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मनमोहन सरकार के समय शुरू हुई थी NDTV के खिलाफ जांच

ndtv raidनई दिल्ली। एनडीटीवी के प्रमोटरों प्रणय रॉय और राधिका रॉय के ठिकानों पर सीबीआइ के छापे को भले ही विपक्षी दल तूल दे रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि एनडीटीवी के खिलाफ जांच की शुरुआत तत्कालीन संप्रग सरकार के कार्यकाल में ही शुरू हुई थी।आयकर विभाग ने एनडीटीवी के विरुद्ध पहला आदेश भी लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से ठीक पहले 21 फरवरी 2014 को जारी किया था, उस समय केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम थे।सूत्रों के अनुसार प्रणय रॉय, राधिका रॉय और उनके स्वामित्व वाली कंपनियों के खिलाफ आयकर विभाग तथा प्रवर्तन निदेशालय ने संप्रग सरकार के कार्यकाल में 2011 और 2012 में जांच शुरू की थी। उन पर विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन और कर चोरी का आरोप था।

1,100 करोड़ रुपये का कालाधन सफेद करने का आरोप : आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि एनडीटीवी ने ब्रिटेन, मॉरीशस, नीदरलैंड, स्वीडन और संयुक्त अरब अमीरात में शैल (मुखौटा) कंपनियां बनाकर 1,100 करोड़ रुपये की मनी लांड्रिंग की।एनडीटीवी समूह की नीदरलैंड स्थित शेल कंपनियों में 642 करोड़ रुपये आए और इस पर टैक्स नहीं दिया गया। एनडीटीवी इस मामले को लेकर विवाद समाधान पैनल (डीआरपी) में गया, लेकिन वहां एनडीटीवी की अपील खारिज हो गई। इसके बाद आयकर विभाग ने 21 फरवरी, 2014 को एनडीटीवी को टैक्स जमा करने का आदेश दिया।

मात्र 4 रुपये में खरीदा 140 रुपये का शेयर : एनडीटीवी के शेयर की कीमत 140 रुपये थी जबकि उसके प्रमोटरों यानी राधिका रॉय, प्रणय रॉय और उनकी कंपनी ने यह शेयर मात्र 4 रुपये की दर से खरीदा।

ऋण राशि में से 91 करोड़ रुपये डाइवर्ट करने आरोप : आरआरपीआर (राधिका रॉय और प्रणय रॉय की कंपनी) ने आइसीआइसीआइ बैंक से जो लोन लिया था, उसमें से 91 करोड़ रुपये डा. प्रणय रॉय और राधिका रॉय को डाइवर्ट किए गए जो लोन एग्रीमेंट के प्रावधानों के विरुद्ध थे। दरअसल आइसीआइसीआइ बैंक ने आरआरपीआर को यह लोन कारपोरेट खर्च के लिए दिया था।

नहीं मिली रॉय की प्रतिक्रिया : दैनिक जागरण ने आयकर विभाग की इस जांच के बारे में जब एनडीटीवी के प्रमुख प्रणय रॉय की प्रतिक्रिया जानने के लिए ईमेल भेजा तो उसका कोई जवाब नहीं मिला।

5 जून को पड़े थे सीबीआइ छापे : सीबीआइ ने आइसीआइसीआइ बैंक को करोड़ों रुपये का चूना लगाने और कर्ज चुकाने के लिए शेल (मुखौटा) कंपनियों के मार्फत करोड़ों रुपये के काले धन के इस्तेमाल के आरोप में एनडीटीवी के मालिक प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है।जांच एजेंसी ने यह एफआइआर क्वांटम सिक्यूरिटीज के निदेशक और एनडीटीवी के पूर्व कर्मी संजय दत्त की शिकायत के आधार पर दर्ज की है।सीबीआइ ने सोमवार को प्रणय, राधिका और एनडीटीवी के दिल्ली व देहरादून स्थित चार ठिकानों पर छापे मारे थे। आरोप है कि प्रणय और राधिका ने एनडीटीवी के अधिकांश शेयरों पर कब्जे के लिए एक तीसरी कंपनी को शेयर बेचने का फैसला किया।यह कंपनी भी राधिका रॉय प्रणय रॉय होल्डिंग्स के नाम से उनकी ही थी। चूंकि एनडीटीवी शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी है, इसीलिए इसकी जानकारी सेबी और स्टॉक एक्सचेंज को देना जरूरी था।लेकिन यह जानकारी नहीं दी गई। यही नहीं, ये शेयर खरीदने के लिए पहले इंडिया बुल्स से 2007 में 439 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया। बाद में इंडिया बुल्स का कर्ज लौटाने के लिए आइसीआइसीआइ बैंक से 375 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया।

