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#MeToo; भारतीय मीडिया का घिनौना चेहरा

नई दिल्ली। मीडिया की दुनिया बाहर से जितनी चकाचौंध भरी हुई नज़र आती है इसके भीतर गहराई तक उतरने में उतने ही अंधियारे गलियारे भी नज़र आते हैं। मी टू अभियान ने भारतीय मीडिया के घिनौने चेहरे को उजागर करने का काम कर दिया है। एक ऐसा पेशा जो दूसरों को नैतिकता की सीख देता है। नैतिकता का पाठ पढता है। नेताओं और दूसरे क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों के यौत उत्पीडन के मामलों को सनसनीखेज बनाकर पेश करता है। उस मीडिया के यदि नामचीन संपादकों और पत्रकारों पर महिलाएं यौन उत्पीडन के आरोप लगा रही  हैं तो भारतीय पत्रकारिता के लिए शर्मसार करने वाला है। तरूण तेजपाल प्रकरण ने पहले मीडिया बिरादरी को शर्मसार किया और अब मी टू ने रही सही कसर पूरी कर दी। पूर्व संपादक और नरेंद्र मोदी सरकार में विदेश मंत्री एम जे अकबर पर लगे रहे हैं आरोप सनसनीखेज हैं। वैसे राडियाकांड मीडिया में भ्रष्टाचार और यौन उत्पीडन का पहले ही खुलासा कर चुका है। एक समय मीडिया में चरित्रवान लोगों का सम्मान होता था पर इलेक्ट्रिनक मीडिया के आने के बाद से मीडिया में भी मी टू… का चलन शुरू हो गया।मीडिया और लोकतंत्र के लिए यह अच्छा संकेत नहीं है।आए दिन छोटे-बड़े मीडिया हाउस में किसी न किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार की बातें गुपचुप चर्चाओं में शामिल पाई जाती हैं. लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि गुपचुप चर्चाओं में शामिल होने वाली ये बातें अब खुलकर सामने रखी जा रही हैं और खुद महिलाएं ही इन मामलों को उजागर कर रही हैं.पत्रकारिता से जुड़ी बहुत सी महिलाओं ने अपने साथ कार्यक्षेत्र में हुए यौन दुर्व्यवहार के बारे में सोशल मीडिया पर खुलकर लिखना शुरू कर दिया है. इनमें बहुत सी महिलाएं देश के जाने-माने मीडिया संस्थानों का हिस्सा रह चुकी हैं या अभी भी हैं.

जिन पुरुषों पर आरोप लगाए जा रहे हैं वे भी मीडिया और पत्रकारिता जगत के जाने-माने चेहरे हैं. इसे भारत में #MeToo मोमेंट की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है.कुछ दिन पहले बॉलीवुड अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर पर फिल्म की शूटिंग के दौरान छेड़छाड़ करने के आरोप लगाए थे. इसके बाद कई अन्य महिलाओं ने भी सिलसिलेवार तरीके से अपने साथ हुई यौन शोषण की घटनाओं का ज़िक्र करना शुरू कर दिया.महिलाएं अपने साथ कार्यस्थल में हुए यौन दुर्व्यवहार पर मुखर होकर सामने आ रही हैं. वे सोशल मीडिया के ज़रिए उन घटनाओं का ज़िक्र कर रही हैं और दुर्व्यवहार में शामिल रहे पुरुषों के नाम ज़ाहिर कर रही हैं.मीडिया से जुड़ी बहुत सी महिलाओं ने इस मामले पर ट्वीट किए हैं और अपने साथ यौन दुर्व्यवहार करने वाले पुरुषों की चैट के स्क्रीनशॉट्स सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं.इस पूरे सिलसिले की शुरुआत दरअसल कॉमेडियन उत्सव चक्रवर्ती पर एक महिला के द्वारा लगाए गए आरोपों से हुई.

