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कमलनाथ सरकार जाएगी या बचेगी ?

kamalnath-21-1583332014-432536-khaskhabarमध्यप्रदेश में राज्यपाल लालजी टंडन ने स्पीकर को 16 मार्च को कमलनाथ सरकार के शक्ति परीक्षण का निर्देश दे दिया है. ऐसे में सारी निगाहें अब स्पीकर पर टिकी हैं. उधर जयपुर में मौजूद कांग्रेस विधायक वापस भोपाल पहुंच चुके हैं. इन विधायकों के साथ मुख्यमंत्री कमलनाथ की बैठक होनी है, जिसमें आगे की रणनीति तय होगी. इधर दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता नरेंद्र सिंह तोमर के आवास पर शक्ति परीक्षण को लेकर एक बैठक हुई जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल हुए. बाद में इन सभी नेताओं ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से उनके आवास पर मुलाकात की.बता दें, मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार बचाने की चुनौती बढ़ गई है. सोमवार को विधानसभा में बहुमत परीक्षण किया जाना है. राज्यपाल लालजी टंडन ने शक्ति परीक्षण कराने का आदेश दिया है. सोमवार को शुरू हो रहे बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण के फौरन बाद वोटिंग होगी. बहुमत परीक्षण कराने के राज्यपाल के फैसले से कांग्रेस नाराज है. उसने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है. दूसरी ओर जयपुर रिजॉर्ट में रुके कांग्रेस विधायकों की भोपाल वापसी हो गई है. इन सभी विधायकों ने भोपाल लौटते ही बीजेपी पर निशाना साधा है. इनमें 6 बागी मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है जिसे विधानसभा स्पीकर ने स्वीकार भी कर लिया है. बाकी 16 का इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है.

गोपाल भार्गव का हमला

6 मंत्रियों का इस्तीफा मंजूर होने पर बीजेपी नेता गोपाल भार्गव ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष निष्पक्ष होकर अपना काम नहीं कर रहे हैं. इन सभी उठापटक के बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस ने अपने विधायकों को 3 लाइन का व्हिप जारी किया है. व्हिप में बजट सत्र में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है. दूसरी ओर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अमित शाह को चिट्ठी लिखी है और बेंगलुरु से 22 विधायकों को रिहा कर भोपाल भेजने की मांग की है. शाह को लिखी चिट्ठी में कमलनाथ ने पूरे संकट के लिए बीजेपी को जिम्मेदार बताया है. कमलनाथ ने विधायकों की खरीद-फरोख्त का भी आरोप लगाया है.

सुरक्षा की मांग उठाई

इस बीच, मध्य प्रदेश कांग्रेस के बागी विधायकों ने वीडियो जारी कर अपनी सुरक्षा में केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात करने की मांग की है. बेंगलुरु में मौजूद कई बागी विधायकों ने वीडियो संदेश जारी कर विधानसभा अध्यक्ष से यह अनुरोध किया है. कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे दबाव में जारी किए जाने की बात कही है. पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक कांग्रेस के बागी 22 विधायकों ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. इनमें से 6 विधायकों का इस्तीफा विधानसभाध्यक्ष एन.पी. प्रजापति ने मंजूर कर लिया है. बेंगलुरु में मौजूद विधायकों ने रविवार को वीडियो संदेश जारी कर सुरक्षा की मांग की है.वीडियो संदेश में विधायकों ने कहा है, “विधानसभा अध्यक्ष ने हमें उपस्थित होने का नोटिस दिया है. हमें जानकारी मिली है, लेकिन हम अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. भोपाल आने पर सुरक्षा को लेकर संशय है. इसलिए जरूरी है कि हमारी सुरक्षा के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की मदद ली जाए.” कांग्रेस प्रवक्ता और मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष सैयद जाफर ने कहा, “विधायकों से यह वीडियो दबाव में बनवाए गए हैं. जो वीडियो सामने आए हैं, उनमें विधायक के साथ दूसरे व्यक्ति की फुसफुसाती आवाज बताती है कि ये वीडिया सिखा-पढ़ाकर बनाए गए हैं.”

इन विधायकों ने दिए इस्तीफे

गौरतलब है कि गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, तुलसी सिलावट, प्रभुराम चौधरी, महेंद्र सिंह सिसोदिया के अलावा विधायक हरदीप सिंह डंग, जसपाल सिंह जज्जी, राजवर्धन सिंह, ओपीएस भदौरिया, मुन्ना लाल गोयल, रघुराज सिंह कंसाना, कमलेश जाटव, बृजेंद्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, गिरराज दंडौतिया, रक्षा संतराम सिरौनिया, रणवीर जाटव, जसवंत जाटव ने इस्तीफे दे दिए हैं. विधानसभा अध्यक्ष एन.पी. प्रजापित ने इनमें से 6 विधायकों के इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं.

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