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मुद्रा लोन का एनपीए 14 हजार 358 करोड़

PMMY-Mega-Camp-Posterकेंद्र सरकार के चार साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तमाम योजनाओं के अब तक के सफर का खाका पेश कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने मुद्रा योजना के बारे में जानकारी दी कि इसके तहत 12 करोड़ परिवारों को 6 लाख करोड़ का लोन दिया गया है। कारोबार के लिए कर्ज लेने वाले इन लोगों में 28 प्रतिशत यानी 3.25 करोड़ लाभार्थियों का धंधे में यही पहला कदम है। पीएम की बात से लगा, जैसे इस योजना के जरिए भारत में रोजी-रोजगार की समस्या का हल ढूंढ लिया गया है और जल्दी ही देश को बेरोजगारी से मुक्ति मिल जाएगी। बीजेपी के और भी कई नेता अक्सर इस योजना को लेकर यही बात कहते रहे हैं, हालांकि अन्य स्रोतों से प्राप्त जानकारियां इसकी तस्दीक नहीं करतीं।

उनकी मानें तो यह योजना अपने मकसद में कामयाब नहीं ही हुई है, उलटे सरकार के लिए यह नई मुसीबत भी खड़ी कर रही हैं। बैंकों ने सरकार और आरबीआई को बताया है कि मुद्रा लोन का बट्टाखाता (एनपीए) अब 14 हजार 358 करोड़ का हो चुका है। यानी इस लोन को चुकाए जाने की संभावना बहुत कम है। यह एनपीए आगे और बढ़ सकता है। इस योजना के क्रियान्वयन में भारी अनियमितता की खबरें देश भर से आई हैं। इसे पूरी तरह बैंकों के भरोसे छोड़ दिया गया है, लिहाजा बैंककर्मियों ने इसका खूब फायदा उठाया है। तमाम नियमों को ताक पर रखकर वे अपने करीबी आवेदकों को लोन दे रहे हैं, बाकियों को टरकाने के लिए फाइल में कोई नुक्स निकाल दे रहे हैं। पंजाब नेशनल बैंक की बाड़मेर शाखा में तो बड़ा फर्जीवाड़ा हो गया, जिसकी जांच सीबीआई कर रही है।

वहां गलत तरीके से 26 लोन बांटे गए, जिसमें बैंक को करीब 62 लाख रुपये का नुकसान हुआ। मुद्रा लोन तीन अलग-अलग कैटिगरी शिशु, किशोर और तरुण के तहत दिए जाते हैं। शिशु कैटिगरी के तहत 50 हजार रुपये तक, किशोर के तहत 5 लाख और तरुण के तहत 5 से 10 लाख तक दिए जाते हैं। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ 1.3 फीसद मुद्रा लाभार्थियों को ही स्वरोजगार के लिए 5 लाख या उससे ज्यादा का कर्ज मिला है। सबसे ज्यादा ऋण शिशु वर्ग में दिया गया है। आज की तारीख में सिर्फ पचास हजार में कौन सा नया धंधा शुरू किया जा सकता है, सोचने की बात है। फिर कारोबार शुरू कर देना काफी नहीं है। वह चलता रहे, इसके लिए सरकार ने कुछ नहीं सोचा। जिस दौर में आलू-प्याज और नमक तक बेचने में बड़ी-बड़ी कंपनियां जुटी हों, उसमें छोटे कारोबारी बिना संरक्षण और प्रोत्साहन के कैसे टिक पाएंगे? सरकार मुद्रा को लेकर गंभीर है तो उसे इन पहलुओं पर सोचना चाहिए और इसमें जारी भ्रष्टाचार पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। वरना इसके किस्से उसे लंबे समय तक तंग करते रहेंगे।

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