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एनडीआरएफ जवान ; केरल के देवदूत

ndrfनई दिल्ली । केरल में आई बाढ़ की तस्‍वीर जब भी सामने आती है तो सबसे पहले सामने आते हैं वो जवान जो मुश्किल हालातों में दूसरों की मदद कर रहे हैं। इन जवानों में शामिल एनडीआरएफ के हजारों जवान। इनकी जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। इन्‍हीं जवानों के दम पर आज केरल की बाढ़ में फंसे हजारों लोगों को नया जीवन मिला है। आज इन जवानों को केरल के लोग भी सलाम कर रहे हैं। मीडिया में आई कुछ तस्‍वीरें इस बात की साफतौर पर गवाही दे रही हैं।

केरल में एनडीआरएफ की भूमिका 
केरल में आई बाढ़ के शुरुआत से ही एनडीआरएफ की टीम के जवान वहां पर लोगों को सुरक्षित स्‍थानों पर पहुंचाने में लगे हैं। एनडीआरएफ ने केरल में राहत कार्य के लिए 58 टीमें बनाई हैं। हाल ही में एक वीडियो में यहां तक देखा गया कि एनडीआरएफ का एक जवान मुश्किल में फंसे लोगों को नाव पर चढ़ाने के लिए खुद सीढ़ी बन गया। गौरतलब है कि केरल के 11 जिलों में लोग भारी बारिश और बाढ़ के चलते बेघर हो गए हैं। एनडीआरएफ ने अब तक कुल 10 हजार से ज्यादा लोगों को बाढ़ से बचाकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया है। अब तक केरल में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से 357 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अगर केरल को छोड़ दें तो एनडीआरएफ 73 ऑपरेशन को अंजाम दे चुकी हैं।

केरल में 25 हजार से ज्‍यादा लोगों को बचाया
एनडीआरएफ के पीआरओ असिसटेंट कमांडेंट किशन कुमार के मुताबिक केरल में बाढ़ में फंसे लोगों को निकालकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के लिए कुछ 58 टीमें लगी हैं, जिनमें से हर टीम में करीब 42 जवान मौजूद हैं। उनके मुताबिक आज तक एनडीआरएफ के द्वारा करीब 25,494 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा चुकी है। आपको बता दें कि एनडीआरएफ किसी भी तरह का रिलीफ कैंप नहीं चला रही है। लेकिन वह जरूरतमंदों को पानी की सप्‍लाई से लेकर खाने पीने की चीजें पहुंचाने का भी काम कर रही है। इसके अलावा बीमार लोगों को अस्‍पताल भेजने का काम भी एनडीआरएफ कर रही है। केरल के मौजूदा हालात पर किशन कुमार ने बताया कि पहले के मुकाबले अब केरल की स्थिति लगातार सुधर रही है। मौजूदा समय में तीन राज्‍य जिसमें एरनाकुलम और त्रिशूर भी शामिल है, में हालात अब भी मुश्किलों से भरे हैं। लेकिन अन्‍य जगहों पर हालात लगातार सुधर रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि एनडीआरएफ की टीम के साथ उनकी मेडिकल टीम भी मौके पर लोगों के ट्रीटमेंट में लगी है।

2006 में किया गया गठन 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एनडीआरएफ का गठन डिजास्टर मैनेजमेंट ऐक्ट 2005 के तहत किया गया था। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और नागरिक सुरक्षा एक पुलिस बल है। 1999 के ओडिशा के सुपर चक्रवात, 2001गुजरात भूकंप और 2004 में आई सूनामी के बाद इसके गठन की काफी जरूरत महसूस की जा रही थी। इसके गठन के पीछे सबसे बड़ा मकसद था कि पीडि़तों तक जल्‍द से जल्‍द पहुंचकर उन्‍हें सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा सके। इसके अलावा एक ऐसी टीम बनाने का विचार था जिसमें रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन के एक्‍सपर्ट मौजूद हों। गठन के बाद इसको कानून और व्यवस्था की स्थिति संभालने में भी तैनात किया जाता था। 14 फरवरी 2008 से इसको केवल आपदा संबंधी दायित्वों के लिए निर्धारित कर दिये गए।

कई जगहों पर काम आई एनडीआरएफ 
वर्ष 2014 में मेघालय और जम्‍मू कश्‍मीर में आई बाढ़, 2015 में नेपाल में आए भूकंप, 2015 में आई चेन्‍नई में बाढ़, 2016 में बिहार, यूपी और मध्‍य प्रदेश में आए भूकंप, 2016 में उत्तराखंड में लगी आग, 2016 में ट्रेन एक्‍सीडेंट के दौरान एनडीआरएफ का काम काफी सराहनीय रहा है। एनडीआरएफ अपने गठन से लेकर आज तक 5,52,018 लोगों को बचा चुकी है।

देशभर में फिलहाल एनडीआरएफ के 12 केंद्र हैं। हर जगह इनकी अलग अलग बटालियन तैनात रहती हैं। ये केंद्र इस तरह हैं:-

1. पहली बटालियन – गुवाहाटी – असम (24 जिले), मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा
2. दूसरी बटालियन – हरिनघाटा (बंगाल) – सिक्किम, पश्चिम बंगाल
3. तीसरी बटालियन – मुंडाली (ओडिशा) – ओडिशा, छत्तीसगढ़
4. चौथी बटालियन – अर्कोनाम (तमिलनाडु) – अंडमान, केरल, पुडुचेरी,लक्षदीव,तमिलनाडु
5. पांचवीं बटालियन – पुणे – महाराष्ट्र, गोवा
6. छठी बटालियन – वडोदरा (गुजरात) – गुजरात, राजस्थान, दमन,दादर,नागर हवेली
7. सातवीं बटालियन – भटिंडा (पंजाब) – चंडीगढ़, हिमाचल, पंजाब, जम्मू-कश्मीर
8. आठवीं बटालियन – गाजियाबाद – दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, उप्र (दो जिले)
9. नौवीं बटालियन – पटना – बिहार, झारखंड
10 दसवीं बटालियन – विजयवाडा (आंध्र) – आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक
11. ग्यारहवीं बटालियन – वाराणसी – मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश (73 जिले)
12. बारहवीं बटालियन – दोमुख (असम) – असम (नौ जिले), अरुणाचल, मणिपुर, नगालैंड

 

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