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नेपाली संसद में विवादित नक्शे पर चर्चा

Nepal Kathmanduनेपाल और भारत के बीच विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है. भारत के भूभाग पर दावा पेश करने के बाद अब नेपाल की संसद में इस पर चर्चा हुई. ये चर्चा नक्शे को वैधानिकता देने के लिए हुई थी.नेपाल सरकार द्वारा जारी किए गए नक्शे पर वहां की एक सांसद ने इसका विरोध किया और इसे तुरंत खारिज करने की भी मांग की. सांसद ने खुलेआम संविधान संशोधन का विरोध किया. सरकार द्वारा नए नक्शे को संविधान का हिस्सा बनाने के लिए लाए गए संविधान संशोधन प्रस्ताव पर अपना अलग से संशोधन प्रस्ताव डालते हुए जनता समाजवादी पार्टी की सांसद सरिता गिरि ने इसे खारिज करने की मांग की है.नेपाल की संसद में संविधान संशोधन प्रस्ताव पर अपना परामर्श डालने के लिए 72 घंटे का समय दिया गया है. सरिता गिरि ने कहा कि नेपाल सरकार के पास पर्याप्त प्रमाण नहीं होने की वजह से इस संशोधन प्रस्ताव को खारिज किया जाए.हालांकि सरिता गिरि के द्वारा संशोधन प्रस्ताव दर्ज कराते ही उनकी पार्टी ने उनको तुरंत यह परामर्श वापस लेने का निर्देश दिया है. साथ ही वापस नहीं लेने पर पार्टी से कार्रवाई कर निलंबित करने तक की चेतावनी दी है. जनता समाजवादी पार्टी वही दल है जिसका उदय दो पार्टीयों- समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता पार्टी के विलय स्वरूप हुआ था.नेपाली संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में मंगलवार को देश के नए राजनीतिक नक्शे और नए प्रतीक चिन्ह को अपनाने के लिए संविधान संशोधन करने के प्रस्ताव पर आम सहमति बन गई है.प्रतिनिधि सभा में मंगलवार को इस पर बहस हुई और संविधान में संशोधन के प्रस्ताव को मंज़ूरी मिल गई. हालांकि इस बारे में संसद में अभी और बहस होनी है और संविधान संशोधन के औपचारिक मसौदे पर वोटिंग होगी.प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार ने इस सिलसिले में प्रतिनिधि सभा के समक्ष नए राजनीतिक नक्शे और एक नए राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह को मान्यता देने का प्रस्ताव रखा था.नए नक्शे में नेपाल ने अब आधिकारिक रूप से 1816 में हुई सुगौली संधि के तहत लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली क्षेत्र के रूप में दिखलाया है.

नक्शा संबंधित संविधान संशोधन प्रस्ताव को संसद में पेश किया

पिछले रविवार को दोनों पार्टियों ने सरकार के नक्शा संशोधन प्रस्ताव का विरोध करने के लिए एक दूसरे से हाथ मिलाया था, लेकिन बाद में किसी सांसद ने प्रस्ताव का विरोध नहीं किया. सरिता गिरि ने इस प्रस्ताव को खारिज करने की मांग कर खलबली मचा दी है. अब इनकी खुद की पार्टी समेत नेपाल की सभी राजनीतिक पार्टियां सरिता गिरि के विरोध में खड़ी हो गई हैं.इससे पहले संसद में सहभागी सभी दलों ने इस संशोधन के पक्ष में बोला है. प्रमुख प्रतिपक्षी दल नेपाली कांग्रेस तो पहले ही समर्थन करने की घोषणा कर चुकी है. लेकिन भारत के पक्ष में रहने वाली मधेशी पार्टी ने भी संसद में इसका विरोध नहीं किया है. सरिता गिरि पहली सांसद हैं जिन्होंने इस संशोधन का विरोध किया है.

संशोधन प्रस्ताव को पास करने के लिए मतदान करने की स्थिति बन सकती

पिछले हफ्ते नेपाल की संसद में संविधान संशोधन का प्रस्ताव पेश किया गया था. सरकार की तरफ से जिस दिन नक्शा संबंधित संविधान संशोधन प्रस्ताव को संसद में पेश किया था, उसी दिन नेपाल के राजपत्र में इसे प्रकाशित कर दिया गया था.हालांकि नेपाल में संविधान संशोधन का प्रस्ताव पारित करने के लिए कम से कम एक महीने का समय‌ चाहिए होता है. लेकिन भारत विरोधी राष्ट्रवाद को हवा देने के लिए प्रधानमंत्री ओली ने इसे जल्द से जल्द पारित कराने हेतु संबंधित नियमों को निलंबित करते हुए फास्ट ट्रैक रास्ता‌ अख्तियार किया है.सरकार के द्वारा पेश किए गए संविधान संशोधन पर मंगलवार को संशोधन प्रताव देने के लिए 72 घंटे का समय दिया गया था. इस बीच सरिता गिरि के इस प्रस्ताव को खारिज करने का प्रस्ताव पेश करने से अब सरकार के इस संशोधन प्रस्ताव को पास करने के लिए मतदान करने की स्थिति बन सकती है. संभवत: आने वाले रविवार को इस पर मतदान होगा अगर सरिता गिरि खारिज करने का प्रस्ताव वापस नहीं लेती हैं.

सीमा विवाद पर सीएम योगी ने नेपाल सरकार को चेताया

सीमा विवाद पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के बीच बुधवार को वार-पलटवार हुआ। पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल सरकार को चेतावनी दी और कहा कि राजनीतिक सीमा तय करने से पहले देखना चाहिए कि तिब्बत का क्या हश्र हुआ? वहीं, नेपाल के प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री के इस बयान को नेपाल का अपमान करार दिया।नेपाल सरकार ने अपनी संसद में संविधान संशोधन के जरिए भारतीय सीमा के कुछ हिस्से को अपने नक्शे में दिखाया है। भारत ने भी साफ कर दिया है कि वह सीमाओं के अनाधिकृत विस्तार को स्वीकार नहीं करेगा। इसी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लखनऊ  में प्रतिक्रिया दी।एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल सरकार को कड़ी चेतावनी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल को अपनी राजनीतिक सीमा तय करने से पहले सीमा के प्रभावों को ध्यान में रखना चाहिए। देखना चाहिए कि तिब्बत का क्या हश्र हुआ? नेपाल को तिब्बत जैसी गलती नहीं करनी चाहिए।

सीएम ने कहा- सीमाओं की बंदिशें रिश्तों को तय नहीं करती
नेपाल और भारत एक दूसरे की आत्मा हैं, भले ही ये दो देश हैं। भारत और नेपाल के सदियों पुराने रिश्ते हैं। इसे सीमाओं की बंदिशें नहीं तय कर सकती हैं। नेपाल सरकार को हमारे रिश्तों के आधार पर कोई फैसला करना चाहिए।नेपाल अगर नहीं चेता तो उसे तिब्बत का उदाहरण याद रखना होगा। वहीं, संविधान संशोधन के जरिए भारतीय हिस्से को अपने नक्शे में दिखाने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पलटवार किया है।नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा कि नेपाल को लेकर यूपी के मुख्यमंत्री का बयान निंदनीय है। अगर योगी डराने की कोशिश कर रहे हैं तो यह उचित नहीं है। मुख्यमंत्री के रूप में अगर ऐसी बात करते हैं तो आलोचना का विषय है। इसे नेपाल का अपमान भी समझा जा सकता है। नेपाल ऐसी भाषा के लिए तैयार नहीं है।

 

 

 

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