मीडिया को खामोश करने की कोशिश : एनडीटीवी ने अपने मालिकों पर छापे को दुर्भावनापूर्ण और प्रेस की आजादी पर सियासी हमला करार दिया है। चैनल ने एक बयान में कहा, सत्तारूढ़ दल के नेताओं को एनडीटीवी टीम की आजादी और निडरता पच नहीं रही है। सीबीआइ के छापे मीडिया को खामोश करने की एक और कोशिश है।

मीडिया का सम्मान, छापे आरोपी प्रमोटरों तक थे सीमित : सीबीआई 

सीबीआइ ने प्रणय रॉय और राधिका रॉय के खिलाफ जांच को जानबूझकर परेशान करने वाली कार्रवाई बताने के एनडीटीवी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।सीबीआइ ने सफाई दी है कि सोमवार को एनडीटीवी के प्रसारण से संबंधित किसी भी जगह की तलाशी नहीं ली गई और छापे की कार्रवाई एनडीटीवी के प्रमोटर प्रणय रॉय और राधिका रॉय के ठिकानों तक सीमित था।वहीं जांच को आगे बढ़ाते हुए सीबीआइ ने मंगलवार को रॉय दंपती और आइसीआइसीआइ बैंक के खिलाफ शिकायत करने वाले क्वांटम सिक्यूरिटीज के निदेशक संजय दत्त से पूछताछ की।संजय दत्त की शिकायत पर ही एफआइआर दर्ज की गई है। मीडिया की स्वतंत्र आवाज दबाने के एनडीटीवी के आरोपों खारिज करते हुए सीबीआइ ने कहा कि वह मीडिया की आजादी का सम्मान करती है।इसीलिए छापे में एनडीटीवी के न्यूज रूम समेत खबर प्रसारण से संबंधित किसी भी विभाग को निशाना नहीं बनाया गया। कार्रवाई को सिर्फ प्रमोटरों तक सीमित रखा गया है।सीबीआइ ने इस आरोप भी खारिज कर दिया कि निजी बैंक के लोन के मामले में वह कार्रवाई नहीं कर सकती है।इसके लिए सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल के एक फैसले का हवाला दिया है, जिसमें निजी बैंकों को भी सीबीआइ की जांच के दायरे में होने की बात कही गई है।एनडीटीवी ने अपने बयान में दावा किया था कि अभी तक वह किसी बैंक का लोन डिफाल्टर नहीं है।

सीबीआइ का कहना है कि यह लोन डिफाल्टर का मामला ही नहीं है।मामला आइसीआइसीआइ बैंक के कुछ अधिकारियों के साथ आपराधिक साजिश के तहत 48 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का है और इसकी शिकायत एनडीटीवी और आइसीआइसीआइ बैंक के शेयरहोल्डर ने की है।वहीं छापे की कार्रवाई के बाद सीबीआइ जांच में जुट गई है। इस सिलसिले में शिकायत करने वाले संजय दत्त से लंबी पूछताछ की गई है। उनसे कई मामलों में सफाई मांगी गई।इसके साथ ही सीबीआइ ने आइसीआइसीआइ बैंक को पत्र लिखकर एनडीटीवी को कर्ज देने और उसे 48 करोड़ रुपये की छूट देकर मामला निपटाने के फैसले से जुड़े अधिकारियों की सूची मांगी है।माना जा रहा है कि जांच एजेंसी जल्द ही उन अधिकारियों को तलब कर इस संबंध में पूछताछ करेगी।

 

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