इस महिला ने गुरुवार को ट्वीट कर उत्सव पर आरोप लगाए कि उत्सव ने उन्हें अपनी न्यूड तस्वीरें भेजने की बात कही थी साथ ही अपने जननांग की तस्वीर भी उन्हें भेजी थी.महिला पत्रकार संध्या मेनन ने ट्वीट कर के.आर श्नीनिवासन पर आरोप लगाए हैं, ”मौजूदा वक़्त में टाइम्स ऑफ़ इंडिया के हैदराबाद में रेज़िडेंट एडिटर ने एक बार मुझे घर छोड़ने की पेशकश की थी, यह साल 2008 की घटना है जब बेंगलुरु में अख़बार के एक संस्करण के लॉन्च के लिए पहुंचे थे और मेरे लिए वह शहर तब नया था.”इसके जवाब में के.आर श्रीनिवास ने लिखा है, “टाइम्स ऑफ़ इंडिया की सेक्सुअल हरासमेंट कमिटी ने इसकी जांच शुरू कर दी है और एक वरिष्ठ महिला के नेतृत्व वाली मज़बूत कमिटी इसकी जांच कर रही है. मैं इस जांच में पूरा सहयोग कर रहा हूं.”सुप्रीम कोर्ट की वकील इंदिरा जयसिंह ने महिलाओं के यूं मुखर होने की तारीफ़ की है और ट्वीट किया है, “मैं मीडिया की उन महिलाओं को सलाम करती हूं जो अपने साथ हुए यौन शोषण के अनुभवों को लेकर मुखर हुई हैं. न्यायपालिका में भी ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जो इस तरह के मामलों से लड़ रही हैं. आप सभी को मेरा समर्थन है.”

इसी तरह कुछ समय पहले तक हफ़िंगटन पोस्ट में काम करने वाले अनुराग वर्मा पर भी बहुत सी महिलाओं ने आपत्तिजनक मेसेज भेजने के आरोप लगाए. महिलाओं ने लिखा कि अनुराग उन्हें स्नैपचैट पर ऐसे मेसेज भेजते थे.इसकी सफाई में अनुराग ने माफ़ी मांगते हुए ट्वीट किया है कि उन्होंने वो तमाम मेसेज मज़ाकिया लहज़े में भेजे थे.अनुराग ने लिखा है कि उन्हें इस बात का अंदेशा नहीं था कि इससे किसी की भावनाएं आहत हो जाएंगी. उन्होंने यह भी माना है कि उन्होंने कुछ महिलाओं को उनकी न्यूड तस्वीरें भेजने के मेसेज भेजे थे.इस संबंध में हफ़िंगटन पोस्ट ने भी अपनी तरफ़ से एक बयान जारी किया है. इस बयान में लिखा गया है कि उनके दो पूर्व कर्मचारी अनुराग वर्मा और उत्सव चक्रवर्ती पर बहुत सी महिलाओं ने यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं.वेबसाइट लिखती है, ”हम इस तरह के कृत्य को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराते. चक्रवर्ती ने तीन साल पहले हफ़िंगटन पोस्ट छोड़ दिया था जबकि अनुराग वर्मा ने अक्टूबर 2017 में हफ़िंगटन पोस्ट छोड़ा. जब तक ये दोनों हमारे साथ काम कर रहे थे तब तक हमें इन पर लगाए गए आरोपों के बारे में कुछ पता नहीं था. हम इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या यहां काम करते हुए भी इन पर इस तरह के कोई आरोप लगे थे.”

क्या है #MeToo
#MeToo या ‘मैं भी’ दरअसल यौन उत्पीड़न और यौन हमलों के ख़िलाफ़ चल रहा एक बड़ा अभियान है. सोशल मीडिया पर इस हैशटैग के साथ यौन हमलों (ख़ासकर कार्यस्थल पर) के शिकार हुए लोग आपबीती बयान करते हैं.यह अभियान लोगों को हिम्मत जुटाकर अपने साथ हुए यौन दुर्व्यवहार के बारे में बोलने और प्रताड़ित करने वालों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित करता है.पिछले साल जब हॉलीवुड निर्देशक हार्वी वाइन्स्टीन पर यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगे, पूरी दुनिया में इस अभियान ने ज़ोर पकड़ लिया और अब तक आम लोगों से लेकर कई बड़ी हस्तियां इसमें शामिल हो चुकी हैं.अक्टूबर 2017 में सोशल मीडिया पर #MeToo हैशटैग के साथ लोगों ने अपने साथ कार्यस्थल पर हुए यौन उत्पीड़न या यौन हमलों की कहानियां सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू किया.’द गार्डियन’ के मुताबिक़ टैराना बर्क नाम की एक अमरीकी सामाजिक कार्यकर्ता ने कई साल पहले ही साल 2006 में “मी टू” शब्दावली को इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था.
मगर यह शब्दावली 2017 में उस समय लोकप्रिय हुई जब अमरीकी अभिनेत्री अलिसा मिलानो ने ट्विटर पर इसे इस्तेमाल किया.

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