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मोदी सरकार मेंं बडे फेरबदल की तैयारी, कई मंत्रियों की छुटृी तय

narendra-modi-620x400नई दिल्ली: मोदी सरकार में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है. तीन केंद्रीय मंत्रियों राजीव प्रताप रूडी, उमा भारती संजीव बालियान और फग्गन सिंह कुलस्ते ने मंत्रिमंडल से अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया है. यूपी बीजेपी के अध्यक्ष बनाए गए महेंद्र नाथ पांडे का भी मंत्रिमंडल से जाना तय है. कुल 9 से 10 मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है जिनमें कलराज मिश्र नाम भी शामिल हैं. बताया जा रहा है कि हटाए गए मंत्रियों को पार्टी संगठन में जगह दी जा सकती है. 2019 में होने जा रहे लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार का ये आखिरी मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार माना जा सकता है. इस कैबिनेट विस्तार में जेडीयू से दो चेहरों को शामिल किया जा सकता है, जिनमें नीतीश के करीबी आरसीपी सिंह और संतोष कुशवाहा का नाम आगे आ रहा है. modi-7591शिवसेना से एक और तेलगुदेशम से एक मंत्री बनाए जा सकते हैं. ये भी संभव है कि टीडीपी से एक मंत्री बनाए जाने की जगह उसके मौजूदा राज्यमंत्री को प्रमोशन दे दी जाए.राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कैबिनेट बदलाव के पीछे का सबसे बड़ा मकसद मिशन 2019 ही है क्योंकि अब सरकार के कार्यकाल में 2 साल से भी कम का वक्त बचा है। इससे पहले, सरकार उन राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है जहां जल्द या अगले साल चुनाव होने वाले हैं।  कैबिनेट बदलाव का मकसद 2019 चुनाव से पहले पार्टी का विभिन्न राज्यों में जनाधार और मजबूत करना है। मंत्री पद सिर्फ परफॉर्मेंस के आधार पर खाली नहीं हुए हैं। कुछ मंत्रियों ने खुद से पेशकश की है, वहीं modi nitishकुछ पर अतिरिक्त मंत्रालयों का दबाव है। उमा भारती ने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ना चाहा है। वहीं, रेल दुर्घटनाओं की वजह से आलोचना के शिकार सुरेश प्रभु ने सार्वजनिक तौर पर इस्तीफे की पेशकश की थी। गुरुवार को यूपी बीजेपी अध्यक्ष बनाए गए महेंद्र नाथ पांडेय और पंजाब बीजेपी अध्यक्ष विजय सांपला को ‘संगठन या सरकार में किसी एक ही जगह पद लेने’ के नियम के तहत जगह खाली करनी होगी। वहीं, कई मंत्रालयों के बोझ तले दबे नेताओं की बात करें तो अरुण जेटली के पास वित्त और रक्षा मंत्रालय हैं। वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति बनने के बाद शहरी विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी नरेन्द्र सिंह तोमर के पास है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी स्मृति इरानी के पास तो हर्षवर्धन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अलावा पर्यावरण मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

मंत्रिमंडल में मिल सकती है जगह

  1. भूपेंद्र यादव, राजस्थान से राज्यसभा सांसद, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव
  2. प्रह्लाद जोशी, लोकसभा सांसद, कर्नाटक बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष
  3. विनय सहस्त्रबुद्धे, महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद,  बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
  4. हरीश द्विवेदी, उत्तर प्रदेश के बस्ती से सांसद
  5. सुरेश आंगड़ी, कर्नाटक के बेलगाम से लोकसभा सांसद
  6. अश्विनी चौबे, बिहार से बक्सर से सांसद
  7. सत्यपाल सिंह, यूपी के बाग़पत से सांसद
  8. हेमंत बिस्व शर्मा, असम सरकार में मंत्री
  9. ओम प्रकाश माथुर, बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, यूपी प्रभारी.
  10. कैबिनेट में सहयोगियों को भी जगह 
  11. आरसीपी सिंह, बिहार से राज्यसभा सांसद, नीतीश के क़रीबी संतोष कुशवाहा, पुर्णिया से जेडीयू के लोकसभा सांसद, 2010 में बीजेपी के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था, 2014 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जेडीयू में शामिल हो गए थे.
  12. कामकाज की एक्सेल शीट देखकर अमित शाह और पीएम मोदी ने लिया फैसला
    मंत्रियों के प्रदर्शन के हिसाब से आकलन किया गया है. इस बार काम के आधार पर सकारात्मक या नकारात्मक श्रेणियां बनाई गईं.  इस बार रैंकिंग नहीं दी गई. मंत्रियों के काम के आधार पर उनका काम सकारात्मक या नकारात्मक कहा गया. आकलन एक्सेल शीट पर तैयार हुआ. फेरबदल इसी आधार पर किया जा रहा है. आकलन पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को दिया गया. सहयोगी दलों के मंत्रियों को भी इसी आधार पर आंका गया है. आकलन के अन्य आधार संगठन से जुड़े कार्यक्रमों के क्रियान्वयन से जुड़े हैं. पार्टी ने मंत्रियों से यात्राएं निकालने को कहा था. इनमें संकल्प से सिद्धि, तिरंगा यात्रा, पटेल, दीनदयाल, 3 साल बेमिसाल जैसे कार्यक्रमों में कितना हिस्सा लिया या कितना प्रचार किया इसको आधार बनाया गया. इसके साथ ही केंद्र की योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए क्या किया. -उज्ज्वला जैसी योजना को कहां तक लागू किया. कितने दौरे किए, इन्हीं के आधार पर सकारात्मक और नकारात्मक श्रेणियों में रखा गया.उम्मीद जताई जा रही है कि कैबिनेट विस्तार में देश को नया रक्षा मंत्री भी मिल सकता है. मनोहर पर्रिकर के गोवा के मुख्यमंत्री बनने के बाद से वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास ही रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार है. गौरतलब है कि चीन सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच यह मांग भी उठी है कि देश में एक फुल टाइम डिफेंस मिनिस्टर होना जरूरी है. इसके साथ ही बैठक में जो मंत्रालय के पद खाली हैं या उस पर भी नियुक्तियां संभव है.
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