस के नाम से मशहूर कमलापति त्रिपाठी के परिवार ने कांग्रेस ने सात दशक पुराना नाता तोड़कर टीएमसी को ज्वाइन कर लिया है। कमलापति त्रिपाठी के पौत्र राजेशपति त्रिपाठी और राजेशपति न सिर्फ टीएमसी को मजबूत करने में लगे हैं बल्कि इस चुनाव में सपा को जीताने में भूमिका अदा कर रहे हैं।

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