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किसी ने मदद के लिए पिता को पुकारा तो किसी ने भाई को पर …..

Delhi-Fireनई दिल्ली। आदमी मजबूर है और किस कदर मजबूर। मौत ने ऐसा घेरा कि कोई बचा न सका। आग में फंसे किसी व्यक्ति ने अपने पिता को फोन कर मदद मांगी तो किसी ने भाई को। पर मौत पहले आ पहुंची।बेबसी का यह मंजर हिला देने वाला है। कई परिवार तबाह हो गए। रोजी रोटी के लिए लोग दिल्ली आए थे मौत मिली।दिल्लीवालों के लिए रविवार का दिन एक दुखद घटना के साथ शुरू हुआ जब रानी झांसी रोड़ पर अनाज मंडी स्थित एक फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। इस आग की भयावहता ऐसी थी कि इसमें 43 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए जिन्हें राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जिस अस्पताल में घायलों को भर्ती कराया गया उसमें एलएनजेपी, सफदरजंग, आरएमएल और हिंदू राव हॉस्पिटल शामिल हैं।

पिताजी जहां हम रहते हैं, वहां आग लग गई है। हम नहीं बच पाएंगे। आप परेशान मत होना और हमें मत ढूंढना। यह बात दिल्ली के रानी झांसी रोड स्थित अनाज मंडी इलाके इमारत में लगी आग में फंसे इमरान ने मौत से पहले अपने पिता से कही थी। इमरान ने जब फोन किया था वह अपने दो भाइयों के साथ इमारत में मौजूद था। अपने बचने की उम्मीदें खत्म होने के बाद अपने पिता को फोन किया। इसके बाद उसका फोन कट गया और फिर कभी नहीं मिला। परिजनों ने दिल्ली में रहने वाले रिश्तेदारों को फोन किया और इमरान का पता लगाने के लिए कहा। लेकिन रविवार रात तक उसका कुछ पता नहीं चल पाया।

तीन बार किया था फोन

इमरान के भाई सोनू ने बताया कि रविवार सुबह जब घर में सब सोए हुए थे। सुबह करीब 4.30 बजे दिल्ली से इमरान भाई का फोन आया। दो बार फोन कटने के बाद तीसरी बार में पिताजी की नींद खुली। उन्होंने फोन उठाया और फोन उठाते ही इमरान भाई ने बस इतना कहा कि पिताजी आग लग गई है और हम नहीं बच पाएंगे। आप हमें मत ढूंढना और परेशान मत होना। उनकी बात सुनकर पिताजी चिल्लाकर पूछने लगे। जिससे घर के सभी लोगों की निंद खुल गई। पिताजी ने सभी को इमरान के फोन के बारे में बताया। जिसके बाद अपने चचेरे भाई शाहजाद के घर में आग लगने की जानकारी दी गई और दिल्ली में अपने रिश्तेदारों को फोन कर तीनों भाइयों की जानकारी पता लगाने की बात कही।

यह उसकी जिंदगी की आखिरी कॉल थी….

