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पहली बार रेहड़ी-पटरी वालों के लिए लोन की व्यवस्था

patriकेंद्र सरकार की सोमवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर जानकारी दी है. उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, ‘देश में पहली बार सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों और ठेले पर सामान बेचने वालों के रोजगार के लिए लोन की व्यवस्था की है. ‘पीएम स्वनिधि’ योजना से 50 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा. इससे ये लोग कोरोना संकट के समय अपने कारोबार को नए सिरे से खड़ा कर आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देंगे.’

प्रधानमंत्री ने कहा, आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए हमने न केवल MSMEs सेक्टर की परिभाषा बदली है, बल्कि इसमें नई जान फूंकने के लिए कई प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है. इससे संकटग्रस्त छोटे और मध्यम उद्योगों को लाभ मिलेगा, साथ ही रोजगार के अपार अवसर सृजित होंगे. ‘जय किसान’ के मंत्र को आगे बढ़ाते हुए कैबिनेट ने अन्नदाताओं के हक में बड़े फैसले किए हैं. इनमें खरीफ की 14 फसलों के लिए लागत का कम से कम डेढ़ गुना एमएसपी देना सुनिश्चित किया गया है. साथ ही 3 लाख रुपये तक के शॉर्ट टर्म लोन चुकाने की अवधि भी बढ़ा दी गई है.

बता दें, सोमवार की कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए. इसमें कृषि, मजदूरी से लेकर छोटे उद्योगों के लिए कई बड़े फैसले हुए. बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि रेहड़ी पटरी वालों की योजना को एक नया नाम दिया गया है. अब यह योजना पीएम स्वनिधि योजना के नाम से जानी जाएगी जो मुख्य रूप से रेहड़ी पटरी वालों के लिए समर्पित होगी.प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि एमएसएमई की परिभाषा तो बदली ही गई है, अब इसकी परिभाषा का दायरा भी बढ़ाया गया है. एमएसएमई में ये संशोधन 14 साल बाद हुए हैं. 20 हजार करोड़ रुपये के अधीनस्थ कर्ज के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है. इसी के साथ 50 हजार करोड़ के इक्विटी निवेश को भी मंजूरी दी गई है.

नितिन गडकरी ने कहा कि एमएसएमई को लेकर दो फंड बनाए गए हैं. पहला डिस्ट्रेस एसेसमेंट फंड जिसमें 4 हजार करोड़ का प्रावधान है जबकि दूसरे को फंड ऑफ फंड्स कहा गया है जो 50 हजार करोड़ रुपये का है. इन दोनों शेयरों को बहुत जल्द शेयर मार्केट में सूचीबद्ध किया जाएगा.नितिन गडकरी ने कहा कि एमएसएमई अभी कठिन दौर से गुजर रहा है. देश में 6 करोड़ एमएसएमई हैं जिनमें 11 करोड़ से ज्यादा लोगों को नौकरी मिली है. उन्होंने कहा, एमएसएमई की मजबूती से निर्यात बढ़ेगा. 25 लाख एमएसएमई के पुनर्गठन की उम्मीद है. मजबूत एमएसएई के 15 फीसदी इक्विटी खरीदने की योजना है. कमजोर उद्योगों को उबारने के लिए 4 हजार करोड़ का फंड दिया गया है.गडकरी ने कहा कि एमएसएमई के लिए ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं. एमएसएमई से 6 करोड़ छोटे कारोबारी जुड़े हैं, जिन्हें इस योजना से बड़ा लाभ मिलेगा. 2 लाख एमएसएमई नए फंड से फिर शुरू हो जाएंगे.

एमएसएमई के कारोबार की सीमा 5 करोड़ रुपये की गई है. आज की बैठक में जो फैसले लिए गए हैं उससे रोजगार बढ़ाने में मदद मिलेगी. देश में 6 करोड़ से ज्यादा एमएसएमई की अहम भूमिका है. लोग अपना कामकाज ठीक से कर सकें, इसके लिए सरकार ने बड़े फैसले लिए हैं. एमएसएमई को लोने देने की व्यवस्था की गई है. एमएसएमई के लिए 20 हजार करोड़ रुपये लोन देने का प्रावधान है. सैलून, पान की दुकान और मोची को भी इस योजना से लाभ होगा. सरकार व्यवसाय को आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है. एमएसएमई को लोन देने के लिए 3 लाख करोड़ की योजना है. रेहड़ी पटरी वालों के लिए लोन की योजना लाई गई है. रेहड़ी पटरी वालों को 10 हजार का लोन मिलेगा.

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में बड़ी बढ़ोतरी की गई है. किसानों के लिए सरकार की तरफ से यह बड़ा ऐलान है. मक्का के समर्थन मूल्य में 53 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है. तूअर और मूंग में 58 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है. तोमर ने कहा कि 14 फसल ऐसी हैं जिसमें किसानों को 50 से 83 फीसदी तक ज्यादा समर्थन मूल्य दिया जाएगा.

नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि अभी तक सरकार ने 360 लाख मिट्रिक टन गेहूं का प्रोक्योरमेंट किया है. इसी के साथ 95 लाख मिट्रिक टन धान और 16.07 लाख मिट्रिक टन दाल का प्रोक्योरमेंट किया गया है. इसी बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1868 रुपये किया गया है. गडकरी ने कहा कि एमएसएमई अभी कठिन दौर से गुजर रहा है. देश में 6 करोड़ एमएसएमई हैं जिनमें 11 करोड़ से ज्यादा लोगों को नौकरी मिली है.

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