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बाबर के नाम से मस्जिद नहीं बनाएगा सुन्नी वक्फ बोर्ड

maszid ayodhyaसुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने साफ किया है कि अयोध्या में दी गई जमीन पर बनने वाली मस्जिद का नाम बाबरी मस्जिद के नाम पर नहीं होगा.इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट के प्रवक्ता ने बताया कि मस्जिद निर्माण में शिलान्यास के कार्यक्रम की इस्लाम में इजाजत नहीं है. सिर्फ नींव खोद कर मस्जिद की शुरुआत होती है, लेकिन इस जमीन पर जब अस्पताल या फिर ट्रस्ट के भवन की नींव रखी जाएगी तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित किया जाएगा.इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट के प्रवक्ता के मुताबिक जमीन पर शुरुआत के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी आमंत्रित किया जाएगा. बता दें कि ‘आजतक’ को दिए इंटरव्यू में योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि मस्जिद के शिलान्यास के कार्यक्रम में उन्हें न तो कोई बुलाएगा और न ही वह जाएंगे.पिछले 2 दिनों से सोशल मीडिया में यह चर्चा लगातार चल रही थी कि अयोध्या के पास रौनाही के धन्नीपुर गांव में बनने वाली मस्जिद का नाम बाबर के नाम पर होगा, जिसे सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने खारिज कर दिया और इसे अफवाह बताया.सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने हाल ही में इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट का निर्माण किया है जो अयोध्या में मस्जिद और उसके साथ साथ अस्पताल, कम्युनिटी सेंटर और कम्युनिटी किचन बनाएगा. साथ ही वहां इस्लामिक मामलों पर एक रिसर्च सेंटर भी होगा.

  • सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड ने स्‍पष्‍ट किया है कि अयोध्‍या में बाबरी के नाम पर मस्जिद नहीं बन रही है
  • कोर्ट की तरफ से दी गई 5 एकड़ जमीन पर अस्‍पताल, रिसर्च सेंटर और पुस्तकालय बनेगा
  • परिसर में एक मस्जिद भी बनेगा पर उसका नामकरण बाबर के नाम पर नहीं होगा
  • दावा किया जा रहा था कि परिसर में बाबरी अस्‍पताल भी खुलेगा, ट्रस्‍ट ने कहा-झूठी खबर

अयोध्या जनपद के सोहावल तहसील में जनपद मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर लखनऊ-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे थाना रौनाही के पीछे धन्नीपुर में जमीन मस्जिद के लिए दी गयी है। बता दें कि मस्जिद के लिए चिन्हित जमीन कृषि विभाग की है। 5 एकड़ भूमि जिस इलाके में दी गई है, वहां पर प्रसिद्ध शहजाद शाह की दरगाह है।

अफवाहों का किया खंडन
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिली इस जमीन पर एक मस्जिद, एक सांस्कृतिक और शोध केंद्र एक अस्पताल, एक पुस्तकालय बनाया जाएगा। प्रेस नोट में यह भी कहा गया कि भिन्न-भिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक झूठी खबर फैलाई जा रही है कि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने एक बाबरी अस्पताल बनाने का फैसला किया है और खलील खान उसके डायरेक्टर होंगे।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जो ट्वीट किया है उसके मुताबिक- “बाबरी मस्जिद थी और हमेशा एक मस्जिद रहेगी।

चाहे शाहबानों में मामले में तीन तलाक के मुद्दे पर स्टैंड हो या फिर अयोध्या के मामले पर। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हमेशा ही ऐसे बयान और कदम उठाएं हैं जो इस देश की गंगा जमुनी तहजीब में यकीन रखने वाले मुसलमानों के प्रति नजरिये को बदलने वाले रहे हैं।बोर्ड की समझ और बयान ने पूरे देश के मुसलमानों को नुकसान पहुंचाया है। ताजा मामला एक ट्वीट के जरिए सामने आ रहा है जो 5 अगस्त को अयोध्या में राम जन्मभूमि पूजन के बाद किया गया। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जो ट्वीट किया है उसके मुताबिक- “बाबरी मस्जिद थी और हमेशा एक मस्जिद रहेगी। #HagiaSophia हमारे लिए एक बेहतरीन मिसाल है।अन्यायपूर्ण, दमनकारी, शर्मनाक और बहुसंख्यक तुष्टिकरण के आधार पर जमीन का पुनर्निर्धारण का फैसला इसे बदल नहीं सकता है। अपना दिल तोड़ने की जरूरत नहीं है। हालात हमेशा एक से नहीं रहते।”