चारो तरफ आग की भयानक लपटें और धुआं, दम घुट रहा था, मौत सामने थी, बचने की कोई गुंजाइश नहीं थी। ऐसे में मुशर्रफ को चिंता थी तो बस यह कि वह सिर पर पांच हजार का कर्ज लेकर दुनिया से रुखसत होगा। आखिर में आग में बुरी तरह झुलसे मुशर्रफ ने अपने दोस्त को फोन किया था। यह उसकी जिंदगी की आखिरी कॉल थी, जो उसके दोस्त के मोबाइल में रिकॉर्ड हो गई। करीब साढ़े पांच मिनट के इस ऑडियो में अधिकांश मुशर्रफ की टूटती सांसों की आवाजें हैं। इस ऑडियो में साफ है कि दर्द से कराह रहा मुशर्रफ अपनी मौत को सामने देख रहा है। इसीलिए वह दोस्त से अपने सिर से कर्ज का बोझ उतारने को कहता है।नगीना देहात थाना क्षेत्र के गांव टांडा माईदास निवासी 30 वर्षीय मुशर्रफ पुत्र वाहिद दिल्ली के अनाज मंडी इलाके की उसी फैक्ट्री में काम करता था, जहां रविवार सुबह भीषण अग्निकांड हुआ। वह वहां 10 साल से बैग बनाने का काम कर रहा था। फैक्ट्री में आग से घिरे मुशर्रफ ने ग्राम प्रधान पति फुरकान और अपने दोस्त शोभित अग्रवाल को फोन किया था।शोभित से मुशर्रफ की पांच मिनट 36 सेकंड बात हुई। उसने शोभित से कहा कि वह चारों ओर से आग में घिर गया है। उसकी सांस अटक रही है। आग से निकला नहीं जा सकता है। अभी तक दमकल की गाड़ी भी नहीं पहुंची है। उसने दिल्ली के रहने वाले मोनू के खुद पर पांच हजार रुपये उधार बताए। मुशर्रफ ने शोभित से कहा कि मोनू के पैसे लौटा देना। शोभित उसे दिलासा दे रहा है कि वह बच जाएगा। ऐसी बातें न करे। ऑडियो में मुशर्रफ की सांसों की डोर टूटने की आवाजें हैं। धुएं से उसका दम घुट रहा है। इधर से दोस्त बार-बार उसका नाम लेता है लेकिन वह चाहकर भी कुछ बोल नहीं पाता। आखिर में रोते-रोते उसकी सांसें थम जाती हैं।मुशर्रफ परिवार में अकेला कमाने वाला था। वह बूढ़े मां-बाप, पत्नी व चार बच्चों का सहारा था। उसका निकाह 2010 में बढ़ापुर थाने के ग्राम गोपीवाला की इमराना से हुआ था। आठ वर्षीय बेटे मोहम्मद कैफ, छह वर्षीय बेटी अर्निश, चार वर्षीय अरीबा और दो वर्षीय इकरा को नहीं मालूम कि उनके सिर से पिता का साया उठ गया है। पत्नी और मां चारों बच्चों से लिपटकर बिलख रही हैं। परिजन प्रधान पति फुरकान और सलीम के साथ दिल्ली के अस्पताल पहुंच गए। पोस्टमार्टम के बाद ही सोमवार तक शव आने की उम्मीद है।मुशर्रफ ने फोन पर अपने भाई से कहा, ‘मैं मरने वाला हूं भाई…भाई, कल दिल्ली आओ और मुझे ले जाओ. हर जगह आग है और बचने का कोई रास्ता नहीं है. ‘मैं आज जीवित नहीं रहूंगा. भाई कृपया मेरे परिवार का ख्याल रखना…मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं… बस आकर मुझे ले जाओ…परिवार को संभालना. मुशर्रफ ने कहा कि वह मौत की खबर को घर के बड़ों को दे दे.

भीकमपुर से दिल्ली पहुंचे लोग

रविवार दोपहर तक भीकमपुर से इमरान के रिश्तेदार दिल्ली आ गए। उनके आने से पहले ही दिल्ली में रहने वाले रिश्तेदार तीनों भाई इमरान, इकराम और शाहजाद की तलाश कर रहे थे। लेकिन तीनों में से किसी का भी पता नहीं चला। रविवार देर रात तक तीनों भाइयों की तलाश में परिजन परेशान हो रहे थे। इमरान के भाई सोनू ने बताया कि पुलिस और अस्पताल के लोग कोई मदद नहीं कर रहे और ना ही कुछ बता रहे हैं।आग इतनी भीषण थी कि मौके पर दमकल की 30 गाड़ियों को तैनात करना पड़ा। अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने 50 से ज्यादा लोगों को बचाया है। इस दर्दनाक हादसे में मरने वाले 43 लोगों में से एक मुशर्रफ ने हादसे से पहले अपने भाई से फोन पर बात की थी। मुशर्रफ के भाई के मुताबिक मुशर्रफ ने उन्हें सुबह 5 बजे फोन किया था।ये बताया कि आग लग गयी है। निकलने की कोई जगह नही है। ये भी कहा कि लगता है मैं नही बचूंगा। भुरेखान ने उन्हें बिल्डिंग से कूदने की सलाह दी थी मगर वो कहा कुछ पता नहीं चल रहा। दुम घुट रहा है। ये आखिरी बात उनसे हुई उसके बाद फ़ोन बंदद हो गया। अब एलएनजेपी में उनका शव देखने को मिला है।

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