बता दूं विश्व प्रसिद्ध इमारत HagiaSophia कभी एक चर्च हुआ करता था। 1453 में जब इस शहर पर इस्लामी ऑटोमन साम्राज्य का कब्जा हुआ तो इस इमारत में तोड़फोड़ कर इसे मस्जिद में तब्दील कर दिया गया।इसके बाद कमाल अतातुर्क उर्फ मुस्तफा कमाल पाशा ने 1934 में मस्जिद को म्यूजियम में बदल दिया क्योंकि वह धर्म की जगह पश्चिमी मूल्यों से प्रेरणा चाहते थे, लेकिन तुर्की के कट्टर छवि वाले राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हागिया सोफिया को एक बार फिर से मस्जिद में तब्दील कर दिया।एर्दोगान ने हागिया सोफिया के अंदर बैठकर नमाज दी भी अदा की। इस दौरान उन्होंने दुनियाभर में हो रही आलोचनाओं को भी अनसुना कर दिया गया। अब मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड HagiaSophia को मिसाल मान रहा है।बोर्ड और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के कारण ही 6 दिसम्बर को बाबरी मस्जिद ढहाई गई, तब न मस्जिद गिरती न आज मंदिर का यूं निर्माण शुरू होता। उनके ऐसे ही बयानों ने देश में बाबरी मस्जिद के खिलाफ माहौल तैयार कर दिया था।भाजपा को हिन्दूू मुसलमान की राजनीति करने का मौका मिला गया जिसके कारण 6 दिसम्बर की घटना हुई। अस्सी के दशक में इन उग्र मुस्लिम संस्थाओं के कारण देश में जो माहौल बना उससे आने वाले खतरे को हमारे लखनऊ के मुस्लिम धर्मगुरू अली मियां ने भाप लिया था।अली मियां अकेले ऐसे मुस्लिम धर्मगुरू थे जिनकी सभी फिरके के मुसलमान इज्जत करते थे। मुझे याद है बाबरी मस्जिद का मुद्दा जब पूरे उफान पर था और मस्जिद तब टूटी नहीं थी। तब उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘कारवां ए जिन्दगी’ में लिखा था- ‘मैंने खुली आंख से ये देख रहा हूं बाबरी मस्जिद आंदोलन जिस तरह से चलाया गया उसने बहुसंख्यकों के दिलों में हिन्दू जागृति का जोश पैदा कर दिया है।” उन्होंने आगे कहा-“जो बड़े से बड़े हिन्दू पेशवा और प्रचारक पैदा नहीं कर पाए थे।इस्लामी लिहाज से ये नासमझी और अंधापन ही नहीं मुसलमानों के लिए ये खुदकुशी की तरह है। आपकी करतूतों से पड़ोसी समुदाय में अपने धार्मिक जागरण का खानदानी और दुश्मनी से भरा जोश पैदा हो जाए जो किसी मस्जिद या मरदसे और इस्लामी जीवन शैली के खिलाफ हो।इनकी ना-अक्ली और ना-समझी इस समस्या का समाधान नहीं होने देगी.” सतो अली मियां की सलाह नहीं मानी और आज राम जन्म भूमि मंदिर की नींव पड़ गई। अगर मुस्लिम संगठन अभी हागिया सोफिया जैसे उदाहरण देते रहेंगे तो हालात और बिगड़ेंगे।ये वक्त है मुस्लिम संगठन धैर्य से काम लें और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करें। और ऐसे बयान न दें जिससे दोनों समुदाय में नफरत की खाई और गहरी हो।

 

 

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